December 4, 2020

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सच के साथ – समाचार

शास्त्र कहते है जिसका उत्थान हुआ है उसका पतन भी निश्चित है;

शास्त्र कहते है जिसका उत्थान हुआ है उसका पतन भी निश्चित है

सन् 1674 में हम हिन्दुओ ने छत्रपति शिवाजी महाराज की आँखों से एक हिन्दुराष्ट्र और दिल्ली पर अपना झंडा फिर से फहराने का सपना देखा था, 1737 और 1757 के दिल्ली के युद्धों में दो बार हमने दिल्ली जीती मगर 1803 में अंग्रेजो को गवा दी। अब फिर भाजपा के रूप में दिल्ली पर हमारा झंडा फहरा रहा है, यह एक चक्र है सफलता हमे अधिक उत्साहित और असफलता हमे अधिक हतोत्साहित कर देती है।

राम राज्य के समय रघुवंशी साम्राज्य को चुनौती देने की कोई सोच भी नही सकता था मगर बाद में रघुवंशी आपस मे ही लड़ मर गए और अपनी सत्ता गवा दी। महाभारत के युध्द के बाद चंद्रवंश को कोई टक्कर नही दे सकता था मगर पांडवो की 36वी पीढ़ी का अंत सबसे बुरा हुआ।

यही बाते आगे के इतिहास में भी सिद्ध हुई राजस्थान के राजवंश, मुगल, मराठा और फिर अंग्रेज सब तेजी से शक्ति बनकर उभरे मगर सबका बुरी तरह से पतन हुआ। अब 2 दिन पहले बीजेपी की राजस्थान की 2 सीट पर हार हुई इस हार से भाजपा के समर्थक दुखी है और प्रश्न उठा रहे है 2019 के चुनावों पर।

सवाल यह है कि क्या इस चुनाव में जीत कर आप हमेशा हमेशा के लिए भाजपा को दिल्ली सौप सकते है??? 2019 में जीत जाओगे, 2024 में भी मगर क्या हर चुनाव में जीत सुनिश्चित है??? हमे मानसिक रूप से मजबूत होने की आवश्यकता है क्योकि कभी ना कभी तो बीजेपी का सत्ता खोना और कांग्रेस का सत्ता में आना निश्चित है।

बीजेपी को जीत दिलाने की जगह अगर हम हिन्दुओ को मजबूत करने का प्रयास करें तो ज्यादा बेहतर होगा, समाज का हर वर्ग जागृत हो यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए ना कि भाजपा की हर चुनाव में जीत। यदि हिन्दुओ की एकता गुजरात और कर्नाटक में कांग्रेस को हिंदूवादी बना सकती है तो बाकी राज्यो में भी यह संभव है।

हमे संगठित होने की आवश्यकता है हो सकता है भाजपा की कई नीतियों से हम सहमत ना हो मगर 100% स्वीकृति से तो कभी भी कोई सरकार चला ही नही सकता। इस समय भाजपा में ही हिन्दुओ का हित है, इसलिए हमारा समर्थन उसे होना चाहिए मगर यदि भाजपा हारती है तो इसका अर्थ यह नही की हिंदुत्व कमजोर हो गया।

हार से किसी को दुखी होने की आवश्यकता नही है क्योकि दूर भविष्य में ही सही मगर कभी ना कभी हमारी हार अटल है और उस हार के बाद फिर से हमारी जीत भी निश्चित है। धर्म की रक्षा एकजुटता से की जाती है ना कि सत्ता पाकर, इसलिए संगठित हो जाओ और धर्म तथा राष्ट्र की रक्षा करो।

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