October 3, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

भू-जल का दोहन कर सुखा रहे धरती की कोख

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एक तरफ यह कहा जा रहा है कि अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो वह पानी के लिए होगा। इसका मतलब यह है कि विश्व में पेयजल संकट गहराने वाला है। वहीं दूसरी तरफ बेशकीमती भूजल का बेतरतीब ढंग से दोहन किया जा रहा है। सड़क और मकान निर्माण से लेकर छिड़काव तक के लिए पानी का दोहन कर टैंकरों से बेचा जा रहा है। प्रशासन इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है, लिहाजा पेयजल संकट गहराता जा रहा है।

पानी बेचना बना व्यवसाय-

दरअसल पानी बेचने का कारोबार इतना चोखा है कि यह अब बड़ा व्यवसाय बन गया है। शहर के लेकर ग्रामीण इलाकों में अवैध आरओ प्लांट लगे हैं, जो दिन रात पानी का दोहन कर रहे हैं। पीने वाला एक डिब्बा पानी 20 रुपये बिक रहा है। वहीं भवन या सड़क निर्माण प्रयुक्त होने वाले एक टैंकर पानी की कीमत पांच सौ रुपये है। इसकी कीमत कुछ भी नहीं है। पानी बेचने के गोरखधंधे में बड़े लोगों के शामिल होने से यह बड़ा व्यवसाय का रूप ले चुका।

किसानों पर सीधे पड़ रहा असर

भूगर्भ जल स्त्रोतों के अत्यधिक दोहन का असर भी किसानों पर सीधे देखने को मिल रहा है। देश में धान और गेहूं में 81 प्रतिशत का योगदान देने वाले राज्य पंजाब में पिछले कुछ समय में पैदावार घट रही है। कारण, धान जैसी फसल के लिए पानी की अत्यधिक जरूरत। ऐसे में किसान कम पानी लगने वाली फसलें करने को मजबूर हो रहे हैं।

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यूपी, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र और हरिणाया समेत देश के कई राज्यों में खूब खेती होती है। साल में कई फसलें ली जाती हैं, ये अच्छी बात है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है, इन राज्यों में सिंचाई के लिए ज्यादातर जो पानी इस्तेमाल किया जाता है, वो जमीन से निकाला जाता है, यानि जो पानी हम पीते हैं, वहीं सिंचाई करते है।

देश में भूमिगत जल स्त्रोतों से 70 प्रतिशत पानी सिंचाई के लिए किसान उपयोग में लाते हैं। ऐसे में जाने-अनजाने हम तेजी से भूगर्भ जल स्त्रोतों का दोहन कर रहे हैं। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो वो समय अब ज्यादा दूर नहीं है, जब देश के ज्यादातर हिस्सों में भूगर्भ जल पर निर्भर रहने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ चुकी होंगी।

देश में सबसे ज्यादा धान और गेहूं की पैदावार करने वाला राज्य पंजाब की बात करें तो इस राज्य के दो तिहाई कृषि क्षेत्र में भूगर्भ जल स्तर कम होने की समस्या हर साल बढ़ रही है। जबकि एक तिहाई क्षेत्र ऐसा है, जहां पर जल स्तर तो ठीक है, मगर सिंचाई के लिए पानी उपयुक्त नहीं है।

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भूजल संकट की ओर विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट तो और खतरनाक तस्वीर पेश कर रही है। भूजल संकट को लेकर इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अंधाधुंध जल दोहन और जलवायु परिवर्तन का अगर भारत में ऐसा ही हाल रहता है तो देश में 60 फीसदी से ज्यादा ब्लॉक अगले एक दशक में सूखे की चपेट में होंगे। रिपोर्ट में कहा गया कि किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए तो दूर, पीने के पानी के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।

जल दिवश विशेष- ये पानी दोबारा नहीं मिलेगा..
इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जैसे-जैसे हमारे देश में कृषि क्षेत्र भूमि में बढ़ोतरी हुई है, वैसे-वैसे भगर्भ जल का दोहन उतनी ही तेजी से नीचे गिरा है। देश में जहां 2.26 करोड़ हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र का क्षेत्रफल था, वह अब 6.8 करोड़ हेक्टेयर हो चुका है। ऐसी स्थिति में जल का इस्तेमाल भी सिंचाई के लिए तेजी से बढ़ा है और भूगर्भ जल लगातार घट रहा है। यही कारण है कि एक तरफ जहां तालाब, कुएं सूख रहे हैं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में नलकूप खराब पड़ चुके हैं।

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें तो मेरठ, आगरा, लखनऊ, अलीगढ़, इलाहाबाद, लखनऊ, अमेठी, कानपुर जैसे जिलों में भूगर्भ जल संकट की स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। मेरठ जैसे जिले में तो किसान कृषि क्षेत्र की 85 प्रतिशत भूमि में भूगर्भ जल का उपयोग कर रहे हैं।

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केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़, इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, अमेठी जैसे जिलों में जितना जल रिचार्ज नहीं हो रहा है, उससे कहीं ज्यादा लोग भूजल का उपयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ में 82.13, इलाहाबाद में 56.89, लखनऊ में 68.58, कानपुर में 84.53 और अमेठी में 68.47 प्रतिशत भूजल दोहन हर साल किया जा रहा है।

यूपी के ही रायबरेली के सरैनी ब्लॉक की 81 ग्राम पंचायतें भयंकर जल संकट से जूझ रही हैं। ऐसे में इस क्षेत्र से लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र को डार्क जोन घोषित किया जा चुका है।

जैसे की हम सब जानते हैं की जल हमें और अन्य सभी जीव जंतुओं को ही जीवन देता है। पानी के बिना इस पृथ्वी में जीना असंभव है। आज के दिन तक पृथ्वी ही एक मात्र ग्रह है जहाँ पानी है। हमें कभी भी पानी के महत्व को भूलना नहीं चाहिये और इसकी बचत करने के लिए जितना हो सके करना चाहिए।

पृथ्वी आ लगभग ज्यादातर हिस्सा पानी है परन्तु उसमें से पीने का पानी बहुत कम है। हमें उसी पीने के पानी का संरक्षण करना होगा नहीं तो पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व मिट जाएगा। पानी के बचत को एक कार्य के जैसे ना मान कर कर्त्तव्य के रूप में करना होगा।

हमें जल संरक्षण क्यों करना चाहिये Why should we Save Water in Hindi ?

इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले हमें हमारे जीवन में पानी / जल के महत्व को सबसे पहले समझना होगा। मनुष्य ऑक्सीजन, पानी और खाना के बिना नहीं जी सकता है। इन 3 मूल्यवान चीजों में पानी का महत्व सबसे अधिक है।

प्रश्न तो यह होना चाहिए की पृथ्वी में पीने का पानी कितना है और हमें इसका संरक्षण कैसे करना होगा? आंकड़ों के अनुसार पृथ्वी में 71 प्रतिशत पानी है परन्तु उसमें से मात्र 1 प्रतिशत जल ही पीने लायक है।

अगर हम विश्व की पूरी जनसँख्या के साथ पीने के पानी का अनुपात निकालें तो पता चलता है 1 गैलन पानी का उपयोग प्रतिदिन 1 अरब लोग कर रहे हैं। यह भी अनुमान लगाया जा चूका है कि 3 अरब से भी ज्यादा लोग 2025 तक पानी की कमी से पीड़ित होंगे।

हाला की लोगों को थोडा-थोडा पानी का महत्व समझने आने लगा है परन्तु अभी मनुष्य ने पूरी तरीके से पानी को संरक्षित रखना नहीं सिखा है। जल का संरक्षण आज से ही लोगों को करना शुरू करना होगा क्योंकि ऐसे ही पानी बर्बाद होता रहा तो वो दिन दूर नहीं है जब दुनिया में पानी की समस्या सर पर होगी।

कुछ वर्षों पहले पानी को कोई नहीं बेचता था पर आज अगर आप देखेंगे तो कई कंपनियों ने इसको बेचना शुरू कर दिया। क्योंकि सभी जगह स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है इसलिए पानी लोग खरीद कर पीते हैं। आज एक पानी के 1 लीटर बोतल का दाम 20-25 रुपए हो चूका है। अगर जल संरक्षण और जल को स्वच्छ नहीं रखा जायेगा तो वो दिन दूर नहीं जब 1 लीटर बोतल को 100-200 रुपए दे कर खरीदना पड़े।

आखिर जल का स्वच्छ होना क्यों आवश्यक है और यह मूल्यवान क्यों है?

कई लाख लोग प्रतिवर्ष जल के दूषित होने के कारण बिमारियों से मर रहे हैं।
अखबार के एक पेज को बनाने में 13 लीटर पानी बर्बाद होता है तो सोचिये पुरे विश्व में कितना होता होगा।
हर 15 सेकंड में एक बच्चा जलजनित रोग से मर रहा है।
जल संरक्षण कैसे करें-

पानी की बचत / जल संरक्षण के लिए कुछ ज़बरदस्त टिप्स या आईडिया हैं –

सबसे पहले तो हम सभी को मिल कर कसम खाना होगा की आज से हम पानी को बर्बाद नहीं करेंगे और जितना हो सके उतना जल संरक्षण करेंगे।
अगर पुरे पृथ्वी में सभी लोग थोडा थोडा पानी भी बचायेंगे इसे फालतू का नहीं बहायेंगे तो सोचिये कितना पानी हम एक दिन में संरक्षित कर सकते हैं।
हम चाहें तो बारिश के पानी को शौच, कपडे धोने, बगीचे में पानी देने, और नहाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
हमें स्वच्छ पीने के पानी को शौचालय और नहाने में बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने के कारन धीरे-धीरे जल स्थर कम होते जा रहा है।
हम बारिश के पानी का संग्रहण भी कर सकते है जिसको हम पीने और खाने के अलावा सभी प्रकार के काम में लगा सकते हैं।
अगर हम नहाते समय शावर की जगह नहाने के लिए बाल्टी का उपयोग करें तो हम 100-200 लीटर पानी प्रतिदिन बचा सकते हैं।
नल के इस्तेमाल के बाद उसे टाइट से बंद करें क्योंकि पानी गिरते रहने से बहुत बर्बाद हो जाता है और हमें पता भी नहीं चलता।
हमें अपने गाँव, मोहल्ले और शहर में जल संरक्षण पर नारों के साथ लोगों को पानी को बचाने के फायदों के बारे में बताना चाहिए।
ज्यादातर पेड़-पौधे बारिश के महीने में लगायें ताकि पौधों को प्राकृतिक रूप से पानी मिल सके।
हमें हाँथ, फल सब्जियों को दोने के लिए मग में पानी लेना चाहिए क्योंकि नल से दोने पर बहुत पानी बर्बाद हो जाता है।

बूंद-बूंद नहीं बरतेंगे, तो बूँद-बूँद को तरसेंगे।
जल है तो कल है, यह हमारे लिए कुदरत की देन है।
हाथ से हाथ मिलाना है पानी को बचाना है।
जल है जीवन का अनमोल रतन, इसे बचाने का करो जतन।
जल ही जीवन है।
जल हमारे लिए सोना है, इसे कभी नहीं खोना है।
बारिश के पानी को बचाना है, घरेलु कामों में लगाना है।
जल संरक्षण की लायें सोच, नहीं तो पानी के लिए तरसेंगे रोज़।
पानी को माने अनमोल, क्योंकि यही है जीवन का असली मोल।
लाल पीला हरा नीला, इस होली खेलेंगे रंग ना हो कर गीला।
आओ सब मिल कर कसम खाएं, बूँद-बूँद पानी को बचाएं।

चलो हम हम सब मिल कर संकल्प लें, पानी को नीचे ना बहने दें।
नल से टिप-टिप पानी गिरने ना दें, पानी को बर्बाद होने ना दें।
अगर करना है हमारे भविष्य को सुरक्षित, करना होगा बूँद-बूंग पानी को संरक्षित।
स्वस्थ जीवन की अगर कर रहे हो खोज, बचाओ पानी रोज़।
ना करो पानी को हर समय नष्ट, सहना पड़ेगा जीवन भर इसका कष्ट।
पानी बिना जीवन नहीं, इसका संरक्षण हमारे लिए बोझ नहीं।
दूषित ना करो जल को, नष्ट ना करों आने वाले कल को।
जल को बचाने के लिए दृढ संकल्प लेना है – पानी बचाओ जीवन बचाओ का नारा फैलाना है।
जल संरक्षण को हमें आज ही अपनाना है, अपने आने वाले कल को पानी की कमी से बचाना है।
आशा करते हैं आपको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा होगा। हमारे पोस्ट और जल संरक्षण के नारे को आगे बढाने के लिए इस पोस्ट को अपने सोशल नेटवर्क वेबसाइट पर शेयर करना ना भूलें।

 

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