June 29, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

मछली जल की रानी है, कविता किसने और क्यों लिखी?

 

सभी टीवी न्यूज चैनलों पर एक साथ एक्सक्लूजिव न्यूज आ रही है। चैनल ‘ए’ पर है न्यूज रीडर मितुल और संवाददाता ऋषि। चैनल ‘बी’ पर न्यूज रीडर अमित और रिपोर्टर श्रेया। चैनल ‘सी’ पर न्यूज एंकर शिबांग के साथ हैं सलमा और रिपोर्टर सिया। सभी चैनल समाचार देते हैं।

‘सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत क्या धाँधली हो रही है, आइए यह दिखाने के लिए हम आपको लिए चलते हैं एक सरकारी स्कूल में जहाँ हम बताएँगे कि वहाँ क्या पढ़ाया जाता है और वहाँ के विद्यार्थियों के साथ-साथ अध्यापकों का स्तर क्या है। आप ही देखिए हमारी खास रिपोर्ट।’

सभी चैनल गंदगी और जानवरों से भरा टूटा-फूटा, मैले-कुचैले कपड़े पहने बच्चों से भरा एक सरकारी स्कूल दिखाते हैं। चैनल ‘ए’ का रिपोर्टर ऋषि सामने आता है और कहता है, ‘सरकार एक ओर तो सर्वशिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपए फूँक रही है तो दूसरी तरफ शिक्षा का क्या स्तर है यह जानने की जरूरत नहीं समझती। आइए खुद ही देख लीजिए मेरे साथ।’ कैमरा एक जर्जर कमरे में ले जाता है जहाँ बच्चे कविता पढ़ रहे हैं ‘मछली जल की है रानी, जीवन उसका है पानी, हाथ लगाओ डर जाती है, बाहर निकालो मर जाती है।’

ऋषि एक लड़के से पूछता है। ‘क्या आप बता सकते हैं कि यह कविता किसने लिखी है?’ लड़का चुप रहता है। वह एक लड़की से यही सवाल पूछता है। वह भी जवाब नहीं दे पाती। मितुल पूछती है, ‘यह कैसी शिक्षा है जिसमें पढ़ने वालों को पता ही नहीं कि जो कविता वे पढ़ रहे हैं उसके रचयिता कौन है? जरा उनके टीचर से पूछिए।’

ऋषि अध्यापक से वही सवाल करता है। जवाब मिलता है-‘देखिए हमारा काम पढ़ाना है, किसने लिखी, कब लिखी, क्यों लिखी, यह जानना-बताना हमारी ड्यूटी में नहीं आता। जब यह कविता लिखी गई होगी, तब हम पशु गणना में लगे होंगे। जब पाठ्यक्रम में मंजूर हुई होगी, तब हम जनगणना में जुटे होंगे। जब यह छपी होगी, तब हम चुनाव में ड्यूटी दे रहे होंगे।’

मितुल हँसती है। फिर ऋषि से पूछती है, इनसे कहिए कि जब अगली बार वे जनगणना में पशु गणना या गटर गणना करने जाएँ तो कवि को ढूँढ निकालें। चैनल की ओर से ऐसे अध्यापक को इनाम दिया जाएगा।’ फिर कैमरे की ओर देखकर दर्शकों से कहती हैं, “यदि आपको इस कविता के रचयिता का नाम मालूम हो तो अपने मोबाइल के राइट बॉक्स में जाकर कविता लिख कर स्पेस दें फिर कवि का नाम लिखकर हमें तुरंत एसएमएस करें।

चैनल ‘बी’ से अमित श्रेया से पूछता है, ‘इस कविता के रचयिता ने कॉपीराइट का मामला क्यों दर्ज नहीं करवाया? श्रेया जवाब देती है- ‘पूछकर बताती हूँ। तब तक आप गूगल पर सर्च करके उसके नाम का पता लगा लें। वैसे इस बात की उम्मीद कम ही है कि उसका पता चल जाएगा। मगर पाठ्यपुस्तक वाले बिना रॉयल्टी दिए यह कविता वापर रहे हैं। हो सकता है कि उन्होंने किसी को फर्जी कवि बताकर सरकार से रॉयल्टी जेब में रख ली हो। रॉयल्टी का सवाल तो सबसे पहली बार हमारा चैनल उठा रहा है।’

चैनल ‘सी’ पर शिबांग सिया से पूछता है, ‘सिया, क्या आप बता सकती हैं कि मछली को जल की रानी क्यों कहा गया है, जबकि पानी में तो सबसे ताकतवर मगर होता है? इसी पर तो कहावत बनी है कि पानी में रहकर मगर से बैर। जरा इनसे पूछकर बताइए कि कौन-सी मछली हैं पर जिसे कवि ने जल की रानी कहा है?’ सिया मुस्करा कर कहती है, ‘शिबांग, यह कोई खास प्रजाति की मछली होगी जिसे कवि ने जल की रानी कहा है। इसके लिए हमें प्राणीशास्त्र के किसी प्रोफेसर से बात करनी होगी।

पर्दे पर तीसरे व्यक्ति का प्रवेश। शिबांग उसका स्वागत करता है और पूछता है कि मछली को जल की रानी क्यों लिखा गया है। प्रोफेसर जवाब देता है कि समुद्र में कुछ ऐसी भी मछलियाँ पाई जाती हैं जिनसे मगर भी टक्कर लेना टालते हैं। जैसे व्हेल, जिसका शिकार जोरों पर है। दूसरी खूँखार मछली है शार्क जिस पर अँगरेजी में फिल्में भी बनी हैं और वह फिल्मों के नाम गिनाने लग जाता है।

‘मेरे ख्याल से कवि ने उसी मछली को ध्यान में रखकर लिखा होगा।’ शिबांग पूछता है कि क्या इस मछली का आंध्रप्रदेश के मछलीपट्टम जगह से कोई संबंध है? प्रोफेसर बताता है कि बिना उस मछली को देखे कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है। शिबांग- ‘मान लिया जाए कि यह मछली मछलीपट्टम की ही है तो एक सवाल खड़ा होता है कि तमिल या तेलुगु या गुजराती या जो भी उस प्रदेश की भाषा हो, वहाँ का कवि हिन्दी में क्यों कविता लिखेगा? और यह मछली शब्द कैसे बना है?’

सलमा-‘कहीं ये तो नहीं कि कोई जलचर प्राणी किसी के द्वारा छली गई हो, इसलिए उसका नाम मछली पड़ गया हो।’ शिबांग-‘या फिर वह किसी चीज के लिए मचल गई हो। इसके लिए हमें किसी भाषाशास्त्री को बुलाना होगा। जब तक ये हमारे स्टूडियो में आते हैं, तब तक के लिए हम लेते हैं एक छोटा-सा ब्रेक। दोनों ही हँसते हैं।

चैनल ‘बी’ पर भी वही कविता और वही सवाल। अमित श्रेया से पूछता है, ‘क्या शाकाहारियों को इस कविता पर कोई आपत्ति नहीं है?’ श्रेया-‘अभी तो इस बारे में कोई समाचार नहीं है। फिर भी मैं गाँव जाकर पूछती हूँ।’

अमित-‘जब तक हमारी रिपोर्टर जनता से इस बारे में जानकारी लेकर आती है, तब तक हम लेते हैं एक ब्रेक, लेकिन उससे पहले आप हमें अपनी राय दें कि पाठ्यपुस्तक में मुर्गा या बकरा या मछली जैसे मांसाहार का जिक्र होना सही है या नहीं? इसके लिए अपने मोबाइल के राइट बॉक्स में जाकर फिश लिखकर स्पेस दें और हाँ के लिए वाय और ना के लिए एन टाइप कर हमें भेज दें।’

चैनल ‘ए’ पर मितुल ऋषि से पूछती है-‘सरकार ने राजा-रानी शब्द से परहेज करने को कहा है और स्कूलों में रानी पढ़ाया जा रहा है। क्या यह प्रजातंत्र का अपमान नहीं है? सोनियाजी को क्या इसकी खबर है?’ ऋषि-‘राजा-रानी का विरोध तो कांग्रेस ने किया है। यहाँ की सरकार तो विरोधी दल की है। अगर कांग्रेस की होती तो शिक्षा मंत्री को जवाब देना पड़ता, हो सकता है पार्टी से भी निलंबित कर दिया जाता। वैसे भी अंतिम निर्णय तो 10 जनपथ से ही लिया जाएगा’

 

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अच्छा ये बताइए कि यह मछली खारे पानी की है या मीठे पानी की? लेकिन जाने से पहले हम दर्शकों की राय जानना चाहेंगे कि प्रजातंत्र में राजा और रानी शब्द का इस्तेमाल करना उचित है या नहीं? जवाब के लिए राइट बॉक्स में जाकर रानी टाइप कीजिए और स्पेस देकर हाँ के लिए वाय और ना के लिए एन लिखकर हमें एसएमएस कर दें।

हाँ ऋषि, आगे बढ़‍िए। ऋषि-‘देखिए, जब तक मैं मछली को पानी में तैरती नहीं देख लूँ, तब तक यह कहना मुश्किल है कि वह मीठे पानी की है या खारे पानी की, लेकिन लगता है कि वह खारे पानी की नहीं है क्योंकि इस गाँव में समुद्र तो है नहीं। एक नाला है जिसे ये लोग नदी कहते हैं, जो यहाँ से पाँच किलोमीटर दूर है। वहाँ का पानी प्रदूषित है, इसलिए कहा जा सकता है कि मछली गंदे पानी की है।’

मितुल- तो आजादी के इतने साल बाद .. यानी कितने साल बाद ये हाल है कि गाँवों में पीने को पानी नहीं है। फिर शिक्षा की हालत तो इससे भी बदतर होगी।’ ऋषि-‘ हाँ बहुत बुरी है। यहाँ के बच्चे यह तक नहीं जानते कि अमेरिका के राष्ट्रपति कौन है और आईपीएल क्या बला है?’

मितुल- हाँ, इससे तो हम ही अच्छे जो इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़े। कम से कम ‘मछली जल की रानी’ पर बहस तो कर सकते हैं।’ ऋषि- बिलकुल सही कहा। यह तो हमारी पढ़ाई ही है जो हम मछली पर इतना डिस्कस कर रहे हैं। वरना गाँव वालों का क्या? पकड़ी, पकाई और खा गए।’

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