August 4, 2021

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

केंद्रीय बैंक बड़ी संख्या में नोट छाप कर ब्याज दरों को कम करना चाहते थे, ताकि लोन देकर उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और अर्थव्यवस्था को नुकसान से निकाला जा सके। लेकिन ऐसा होने के बजाए यह पैसा शेयर बाजार में लगाया गया। नतीजतन वही लोग अमीर होते रहे, जो पहले से अमीर थे।

कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया पर पड़ी। भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में एक रहा। ये एक आपदा है, यह मानने में कोई हिचक नहीं हो सकती। लेकिन किसी परिवार में अगर किसी आपदा से सभी बराबर पीड़ित हों, तो सब यह मान लेते हैं कि बुरा वक्त आया, तो उसका नतीजा सबको भुगतना पड़ा। लेकिन अगर बुरा वक्त किसी एक तबके लिए चमकने का मौका मिल जाए, तो समाज में सवाल उठेंगे। न सिर्फ सवाल उठेंगे, बल्कि देर सबेर असंतोष भी पैदा होगा। आज हम उसी कगार पर हैँ। एक ताजा रिपोर्ट ने बताया है कि (डॉलर को मुद्रा का आधार मानें तो) 2020 में हर भारतीय परिवार की घरेलू संपत्ति 6.1 प्रतिशत कम हो गई है। रुपये को आधार माने तो यह कमी करीब 3.7 प्रतिशत है। संपत्ति में आई इस कमी की मुख्य वजह यहां जमीन और घरों के दाम में आई भारी गिरावट है। भारतीयों की घरेलू संपत्ति में कुल गिरावट 8.4 प्रतिशत है। लेकिन कुछ वित्तीय संपत्तियों जैसे शेयर मार्केट में लगे पैसों से अच्छा रिटर्न मिलने के चलते करीब दो फीसदी गिरावट की भरपाई हो गई।

नतीजा यह हुआ कि एक तबके पर कम मार पड़ी, जबकि बाकी तबके तबाही के कगार पर पहुंच गए। और भारत में तो जिसे क्रोनी कैपिटलिज्म कहते हैं, जो लोग उसका हिस्सा हैं, उनकी तो चांदी ही हो गई। उनकी संपत्ति में अकूत इजाफा हुआ है। स्विस बैंक केड्रिट सुइस की ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत समेत पूरी दुनिया में असमानता बढ़ी है। आर्थिक गतिविधियों में भारी गिरावट से सबसे धनी समूह न सिर्फ अछूता रहा है, बल्कि शेयरों की कीमत बढ़ने और घरों के दामों पर ब्याज दरें कम होने से उसे फायदा भी हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल दुनिया की कुल संपत्ति मे 7.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि प्रति व्यक्ति संपत्ति 6 प्रतिशत बढ़ी है। इसकी एक वजह दुनिया के ज्यादातर केंद्रीय बैंकों का बड़ी संख्या में नोट छापना है। वे ऐसा करके ब्याज दरों को कम करना चाहते थे, ताकि लोन देकर मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और अर्थव्यवस्था को नुकसान से निकाला जा सके। लेकिन ऐसा होने के बजाए यह पैसा शेयर बाजार में लगाया गया। नतीजतन वही लोग अमीर होते रहे, जो पहले से अमीर थे।

 

 

¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤

आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं?

 

पैसा पैसे को खींचता है. बरसों से ये कहावत हम सब सुनते आ रहे हैं. इसी कहावत का हवाला देकर हम सब अमीरों को और अमीर होते देखते आ रहे हैं.

सुनते आ रहे हैं कि अमीर और ग़रीब के बीच खाई बढ़ती जा रही है. मगर कभी आपको ख़याल आया कि आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं?

असल में वो अपने पैसे का ऐसा इस्तेमाल करते हैं, ऐसी जगह निवेश करते हैं जिससे उनके पैसे की क़ीमत, निवेश का रिटर्न बढ़ता जाता है.

हम आप भी अमीरों के ये नुस्खे सीखकर, आज़माकर अमीर बनने का अपना ख़्वाब पूरा कर सकते हैं.

जब हमारे पास थोड़ा ज़्यादा पैसा होता है, तो हम उसमें से कुछ तो अपने लिए ख़रीदारी करने में ख़र्च कर डालते हैं. या फिर किसी म्युचुअल फंड में डाल देते हैं.

नया धंधा

अब आपको बताते हैं कि अमीर लोग क्या करते हैं. वो लोग अपनी ज़रूरत से बचे पैसों को प्रॉपर्टी, कोई आर्टवर्क, कोई कारोबार ख़रीदने या नया काम शुरू करने में लगाते हैं.

मिसाल के तौर पर शिकागो के जोशुआ कोलमैन को ही लीजिए. जब उनके परिवार ने पुश्तैनी कारोबार को बेचा तो उससे 40 करोड़ डॉलर मिले.

इस पैसे से वो ऐश करने में नहीं जुटे. जोशुआ ने ऐसी कंपनी शुरू की, जो लोगों को टैक्स, क़ानूनी और पैसे के मैनेजमेंट के जानकारों से जोड़ती है.

आज उनका ये नया धंधा मज़े में चल रहा है. अब अगर आप अपने पैसे से नया धंधा शुरू करने की नहीं सोच रहे हैं, तो इसका मतलब आप अल्ट्रा रिच नहीं हैं.

जिन लोगों के पास कम से कम तीन करोड़ डॉलर (लगभग 1.9 अरब रुपये) की संपत्ति है, उन्हें अल्ट्रा रिच कहा जाता है. वो लोग अलग तरह के शेयरों में निवेश का जोखिम लेते हैं.

अमीरों का नुस्खा

वो हवाई जहाज़ ख़रीदकर किराए पर उठाने का धंधा करते हैं. वो ऐसी कलाकृति या कारें ख़रीदते हैं, जिनकी आने वाले वक़्त में क़ीमत बढ़ सकती है.

जोशुआ कोलमैन इसे अंग्रेज़ी में ‘अल्फ़ा रिस्क’ या बहुत बड़ा जोखिम कहते हैं. ऐसे इन्वेस्टमेंट में काफ़ी ख़तरे होते हैं.

मगर बिना रिस्क लिए आप कोई धंधा तो कर नहीं सकते. तरक़्क़ी करने के लिए ऐसे जोखिम ज़रूरी होते हैं, जो अमीर लोग लेते हैं. इस तरह वो और अमीर हो जाते हैं.

आपके पास निवेश के लिए लाखों डॉलर की रक़म भले न हो, मगर ये नुस्खा तो आप अमीरों से सीख ही सकते हैं.

दूसरी बात ये कि अमीर लोग कुछ ऐसे निवेश करते हैं, जो आम लोगों को पता ही नहीं होते. मसलन क्लोज़ एंडेड फंड. इन फंड्स में निवेश पांच साल के लिए होता है.

ब्रिटेन हो या हिंदुस्तान

मगर इसमें पैसे लगाकर अमीर लोग काफ़ी रिटर्न हासिल करते हैं. इसी तरह बहुत से लोग एयरलाइन्स को हवाई जहाज़ किराए पर देने का धंधा करते हैं.

लंदन की एसेट मैनेजमेंट कंपनी फ्लेमिंग फैमिली ऐंड पार्टनर्स के इयान मार्श कहते हैं कि उनके कई ग्राहक डोरिक नाम की कंपनी से जुड़े हैं.

ये कंपनी हवाई जहाज़ ख़रीदकर बड़ी एयरलाइंस को किराए पर देती है. जब जहाज़ बिकेंगे तब तो उन्हें निवेश का रिटर्न मिल ही जाएगा.

तब तक वो अपने निवेश पर सालाना 9 फ़ीसद तक रिटर्न कमा रहे हैं. इसमें शुरुआती निवेश दस हज़ार यूरो से शुरू होता है.

इसी तरह बहुत अमीर लोगों के ज़मीनें ख़रीदने का भी चलन है. ब्रिटेन हो या हिंदुस्तान, जिन रईसों के पास ज़्यादा पैसे होते हैं, वो प्रॉपर्टी ख़रीदने में लगाते हैं.

खेती लायक ज़मीन

ख़ास तौर से खेती लायक़ ज़मीन. दुनिया में जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे खेती लायक़ ज़मीन की मांग भी बढ़ रही है.

इसकी क़ीमत भी दिनों-दिन बढ़ती ही जानी है, क्योंकि ख़ेती लायक़ ज़मीन की तादाद सीमित ही है.

इसीलिए अमीर लोग अभी से दूरंदेशी दिखाते हुए खेती लायक़ ज़मीन ख़रीद रहे हैं. इसमें सालाना चार फ़ीसद तक का रिटर्न मिलता है.

साथ ही ज़मीन की क़ीमत भी साल-दर-साल बढ़ती जाती है. इसी तरह कई लोग वाइन के धंधे में या किसी स्टार्ट अप कंपनी में पैसे लगाकर अच्छा मुनाफ़ा कमाते हैं.

कुछ कंपनियां भी हैं जो खेती की ज़मीन ख़रीदती हैं. आप उनके शेयर में निवेश कर सकते हैं.

अमीर लोग अपनी कंपनी खड़ी करने के साथ-साथ दूसरे सेक्टर में तेज़ी से बढ़ रही कंपनियों में भी निवेश करते हैं.

कंपनियों में निवेश

मसलन शिकागो के जोशुआ ने इतनी कंपनियों में इन्वेस्टमेंट किया है कि उन्हें इसकी संख्या तक नहीं मालूम.

वो अक्सर प्राइवेट इक्विटी फर्म और कुछ दूसरे निवेशकों के साथ मिलकर किसी तेज़ी से बढ़ती कंपनी में हिस्सेदारी ख़रीदते हैं.

अब जिन लोगों ने गूगल, इन्फ़ोसिस, एप्पल या रिलायंस के शुरुआती दौर में निवेश किया होगा, उन्हें तो आज धमाकेदार मुनाफ़ा हो रहा होगा.

आज कई बड़े कारोबारी अपनी निजी कमाई स्टार्ट-अप कंपनियों में लगा रहे हैं. मसलन रतन टाटा ने कई स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश किया है.

हालांकि इसमें काफ़ी जोखिम होता है. आधी से ज़्यादा स्टार्ट-अप कंपनियां नाकाम हो जाती हैं. लेकिन कुछ लोगों को इसमें मज़ा भी आता है.

आप कंपनी को तेज़ी से बढ़ते हुए देख सकते हैं. लेकिन इसमें आम निवेश के मुक़ाबले 20 गुना ज़्यादा तक रिटर्न मिल सकता है. शौक़ बड़ी चीज़ है.

स्टार्ट-अप कंपनियां

किसी को घड़ियों का, किसी को पुरानी कारों का, किसी को शराब का और किसी को कला का शौक़ होता है. ये शौक़ भी आपकी अमीरी बढ़ा सकता है.

अमीर लोग शौक़ के लिए भी महंगे आर्टवर्क और गाड़ियां ख़रीदते हैं. क्योंकि इनकी क़ीमत आगे चलकर बढ़ती है, तो इन्हें बेचकर वो भारी मुनाफ़ा भी कमा सकते हैं.

ऐसे निवेश में सही दांव लगे, तो, 15 से 20 फ़ीसद का मुनाफ़ा हासिल हो सकता है. अगर आपके पास इतने पैसे नहीं कि आप सीधे निवेश करें, तो कई फंड भी ये काम करते हैं.

जैसे कि अमरीका में एक द वाइन इन्वेस्टमेंट फंड है, जो महंगी शराब के कारोबार में निवेश करता है. आप इसके शेयर ख़रीद सकते हैं.

इसी तरह कई कंपनियां आर्टवर्क में निवेश करती हैं. आप उनमें हिस्सेदारी ख़रीद सकते हैं. बहुत से रईस, संपत्ति में पैसे लगाना पसंद करते हैं.

कई लोग कारोबारी संपत्ति ख़रीदते हैं, तो कुछ लोग मकान और फ्लैट में निवेश करते हैं.

मकान और फ्लैट में निवेश

दिल्ली, मुंबई, दुबई, न्यूयॉर्क और लंदन जैसे शहरों में प्रॉपर्टी में निवेश फ़ायदे का ही सौदा होता है. कई कारोबारी इन मकानों और फ्लैट में आते-जाते हुए रुकते भी रहते हैं.

जब सही क़ीमत मिल रही होती है, तो, वो इन्हें बेच भी देते हैं. अब आम आदमी, न्यूयॉर्क या लंदन के पॉश इलाक़े में मकान नहीं ख़रीद सकता.

मगर आप अपने शहर के उन इलाक़ों में फ्लैट या मकान ले सकते हैं, जहां आपकी जेब गवारा करे. फिर आप इसे किराए पर उठाकर कुछ कमाई कर सकते हैं.

सही क़ीमत मिलने पर इसे बेचा भी जा सकता है. बहुत सी कंपनियां भी हैं जो कारोबारी जगह या रिहाइशी मकानों में निवेश करती हैं.

इन्हें रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट कहते हैं. आप इनके ज़रिए छोटी-छोटी रक़म इस मुनाफ़े के धंधे में लगा सकते हैं.

अमीरों के शौक़ अपनाना तो ठीक, अमीरों के निवेश के इन तरीक़ों पर अमल करके आप भी अमीर बन सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Newsphere by AF themes.