July 7, 2022

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वेनेजुएला भारत का चौथा बड़ा तेल निर्यातक देश है।

वेनेजुएला में मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक संकट नई दिल्ली के लिए टेंशन जरूर बन गया है। भारत जिन देशों से तेल आयात करता है वेनेजुएला उनमें चौथा बड़ा देश है। ईरान पर प्रतिबंधों के कारण पहले ही भारत को तेल आयात में मुश्किलों से गुजरना पड़ रहा है। अमेरिका की वेनेजुएला पर जारी सख्ती मुश्किल बढ़ा सकती है।

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ईरान पर लगाई सख्त पाबंदी के बाद भारत के लिए तेल आयात बड़ी चिंता बन गया है। अमेरिका की तरफ से मिली छूट के बाद भी भारत अब ईरान से 40% कम तेल आयात कर पा रहा है। तेल आयात में आ रही मुश्किलें अभी थमने का नाम नहीं ले रही और अब वेनेजुएला से भी भारत को टेंशन होने लगी है। वेनेजुएला भारत का चौथा बड़ा तेल निर्यातक देश है।

वेनेजुएला में गहराया आर्थिक-राजनीतिक संकट
वेनेजुएला में मौजूदा प्रेजिडेंट निकोलस मादुरो के खिलाफ विद्रोह लगातार तेज हो रहा है। नेता विपक्ष जुआन गुएडो ने मादुरो सरकार को अवैध बताते हुए सत्ता हस्तांतरण की मांग की है। अमेरिका तो ह्यूजो शावेज के दिनों से ही वेनेजुएला का विरोधी रहा है और मौजूदा संकट में अमेरिकी सरकार का रुख मादुरो के खिलाफ है। ब्रिटेन, कनाडा और ब्राजील भी अमेरिका के साथ सहमति व्यक्त कर चुके हैं। घनघोर आर्थिक संकट से गुजर रहे इस देश में इस वक्त राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। हालांकि, मादुरो के पास रूस और चीन जैसे देशों का समर्थन तो है ही, सेना भी उनके पक्ष में है।

 

अमेरिका ने बढ़ाई वेनेजुएला पर सख्ती
अमेरिका ने न सिर्फ मादुरो को पद से हटाने की मांग की है बल्कि विपक्षी नेता गुएडो को समर्थन देने के लिए सख्त कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं। वेनेजुएला की मादुरो सरकार को तेल निर्यात से होनेवाली आमदनी का रास्ता बंद किया जा चुका है। वेनेजुएला से तेल निर्यात के सभी रास्ते अमेरिका ने लगभग बंद कर दिए हैं। अमेरिका की तरफ से जारी निर्देश के बाद वेनेजुएला के लिए देश के बाहर के संसाधनों से आमदनी का रास्ता भी बंद हो चुका है।

तेल निर्यातकों के पास कुछ विकल्प हैं

वेनेजुएला के तेल निर्यातकों के पास भारत जैसे देश को तेल निर्यात करने के लिए कुछ विकल्प खुले हैं। निर्यातक यह आश्वासन दे सकते हैं कि भुगतान के लिए कुछ दूसरे तरीके अपनाए जा सकते हैं और यह कि दूसरे देशों से मिलनेवाली रकम का प्रयोग मादुरो सरकार नहीं कर सकती। हालांकि, यह विकल्प लगभग नामुमकिन है क्योंकि वेनेजुएला में लगभग पूर्ण रूप से तानाशाही का राज है।

ट्रंप फिर एक बार देंगे भारत को राहत?
ट्रंप प्रशासन से भारत को कुछ उम्मीद है। अगर ईरान की तरह ट्रंप पूरे वैश्विक स्तर पर नियार्त पर पाबंगी लगाते हैं तो इसका असर भारत पर बहुत प्रतिकूल पड़ेगा। हालांकि, अगर ट्रंप तेल निर्यातकों को अपने नुकसान की भरपाई के लिए चीन और भारत और चीन जैसे देशों को तेल बेचने की छूट दे सकते हैं। भारत को इसके लिए वेनेजुएला की राजनीतिक स्थितियों पर भी नजर रखनी होगी क्योंकि जादुओ अगर अपने दावे पर टिके रहे तो भारत के लिए तेल आयात कर सकना टेढ़ी खीर साबित होगा। इस दौर में एक आशावादी नजरिया यह जरूर हो सकता है कि ट्रंप प्रशासन को बैकफुट पर पुतिन और शी चिनफिंग की जोड़ी कर सकती है और तेल आयात में भारत को राहत मिल जाए।

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