June 24, 2022

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सच के साथ

मदरसा क्या है व मदरसों में दी जानेवाली शिक्षा की जानकारी…

मदरसों को आमतौर पर एक धार्मिक विद्यालय की नजर से देखा जाता है. जहां पर मुस्लिम धर्म से सम्बंधित शिक्षा दी जाती है. मदरसा शब्द का मतलब है “एक ऐसी जगह जहाँ पर शिक्षा दी जाती है’ यहां पर सभी उम्र के छात्र एक साथ पड़ते हैं. अधिकतर इन स्कूलों में गरीब मुस्लिम बच्चों को अध्ययन करते हुए पाया जाता है. इन विद्यालयों में वहीं लोग अपने बच्चों को पढ़ाते हैं, जो या तो बहुत गरीब होते हैं या फिर अपने लड़के को इस्लाम का पूरा ज्ञान देना चाहते हैं.

मदरसों में दी जानेवाली शिक्षा (Madrasa School Education System )

जैसे कि ऊपर हमने आपको बताया है कि ये इस्लामिक विद्यालय हैं एवं इनके विषयों में उर्दू के साथ-साथ सभी इस्लामिक धर्म से सम्बंधित पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं. आमतौर पर मदरसों में दो तरह के कोर्स पढ़ाये जाते हैं. पहला हिफ़्ज़ जिसको करने के बाद हाफिज की उपाधि मिलती है और दूसरा अलीम जिसको करने के बाद इन लोगों को इस्लाम धर्म का विद्वान माना जाता है. मदरसों में पढ़ाये जाने वाले विषयों में ‘तहसिर’, ‘हदीस’, ‘शरिआ’ और ‘मंताक’ विषय शामिल हैं. ‘तहसिर’ में कुरान के बारे में लिखा हुआ है. ‘हदीस’ में मोहम्मद साहब के पवित्र विचार एवं उनके द्वारा दी गयी सीख, कर्म आदि का वर्णन है. उसके बाद ‘शरिआ’ में कानून का उल्लेख है, जबकि ‘मंताक’ में मुस्लिम धर्म का इतिहास पढ़ाया जाता है. हालांकि विरोध के चलते कई मदरसों में अब गणित और विज्ञान का ज्ञान भी दिया जा रहा है.

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मदरसों का पाठ्यक्रम (Madrasa curriculum in India)

भारत में चार तरह के मुस्लिम स्कूल मौजूद है जिनमें मकतब, दारुल कुरान, मदरसा एवं जामिआ शामिल है. और इन सभी विद्यालयों या संस्थानों में अध्यात्म की शिक्षा दी जाती है, जिसका पाठ्यक्रम इस प्रकार है, लेखन विज्ञान, मौखिक विज्ञान, इस्लामी दर्शन तर्क एवं अध्यात्म विज्ञान.

भारत में मदरसों की जानकारी (Madrasa School in India)

संचार समिति एवं जस्टिस संचार की रिपोर्ट के अनुसार भारत में मदरसों की बात करें, तो यहां के मुस्लिम मदरसों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए अपनी रुचि नहीं दिखाते हैं. भारत में केवल 4 प्रतिशत बच्चे ही मदरसों में जाते हैं, जिनमें अधिकतर गरीब परिवारों के होते हैं या फिर किसी धार्मिक इस्लामिक परिवार से. वहीं मदरसों में इतनी कम संख्या होने का दूसरा कारण यह है कि यहां आधुनिक तकनीकी के बारे में ना सिखाकर सिर्फ धर्म की शिक्षा दी जाती है. आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 100000 के आस पास मदरसे मौजूद हैं, लेकिन लगभग 45 मदरसे ही ऐसे हैं जहां की परिस्थिति अच्छी है. हालांकि कुछ लोगों ने इस बात को मानने से इंकार किया है, इन लोगों का मानना है कि जो लोग मस्जिद में जाते हैं वो मदरसों में भी जाते हैं. इन लोगों के अनुसार भारत में मदरसों में जाने वालो की संख्या लगभग 50 प्रतिशत है. वहीं संचार समिति की दी गयी रिपोर्ट के आकड़े एकदम अलग हैं.

कौन करता है मदरसों में निवेश (Madrasa funding)

मदरसों को दो तरह के लोगों द्वारा पैसे दिया जाते हैं. जहां कुछ लोगों का कहना है कि मदरसों में निवेश सऊदी अरबिया और इसके कुछ सामाजिक संस्थानों द्वारा दिया जाता है. वहीं अन्य लोगों का ये मानना है कि इन मदरसों की फंडिंग जकात और दान में मिले पैसों से की जाती है. हर मुस्लिम व्यक्ति अपनी आय का कुछ प्रतिशत हिस्सा जकात या दान करता है और इन पैसों का हिस्सा मदरसों को भी दिया जाता है.

इतना ही नहीं दुनिया में कई मदरसों में आतंकवादी संगठन द्वारा भी निवेश किया जाता है. हालांकि भारत के मदरसों की स्थिति पाकिस्तान के मदरसों की स्थिति से बेहतर है. ऐसा कहा जाता है कि पाकिस्तान के मदरसों में शिक्षा लेने वाले बच्चे कट्टर मुस्लिम नेता, मुस्लिम धर्म प्रचारक या फिर आतंकवादी बनकर निकलते हैं.

कौन–कौन सी उपाधियां दी जाती है (Madrasa degrees)

मदरसों में शिक्षा पूरी करने के बाद शिक्षा के अनुसार ही उपाधि देने की प्रणाली है, उदाहरण के तौर पर “आलिम” को इस्लाम का जानकार माना जाता है. हाफिज की उपाधि उसको दी जाती है जिसे पूरी कुरान अच्छे से याद होती है, मुफ़्ती उस व्यक्ति को बोला जाता है जो कि शरीआ कानून का विशेषज्ञ होता है. इसी प्रकार हदीस लेखन में विद्वान व्यक्ति को मुहादित कहा जाता है. इसी तरह से इस्लाम के ज्ञान के अनुसार पद एवं उपाधियां दी जाती हैं.

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मकतब और मदरसों में अंतर (Difference between Maktab and Madrasa)

मकतब और मदरसों में कोई अंतर नहीं है दोनों का लक्ष्य एक ही है इस्लामिक शिक्षा को पढ़ाना. मकतब शब्द का इस्तेमाल पहले अरब में स्थित प्राथमिक विद्यालयों के लिए किया जाता था. जबकि अफगानिस्तान में प्राथमिक और माध्यमिक दोनों तरह के विद्यालयों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. जबकि मदरसा शब्द का इस्तेमाल सभी तरह के स्कूलों, विश्वविद्यलयों, मेडिकल कॉलेजों के लिए भी होता है. मतलब मदरसों में उच्च शिक्षा देने का प्रावधान भी है जबकि मकतब प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान देते है. वहीं मिडिवल इस्लामिक वर्ल्ड इस संसार का पहला मकतब था.

मदरसों पर भारत सरकार के कदम (Madrasa School education development program)

देश के प्रधानमंत्री ने मदरसों को और भी उन्नत बनाने के लिए एवं मुस्लिम वोटर को लुभाने के लिए एक नई योजना लॉन्च की है. जिसका नाम ‘नई मंजिल ‘है. एक भाषण देते हुए प्रधानमंत्री जी ने कहा था, कि ‘मैं मदरसों में शिक्षा लेने वाले छात्रों के एक हाथ में कुरान जबकि दूसरे हाथ में लैपटॉप देखना चाहता हूं’. प्रधानमंत्री का कहना है कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा भी देना शुरू होना चाहिए, जिससे हमारे मुस्लिम भाइयों को रोजगार प्राप्त हो सकें.
अगर तथ्यों को ध्यान में रखकर बात करें, तो भारत में मुस्लिम आबादी का एक अच्छा हिस्सा है, इसके चलते देश की तरक्की तभी हो सकती है जब इनको भी साथ लेकर आगे बढ़ा जाए. 2011 के आंकड़ों के अनुसार7 प्रतिशत मुस्लिम लोग अनपढ़ थे, जबकि इनकी जनसंख्या भारत की कुल आबादी की लगभग 17 प्रतिशत है. जहां सिर्फ 5 प्रतिशत मुस्लिम ही उच्च शिक्षा में खुद को शामिल कर पाते हैं.
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने इसको एक बोर्ड का दर्जा दे रखा है, सबसे ज्यादा मुस्लिम उत्तर प्रदेश में ही पाए जाते हैं. अभी हाल के मुख्यमंत्री योगी जी ने मदरसों में माध्यमिक स्तर पर गणित, विज्ञान एवं कंप्यूटर की शिक्षा देना अनिवार्य कर दिया है. ऐसा करने के लिए बिहार,उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों ने भी कदम बढ़ाया है.

मोदी जी ने गुजरात में 2002 के समय से ही मुस्लिमों की शिक्षा में सुधार पर काम करना शुरू कर दिया था. जिसके चलते 200 मुस्लिम शिक्षा केंद्रों की संख्या बढ़कर 800 हो गई है. इतना ही नहीं यहाँ के मुस्लिमों की साक्षरता लगभग 80 प्रतिशत का आंकड़ा पा चुकी है, जो कि काफी सराहनीय है.
मदरसा से सम्बंधित विवाद (Madrasa controversy)

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाने के वीडियो की मांग (Independence Day madarsa controversy)

उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2017 में मदरसों को एक आदेश दिया गया था. आदेश में कहा गया था कि मदरसों को स्वतंत्रता दिवस के दिन वहां पर होने वाले कार्यक्रम का वीडियो सरकार को देना होगा. माध्यमिक शिक्षा परिषद के कुलसचिव द्वारा ये आदेश जारी किया गया था.

इसके विरोध में बहुत से लोगों ने कहा था कि “आप भारत के मुस्लिमों से उनकी देशभक्ति का सबूत मांग रहे हैं, क्या अब हम मुस्लिमों की देशभक्ति एक वीडियो दिखाकर साबित करनी पड़ेगी”. वहीं जवाब में सरकार ने कहा था कि ऐसा सिर्फ मदरसों में होने वाले कार्यक्रमों के सुधार के लिए एवं वहां की संस्कृति की गरिमा को देश के सामने प्रस्तुत करने के लिए किया जा रहा है.

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वसीम रिज़वी का विवादित बयान (Wasim Rizvi News)

शिया मुस्लिम बोर्ड के चेयरमेन वसीम रिज़वी ने भी मदरसों में दी जानेवाली शिक्षा पर सवाल किए थे. उन्होंने कहा था कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों में से अभी तक कोई भी छात्र इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बना है. यहां से पास होने बाले बच्चे या मौलवी बन जाते है या फिर मेहनत मजदूरी करते हैं. उनका कहना है मदरसों की शिक्षा में आधुनिकता आनी चाहिए. यहां तक की इन्होंने प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखकर बताया, कि ऐसे मदरसों पर कार्यवाही की जाय जो आतंकवाद और कट्टरता फ़ैलाने का काम कर रहे हैं. गांव में बच्चे की नींव मजबूत करने के लिए नई तकनीकी की शिक्षा देनी चाहिए.
जबकि इनके विरोधियों का कहना है कि वसीम रिज़वी का सीधा सम्बन्ध आरएसएस से है. कुछ लोगों का कहना है कि वसीम एक मदरसे का उदाहरण देकर सभी को गलत नहीं ठहरा सकते हैं. जब रिज़वी साहब मदरसे में गए ही नहीं तो उनको यहां दी जाने वाली तालीम के बारे में क्या पता होगा.
इस्लामी विद्वान, रिज़वान अहमद का कहना है कि कुछ मदरसों में देश विरोधी तालीम दी जाती है, जो कि हमारे देश के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. देश की सरकार को इस मामले पर जांच करनी चाहिए एवं सभी मदरसों पर नजर रखनी चाहिए जिससे यहां पढ़ रहे बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सके.

 
मदरसों के बारे में तथ्य (Madrasa facts)

मदरसों पर आतंकवाद पैदा करने के आरोप पहले भी लग चुके है लेकिन केंद्र सरकार ने हमेशा इस तरह के आरोपों को मना किया है. क्योंकि हमेशा सरकार को इन बातों को लेकर पुख्ता सबूत नहीं मिल सकें हैं.
यहां सिर्फ इस्लाम की धार्मिक शिक्षा पर ही जोर दिया जाता है. जिसके चलते यहां पर पढ़ाई करने वाले छात्रों की तरक्की नहीं हो पाती है. वहीं इनकी फंडिंग मुस्लिम संस्थाओं के जरिए आती है.
इस समय की भारत सरकार ने बोल दिया है कि वो किसी भी मदरसे पर ताला नहीं लगाएगी. बल्कि इन मदरसों को आधुनिक शिक्षा देने का बंदोबस्त करेगी, जिससे मदरसों में पढ़ रहे बच्चों को इस्लाम के साथ-साथ तकनीकी में भी ज्ञान हो सके.
कुछ मदरसों में गैर मुस्लिमों से नफरत करने की शिक्षा दी जाती है, इसके कई मामले सामने भी आ चुके हैं. लेकिन वहीं काफी मदरसों में ऐसा नहीं सिखाया जाता है. मतलब कुछ ही मदरसों की वजह से सभी पर ये आरोप लग रहा है.
मदरसों में सरकार द्वारा दखल दिए जाने पर मुस्लिम नेताओं ने इसका विरोध किया और मुस्लिम वोटों के डर से सरकार ने हमेशा अपने कदम पीछे खींच लिए. जिससे मदरसों में इस्लाम की शिक्षा के अलावा गणित या विज्ञान से सम्बंधित पाठ्यक्रम लागू नहीं हो सका है.

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