January 22, 2021

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शर्मनाक रिकॉर्ड: रिश्वतखोरी में भारतीय पूरे एशिया में नंबर वन;ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल

हाइलाइट्स:

  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल ने एशिया में भ्रष्‍टाचार/घूसखोरी पर तैयार की है सर्वे रिपोर्ट
  • भारत में घूसखोरी सबसे ज्‍यादा, कम्‍बोडिया दूसरे और इंडानेशिया तीसरे नंबर पर
  • सरकारी सुविधाओं का फायदा पाने के लिए निजी संबंधों का खूब होता है यूज
  • कई देशों के लोग मानते हैं सरकारी भ्रष्‍टाचार को वहां की सबसे बड़ी प्रॉब्‍लम

नई दिल्ली |रिश्वतखोरी अथवा घूसखोरी के मामले में भारत ने पूरे एशिया में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिस पर हर भारतीय को शर्म महसूस होगी। भ्रष्टाचार के मामले मेंभारत की स्थिति एशिया में सबसे अधिक खराब है, क्योंकि भारत में घूसखोरी की दर 39 फीसदी है। भ्रष्टाचार पर काम करने वाले ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की बुधवार को जारी रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि एशिया में घूसखोरी के मामले में भारत टॉप पर है, वहीं दूसरे पर कंबोडिया (37 फीसदी) और तीसरे पर इंडोनेशिया (30 फीसदी)  है। वहीं चीन की बात करें तो वहां घूसखोरी की दर 28 फीसदी है। सबसे कम घूस देने वाले देश में मालदीव और जापान संयुक्त रूप से है। 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सर्वेक्षण में शामिल 47 फीसदी लोगों का मानना है कि पिछले 12 महीनों में भ्रष्टाचार बढ़ा है, जबकि 63 फीसदी लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सरकार अच्छा काम कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 46 फीसदी लोगों ने सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पर्सनल कनेक्शन का सहारा लिया है। 

भारत में पुलिस को घूस देने वाले लोगों की संख्या 42 फीसदी है। वहीं, पहचान पत्र जैसे कागजात बनवाने के लिए करीब 41 फीसदी लोगों ने रिश्वत दी है। पुलिस वाले मामले मेंपर्सनल कनेक्‍शन का उपयोग कर सबसे अधिक 39 फीसदी ने अपना काम निकलवाया है। वहीं, पहचान पत्र हासिल करने के लिए 42 फीसदी और अदालती मामलों में काम निकलवाने के लिए 38 फीसदी लोगों ने पर्सनल कनेक्शन का इस्तेमाल किया है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि पड़ोसी देश नेपाल में घूसकोरी की दर महज 12 फीसदी है। 

भारत के पड़ोसी देशों का क्‍या है हाल?
भारत के बाद सबसे ज्‍यादा घूसखोरी कम्‍बोडिया में है जहां 37 फीसदी लोग रिश्‍वत देते हैं। 30% के साथ इंडोनेशिया तीसरे नंबर पर है। मालदीव और जापान में घूसखोरी की दर पूरे एशिया में सबसे कम हैं जहां केवल 2% लोग ही ऐसा करते हैं। दक्षिण कोरिया और जापान की स्थिति भी बेहतर है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल के सर्वे में पाकिस्‍तान को शामिल नहीं किया गया। बांग्‍लादेश में घूसखोरी की दर भारत के मुकाबले काफी कम (24%) है जबकि श्रीलंका में यह 16% है।

पर्सनरल कनेक्शन का सहारा लेने में भारत के बाद इंडोनेशिया और चीन का नंबर आता है। भारत में जहां 46 फीसदी लोगों ने पर्नसल कनेक्शन का सहारा लिया, वहीं इंडोनेशिया में 36 और चीन में 32 फीसदी लोगों ने इसका इस्तेमाल किया। ठीक इसके उलट, जापान और कंबोडिया में महज 4 और 6 फीसदी लोगों ने सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पर्सनल कनेक्शन का सहारा लिया। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिश्वत देने वाले करीब 50 फीसदी लोगों से घूस मांगी गई थी। वहीं 32 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर वे घूस नहीं देते तो उनका काम नहीं हो पाता। जनवरी में विश्व आर्थिक मंच पर दावोस में जारी ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी एक पूर्व रिपोर्ट में  भारत को भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में 180 देशों के बीच 80 वें स्थान पर रखा गया था।

सरकारी भ्रष्‍टाचार से सबसे ज्‍यादा परेशान हैं लोग
‘ग्‍लोबल करप्‍शन बैरोमीटर – एशिया’ के नाम से प्रकाशित अपनी सर्वे रिपोर्ट के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल ने 17 देशों के 20,000 लोगों से सवाल पूछे। यह सर्वे जून और सितंबर के बीच हुआ। उनसे पिछले 12 महीनों में भ्रष्‍टाचार के अनुभवों की जानकारी मांगी गई। सर्वे में छह तरह की सरकारी सेवाएं शामिल गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, हर चार में से तीन लोग मानते हैं कि उनके देश में सरकारी भ्रष्‍टाचार सबसे बड़ी समस्‍या है। हर तीन में से एक व्‍यक्ति अपने सांसदों को सबसे भ्रष्‍ट व्‍यक्ति के रूप में देखता है। मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड में सेक्‍सुअल एक्‍सटॉर्शन के मुद्दे को भी रिपोर्ट में प्रमुखता से उठाया गया है।

ग्‍लोबल करप्‍शन बैरोमीटर– एशिया’ के नाम से प्रकाशित सर्वे रिपोर्ट के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जून और सितंबर के बीच 17 देशों के 20,000 लोगों से सवाल पूछे। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा सर्वे के दौरान लोगों से पिछले 12 महीनों में भ्रष्‍टाचार के अनुभवों और धारणआओं की जानकारी मांगी गई थी। सर्वे में छह तरह की सरकारी सेवाएं शामिल गई थीं- पुलिस, स्कूल, कोर्ट, सरकारी अस्पताल, पहचान पत्र और  सेवा लाभ

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