June 26, 2022

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महज 22 साल की उम्र में सिविल जज बनी शिवानी

मध्य प्रदेश/ मंडला: कुछ कर गुजरने का जुनून और उस जुनून के लिए समर्पण व सच्ची लगन सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर देती है। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले की एक बेटी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिससे उनके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन हुआ है। शहर के पड़ाव वार्ड में रहने वाले समाज सेवी चंद्रशेखर धुर्वे एवं आशा धुर्वे की बेटी शिवानी धुर्वे ने महज 22 वर्ष की उम्र में वह कर दिखाया है जो सालों साल मेहनत करने के बाद भी लोगों को हासिल नहीं हो पाता। शिवानी धुर्वे ने सिविल जज की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर सिविल जज का पद प्राप्त किया है। हाल ही में सिविल जज परीक्षा 2017-18 के परिणाम घोषित किए गए जिसमें शिवानी धुर्वे ने सफलता हासिल की है। बताया गया है कि शिवानी ने अपनी स्कूली पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय पदमी से की है। अपने बेहतरीन शिक्षण का आधार वह अपनी स्कूली पढ़ाई को ही देती हैं।

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नवोदय विद्यालय के उत्कृष्ट अध्यापन ने उन्हें सिविल जज के इस पद तक पहुंचाया है। शिवानी ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल से की है। वर्तमान में वे अपनी एलएलएम की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।

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माता पिता को दिया श्रेय:-
शिवानी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता को दिया है। उन्होंने कहा है कि सिविल जज सिविल बनने के पीछे उनकी प्रेरणा उनके पिता चंद्रशेखर धुर्वे रहे हैं। गरीबों को सहजता से न्याय मिले, गरीबों की सेवा हो सके और इस सेवा को पूरी निष्ठा के साथ किया जा सके। इसके लिए सिविल जज बनकर वह लोगों की वास्तविक सेवा करना चाहती हैं।

 

शिवानी का कहना है की न्याय मानवीय जीवन को बहुत करीब से छूता है और वास्तविक सेवा लोगों को न्याय देना ही उनका उद्देश्य है। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी। शिवानी की इस सफलता के लिए उनके माता-पिता ने शिवानी के समर्पण और कड़ी मेहनत को श्रेय दिया है उनका कहना है कि अपनी पढ़ाई के प्रति शिवानी स्कूल के समय से ही काफी गंभीर थी और एक निश्चित लक्ष्य बनाकर अपनी पढ़ाई किया करती थी यह उसी का परिणाम है जो आज 22 साल की उम्र में बेटी शिवानी सिविल जज बन गई है।
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15 लाख का पैकेज छोड़ की सिविल जज की तैयारी, हासिल की प्रदेश में चौथी रैंक:

फाइनल रिजल्ट में जनरल कैटेगरी में 46, ओबीसी में 12, एससी में 15 और एसटी कैटेगरी में 19 प्रतिभागियों का चयन हुआ। भोपाल की नविश्ता कुरैशी ने इस परीक्षा में 334.5 अंक हासिल कर चौथी रैंक हासिल की, जबकि अनुपेक्षा जैन को 331.5 के साथ 6वीं रैंक मिली। इनके अलावा शहर के मनोरम तिवारी ने इस परीक्षा में 9वीं, अर्चना तिवारी ने 37वीं और रिचा जैन ने 43वीं रैंक हासिल की।

 

नविश्ता कुरैशी मार्क्स- 334.5/450

10वीं क्लास से ही मेरा टारगेट ज्युडिशियरी में जाने का था। उस वक्त मैंने आरुषि मर्डर केस की बहुत सारी हियरिंग्स के बारे में पढ़ा था, जिसके कारण मेरा इंट्रेस्ट इस ओर बढ़ा। सिविल जज में सिलेक्शन तो हो गया, लेकिन मेरा टारगेट सुप्रीम कोर्ट जज बनना है। 1950 से अभी तक सिर्फ 7 फीमेल्स जज सुप्रीम कोर्ट में हैं। एलएलबी के दौरान 15 लाख तक के ऑफर आए, लेकिन छोड़े, क्योंकि मुझे हमेशा से ज्युडिशियरी में ही जाना था। पढ़ाई के दौरान पूरे कोर्स को तीन बार रिवाइज किया।

 

सिलेक्ट हुए कैंडिडेट्स में 15 एनएलआईयू के स्टूडेंट्स

इस बार सिविल जज क्वालिफाई करने वाले करीब 15 प्रतिभागी एनएलआईयू के एल्म्नाय स्टूडेंट्स हैं। सिटी टॉपर नविश्ता, अनुपेक्षा जैन, मनोरम तिवारी, रिचा जैन समेत ओबीसी कैटेगरी में रैंक-1 पानी वाली प्राची कौरवा और इसी कैटेगरी में रैंक-11 पाने वाली स्मृति पटेल भी एनएलआईयू की स्टूडेंट हैं। इसके अलावा, कैटेगरी मेरिट में सिलेक्ट हुईं आरती गौतम, नितिन वर्मा, के. शिवानी, सीताराम दास, अजय उइके, शिवानी धुर्वे, निकिता पवार और आयुष कनेल भी रिटन और इंटरव्यू राउंड क्वालिफाई कर सिलेक्ट हुए हैं।

अनुपेक्षा जैन मार्क्स- 331.5/450

मैं 12वीं तक इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही थी, फिर एक दिन पापा ने बोला कि इंजीनियर तो सभी बनते हैं, तुम सिविल जज बनो, तब कुछ गर्व की बात होगी। बस, उसी दिन तैयारियों और पढ़ाई का विषय बदल गया। मैंने काफी लीगल न्यूज पढ़ीं और सभी सब्जेक्ट्स को बार-बार रिवाइज किया। यह मेरा तीसरा अटैंप्ट था, जिसमें सफल रही। ज्युडिशियरी में जाने 14 लाख का पैकेज छोड़ा। लॉ के 12 विषयों को स्ट्रॉन्ग करने के लिए मेरा फोकस रीसेंट केसेस की स्टडी पर होता था।

सिविल जज परीक्षा में भोपाल की नविश्ता को चौथी व अनुपेक्षा को मिली 6वीं रैंक

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