July 7, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

भारत के हजारों वर्षों की गुलामी का सच;

भारत कभी गुलामी के जंजीरों में नहीं जकड़ा, ना ही कथित सल्तनत काल में (सल्तनत जैसा कोई काल ही नहीँ था, ये सुपारी इतिहासकारों का दिया हुआ शब्द है) और ना ही मुल्ले मुगलों के काल में और ना ही अंग्रेजों के काल में, 
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वास्तविकता यह है कि, मुल्ले मुगलों के काल में भारत की सिर्फ कुछ दिल्ली, आगरा, हैदराबाद जैसी रियासतों पर उनका अधिकार था ना कि भारत पर, उस समय देश नहीं बल्कि राजसत्ता के आधार पर राज्य होते थे, 
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विदेशी आक्रमणकारी सिर्फ राजसत्ता या फिर राजसत्ता के अधीन आने वाली रियासत जीतते था कि ना कि भारतवर्ष को, पूरे भारतवर्ष की बात छोड़ो आजतक कोई भी विदेशी आक्रमणकारी कभी एक दिशा नहीं जीत सका, .
मुल्ले मुगल भारत में कभी उन रियासतों पर भी राज नहीं कर पाये जहां उन्हें क्षणिक विजय मिली बल्कि सदा भारतीय योद्धाओं से संघर्षरत रहे, 
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कभी आपने सोचा है आपको सन् 1000 से 1900 तक के मुल्ले मुगल राजाओं का भारत की इतिहास की किताबो में वर्णन तो मिलता है लेकिन उनसे संघर्ष करने वाले भारतीय योद्धाओं का कभी नहीं, क्यों ???
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सबसे जरूरी प्रश्न यह कि, अगर भारत पर मुस्लिमों ने 800 साल राज किया तो वर्तमान समय में भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार व अन्य हिस्से) के मुस्लिम इतने कंगाल फटेहाल क्यों ? 800 साल राज किया तो राज जैसा कुछ झलकना भी तो चाहिए,
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मुल्ले मुगलों ने भारतीय सभ्यता को ही उजाड़ने का प्रयास किया लेकिन उनसे भी खतरनाक ब्रिटिशों ने भारत का सारा मूल इतिहास ही गायब कर दिया, जो गायब किया, किया ही, इसके साथ ही फर्जी इतिहास भी प्लांट किया, 
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हद तो तब हो गयी जब ब्रिटिशों ने लालकिला, ताजमहल, क़ुतुब मीनार, अढ़ाई दिन का झोपड़ा, भारतीयो के किलों को मुल्लों के नाम से Renew कर दिया, रिसर्च का विषय है, जो अरबी व तैमूरवंशी मुल्ले मुगल अपने यहां ढंग की मस्जिद व झोपड़ा तक ना बना सके भारत आके उनकी कला जाग गयी, 
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इन कलाओं को एक जबरदस्ती का नाम भी दिया गया ‘इस्लामिक स्थापत्य कला/इस्लामिक शैली’ ये कला कहाँ से आई ? इसका जन्म कहाँ हुआ ? इस स्थापत्य कला या शैली पर आधारित कितनी बिल्डिंगे हैं अरब में ? वास्तविकता में इस्लामिक स्थापत्य कला या इस्लामिक शैली जैसा कोई शब्द नही है मुस्लिमो की डिक्शनरी में, ये सब एक पर्दे हैं जो झूठ को ढकने के लिए इतना ज्यादा चढ़ाये गए कि सत्य दब गया, 
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जिस किसी को मुल्ले मुगलों द्वारा बनवाई गयी बिल्डिंगों पर रिसर्च करना है कर सकता है और खुद असलियत देख सकता है 
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इसी तरह अंग्रेजों का भारत उपनिवेश रहा ना कि गुलाम, भारत ने कभी अंग्रेजो के सामने हथियार नहीं डाले, जितना हो सकता था भारतीयों ने अंग्रेजों से संघर्ष किया और जगह जगह उन्हें कुत्ते की तरह मारा था, इसी तरह अंग्रेजो के समय भारतीय राजाओं ने अंग्रेजो से सन्धि समझौते कर राज चलाया, “भारत में कुछ जगह अंग्रेजो के कानून चले ना कि पूरे भारत में,”
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कहने का निष्कर्ष यह है कि, मुस्लिमों की 800 साल वाली गुलामी, अंग्रेजो की 250 साल गुलामी सिवाय एक प्लांटेड बकवास से ज्यादा कुछ नहीं है, इस गुलामी वाले प्लांटेड अध्याय को प्लांट करने के लिए जितना ज्यादा ब्रिटिश दोषी हैं उतना ही ज्यादा इसे फैलाने के किये संघी और वामपंथी
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इस बकवास ने हमारा भारी नुक्सान किया, इसे भारतीयों को हीन भावना से ग्रसित बनाने के लिए प्लांट किया गया था और संघियों वामपंथियो ने ब्रिटिशों के इस काम को आगे बढ़ाया, 
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आजकल किताबो में पढ़ाया जाता है और 15 अगस्त 26 जनवरी को हमे याद दिलाया जाता है कि, भारत पहले गुलाम था और अब आजाद हो गया है, लेकिन वास्तव में भारत गुलाम बना तो 1947 और 1950 में जब भारत विदेशी शक्तियों और बैंकर्स माफियाओं का पूर्णतया गुलाम बन गया, 
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वर्तमान में हर भारतीय गुलाम है, विदेशियों द्वारा थोपे गए करेंसी व्यवस्था, लोकतंत्र, संविधान और कानून का, 
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खुद ही सोचो क्या शैतान ब्रिटिश भारत के मित्र थे जो वो भारत के भले के लिए हमें लोकतंत्र देंगे, चुनावी व्यवस्था देंगे, संविधान देंगे, कानून देंगे, कागज के नोटों रुपयों वाली करेंसी व्यवस्था देंगे ?

4 thoughts on “भारत के हजारों वर्षों की गुलामी का सच;

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