June 29, 2022

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सच के साथ

विकास का पहिया, विनाश की यात्रा पर

विश्व में हर तरफ तरक्की का बोलबाला हो रहा है। जहां देखो वहां बस विकास की ही बातें होती हैं। विश्व के सभी देश अपने-अपने तरीके से विकास की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ रहे हैं।

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अंधाधुंध तरीके से सड़क निर्माण और ढांचागत परियोजनाओं का विकास होने से कई तरह की विषमताओं का जन्म हो रहा हैं। विकास से ही मानव प्रजाति को सबसे ज्यादा खतरा उत्पन्न हो रहा है। तरक्की का पहिया सारी दुनिया को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय खतरों की ओर ले जा रहा है। यह महज कोई अनुमान आधारित तथ्य नहीं है, बल्कि शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर जांचा और परखा गया कड़वा सच है। हद से ज्यादा हो रहे विकास की कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है।

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क्वींसलैंड की जेम्स क्रुक यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक विलियम लॉरेंस ने यह शोध किया है। उन्होंने दुनिया भर में बन रही प्रमुख सड़कों और विकास की आधारभूत परियोजनाओं की जांच-पड़ताल की है। नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे हैं। यह बहुत ही हैरान कर देने वाला सच है कि विकास के पीछे बहुत भयानक खतरे छुपे हुए हैं। जिन क्षेत्रों में बहुत ज्यादा बारिश होती है वहां नई सड़क बनाने को प्राथमिकता दी जाती है। उल्लेखनीय है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों में नई सड़कों का निर्माण सबसे ज़रूरी विकास प्रक्रिया है। इसी के चलते धरती पर अंधाधुंध निर्माण कार्य होता रहता है, जो कुदरत से छेड़खानी करने जैसा है।

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लगातार होने वाली बरसात के चलते सड़कों पर गढ्ढे और बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाती हैं। साथ ही भूस्खलन जैसी समस्याएं भी बहुत तेजी से उभरती हैं। इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के कारण ये परियोजनाएं काफी नुकसान दायक साबित होती हैं। इनमें पैसे की भी बहुत बर्बादी होती है। एक अनुमान के मुताबिक अगले तीन सालों में एशिया के विकासशील देशों में पक्की सड़कों की लंबाई दोगुनी हो जाएगी। गीले, दलदली या पहाड़ी क्षेत्रों में नई सड़कों का निर्माण होने से पर्यावरण का बहुत ज्यादा नुकसान होता है। तरक्की को केवल आर्थिक मानदंडों पर आधारित नहीं माना जा सकता है।

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खास तौर पर पर्यावरण को होने वाले खतरों को विकास से जोड़कर देखे जाने पर स्थिति काफी विकट नज़र आती है। अगर पर्यावरण के मौजूदा हालात को तरक्की की बुनियाद से जोड़कर देखा जाए तो निष्कर्ष बहुत ही खराब आएगा। वन क्षेत्रों में इस तरह का निर्माण कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। इतना ही नहीं खराब सड़कों के भारी कर्ज का हर्जाना भी जनता को ही भुगतना पड़ता है। यानी इस तरह से दोनों मामलों में धरती को ही नुकसान पहुंचता है। यह इंसान को देखना है कि वो तरक्की की बुनियाद पर किस तरह से अपने कदम रखता है। अंधाधुंध हो रहा विकास कई तरह के विनाश को जन्म दे रहा है।

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