January 22, 2021

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भाजपा का किसान विरोधी आचरण चौ.चरण सिंह के प्रति कृतज्ञता नहीं, कृतघ्नता प्रदर्शित करता है;अखिलेश यादव

लखनऊ |पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी का 118वां जन्मदिवस बुधवार को समाजवादी पार्टी ने किसान दिवस के रूप में मनाया। सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चौधरी साहब का नमन करते हुए उनके राजनीतिक योगदान की चर्चा की। कहा कि इतिहास में पहला किसान दिवस आया है जब अन्नदाता सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा कारपोरेट की पोषक है, उसका गांव, गरीब से कोई रिश्ता नहीं है। चौधरी चरण सिंह के प्रति भाजपा का सम्मान भी दिखावटी है।

अखिलेश यादव ने सपा के राज्य मुख्यालय में चौधरी चरण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों का अपमान करना छोड़े।  इन दिनों किसानों के आक्रोश को देखते हुए वह भाजपा चौधरी साहब के प्रति दिखावटी सम्मान प्रदर्शित कर रही है। चौधरी साहब की बड़ी फोटो लगाने का क्या अर्थ, जब भाजपा का दिल ही बड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की बात सुनना नहीं चाहती है। वह किसानों को डराने- धमकाने में लगी है।

भाजपा का किसान विरोधी आचरण चौ. चरण सिंह के प्रति कृतज्ञता नहीं, कृतघ्नता प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा, धान-गन्ना की अपनी ही कमाई के लिए किसान भटक रहे है। एमएसपी का अता-पता नहीं। किसान के साथ जो वादे किए गए थे, वे पूरे नहीं किए गए। उल्टे, तीन कृषि कानून लाकर उनकी खेती कारपोरेट को बेचने की तैयारियां की जा रही है। कंपकपाती ठंड में किसान सड़कों पर है। दो दर्जन से ज्यादा किसान शहीद हो गए है। फिर भी किस मुंह से भाजपा अपने को किसान हितैषी बता रही है।

सपा की नीतियां चौधरी साहब के अनुरूप
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा की आर्थिक नीतियां वही है जो चौधरी साहब की रही हैं। उन्होंने केंद्र में वित्तमंत्री रहते बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा गांवों को दिया था। प्रदेश में सपा सरकार ने कुल बजट का 75 प्रतिशत गांव-खेती के लिए देकर उनका अनुसरण किया था। चौधरी साहब ने जमींदारी प्रथा का उन्मूलन कर किसानों को भूमिधर बनाया। भूमि संरक्षण कानून लागू किया। वह मानते थे कि किसानों की खुशहाली से ही देश खुशहाल होता है।

चौधरी साहब का कहना था कि खेतों से किसानों के स्वाभाविक लगाव की वजह से देश में सहकारी खेती सफल नहीं होगी। इसके लिए वे तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू  का विरोध करने में नहीं हिचकिचाए थे। वह जातिवाद के विरोधी थे। उनके सामाजिक न्याय की स्थापना के प्रयासों को समाजवादी गति देने का संकल्प लेकर चल रहे है।

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