June 18, 2021

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यूपी के विश्वविद्यालय का गड़बड़झाला:सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति का कार्यकाल एक दिन बढ़ाया गया, ताकि मंत्री के भाई को गरीब सवर्ण कोटे से अपॉइंट कर सकें

सिद्धार्थनगर |प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के गृह जनपद सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में उनके भाई की नियुक्ति का मामला रविवार को सोशल मीडिया में छाया रहा।

मंत्री के भाई अरुण द्विवेदी की नियुक्ति ईडब्ल्यूएस कोटे के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुई है। यह मामला चर्चा में आया तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रमाण के आधार पर नियुक्ति देने की बात की है, जबकि प्रदेश की कई हस्तियों ने प्रमाण पत्र के जांच की मांग की है।

यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी सवर्ण गरीब कोटे से मनोविज्ञान के प्रोफेसर बन गए हैं। जिस विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति हुई है, वहां के कुलपति का कार्यकाल एक दिन पहले ही बढ़ाया गया था।

कुलपति कार्यकाल बढाने का आदेश

मामला सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु का है। यहां मनोविज्ञान विषय के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर के 2 पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। इनमें से एक ओबीसी पद पर डॉ. हरेंद्र शर्मा और EWS (आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी) कैटेगरी में डॉ. अरुण कुमार द्विवेदी की नियुक्ति हुई है। डॉ. अरुण कुमार द्विवेदी बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र के भाई हैं। डॉ. अरुण को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने शुक्रवार को नियुक्ति पत्र दिया है।

कुलपति सुरेंद्र दुबे का कार्यकाल 21 मई को पूरा हो रहा था, लेकिन सरकार ने एक दिन पहले 20 मई को उनका कार्यकाल नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक बढ़ा दिया। अब ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि कुलपति का कार्यकाल इसलिए तो नहीं बढ़ाया गया, क्योंकि मंत्री के भाई की नियुक्ति होनी थी।

 

भास्कर के सवाल पर कुलपति के जवाब

भास्कर: 2 नियुक्तियां हुई हैं?

कुलपति: 2 नहीं, 7 नियुक्तियां हुई हैं। मनोविज्ञान पद पर एक अरुण द्विवेदी हैं, दूसरे शायद हरेंद्र शर्मा हैं।

भास्कर: अरुण मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई हैं?

कुलपति: मुझे नहीं मालुम है। अरुण को नियुक्ति पत्र उनके आवेदन के आधार पर दिया गया है। जिसमें उनके पिता का जिक्र है, भाई का कोई जिक्र नहीं है। भाई ने कभी मुझसे कोई प्रत्यक्ष या अपरोक्ष रूप से सिफारिश की।

भास्कर: अरुण कहां पढ़ाते थे?

कुलपति: मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है। वह विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाते थे।

भास्कर: मंत्री भी अपने भाई को ज्वॉइन कराने आए थे?

कुलपति: मंत्री विश्वविद्यालय नहीं आए थे, ये मैं जानता हूं।

PRO ने कहा- मनोविज्ञान का टीचर पहली बार नियुक्त हुआ

सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के पीआरओ अविनाश प्रताप से इस बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि अभी वह गोरखपुर में हैं, इसलिए उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। अरुण द्विवेदी पहले कहीं पढ़ाते थे, तो अविनाश कहते हैं कि वह विश्वविद्यालय में तो नहीं पढ़ाते थे, क्योंकि यहां अभी तक मनोविज्ञान का कोई टीचर ही नहीं था। पहली बार भर्ती हुई है।

बताया जाता है कि डॉ. अरुण पहले राजस्थान के वनस्थली विद्यापीठ में पढ़ाते थे, जब सतीश द्विवेदी मंत्री बने तो वे नौकरी छोड़कर उत्तर प्रदेश आ गए। यही नहीं, अरुण की पत्नी बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इनके पास घर और जमीन भी है, हालांकि सभी भाई अभी संयुक्त परिवार में ही रहते हैं।

 

सरकार ने नियमावली बदलने का आदेश दिया और मंत्री नियुक्ति पत्र बांटने लगे
बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने हाल ही में सरकार की ओर से एक पत्र जारी कर कहा था कि राज्य में पंचायत चुनाव में सिर्फ 3 प्राथमिक अध्यापकों की ड्यूटी करते हुए जान गई है। हालांकि जब विरोध बढ़ा तो योगी सरकार ने नियमावली बदलने का आदेश देते हुए सभी मृतक परिवारों के प्रति संवेदना जताई। कहा कि परिवर्तित लिस्ट जारी की जाए, ताकि सभी को न्याय मिल सके।

जिस मृतक टीचर की पत्नी को नियुक्ति पत्र दिया, उसकी पंचायत चुनाव में ड्यूटी भी नहीं लगी थी

मंत्री सतीश द्विवेदी नियमावली बदलने और नई लिस्ट जारी करने से पहले ही शुक्रवार को एक मृतक आश्रित को नियुक्ति पत्र देने संतकबीर नगर पहुंच गए। यहां उन्होंने सिद्धार्थनगर के रहने वाले दयाशंकर तिवारी की पत्नी रीना तिवारी को नियुक्ति पत्र सौंपा, लेकिन उन्होंने जिस मृतक अध्यापक के आश्रित को नियुक्ति पत्र दिया, उनकी चुनाव में ड्यूटी भी नहीं लगी थी।

 

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राधे रमन तिवारी बताते हैं कि संतकबीर नगर में 12 शिक्षकों की मौत हुई, ऐसे में मंत्री ने सिर्फ एक आश्रित को ही क्यों नियुक्ति पत्र दिया। पूरे जिले के सभी आश्रितों को पत्र बांटना चाहिए था। जिस मृतक दयाशंकर के पत्नी को नियुक्ति पत्र दिया गया है, उनका परिवार मंत्री का बहुत करीबी है।

राधे रमन का कहना है कि दयाशंकर की तो पंचायत चुनाव में ड्यूटी भी नहीं लगी थी। उनका हाल ही में जौनपुर से यहां ट्रांसफर हुआ था, इसलिए उन्हें स्कूल भी नहीं मिल पाया था। वह बीएसए ऑफिस में ही अटेंडेंस लगाते थे।

वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम होने पर ही EWS प्रमाण पत्र मिलता है
EWS प्रमाण पत्र सामान्य वर्ग के उन लोगों को दिया जा रहा है, जिनकी फैमिली इनकम 8 लाख रुपए (वार्षिक) से कम है। इसके साथ ही आवदेनकर्ता के पास 5 एकड़ से कम जमीन होनी चाहिए एवं उसका घर 1000 स्क्वायर फीट से कम होना चाहिए। अगर आप शहरी निकाय क्षेत्र में रहते हैं, तो आपके पास 100 वर्ग गज से कम का आवासीय प्लॉट होना चाहिए।

सांसद संजय सिंह बोले- शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें या बर्खास्त किए जाएं

AAP सांसद संजय सिंह ने बेसिक शिक्षा मंत्री को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा है। संजय सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव में कोरोना के कारण 1621 शिक्षकों की जान गई, लेकिन शिक्षा मंत्री को मरने वाले शिक्षकों की संख्या नहीं मालूम है। पर वह ये जानते हैं कि फर्जीवाड़ा करके अपने सगे भाई को गरीबी रेखा का सर्टिफिकेट दिलाकर कैसे नौकरी दी जाती है। उन्होंने नियम कानून ताख पर रखकर कुलपति का इस्तेमाल किया। पहले कुलपति का कार्यकाल बढ़ाया, फिर भाई को नौकरी दिलाई। योगी सरकार अपने मंत्री से इस्तीफा ले या बर्खास्त करे।

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