June 27, 2022

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संतकबीरनगर:एआरटीओ कार्यालय अधिवक्ता की हत्या का हुआ खुलासा

संतकबीरनगर: एआरटीओ कार्यालय अधिवक्ता 7 सितंबर को घर से अपनी कार लेकर लखनऊ के लिए निकले थे। इसके बाद से ही वह लापता हो गए। उनके फोन और कार का भी कुछ पता नहीं चल सका। काफी समय बीतने के बाद अधिवक्ता संगठन एसपी ब्रजेश सिंह से मिला। एसपी के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने भाई अयोध्या त्रिपाठी की तहरीर पर नामजद आरोपित सुभाष कन्नौजिया निवासी शिवापार थाना बखिरा के विरुद्ध हत्या के लिए अपहरण का मुकदमा दर्ज कर अधिवक्ता की तलाश शुरू कर दी।

 

 

इसके साथ ही लखनऊ पुलिस व एसटीएफ की टीम अधिवक्ता की तलाश में जुट गई। सोमवार को पुलिस और एसटीएफ ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर अधिवक्ता की हत्या का खुलासा कर दिया। हत्यारों की पहचान सुभाष कन्नौजिया पुत्र बीरबल कन्नौजिया निवासी ग्राम शिवापार थाना कोतवाली खलीलाबाद और सोमनाथ सोलंकी पुत्र मनीराम सोलंकी निवासी ग्राम बसहवा थाना कोतवाली खलीलाबाद के रूप में हुई।

 

उनकी निशानदेही पर संयुक्त टीम ने हत्या में प्रयुक्त कार, अधिवक्ता की कार, मोटरसाइकिल, गमछा (जिससे गला घोंटकर हत्या की गई), चार मोबाइल फोन, एक एटीएम, आधार कार्ड और 730 रुपये नगद बरामद किए। इस खुलासे के बाद संतकबीरनगर में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट में हत्या की धारा बढ़ा दी गई है।

 

एसपी ने एसटीएफ से लिया था सहयोग

एसपी ने पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ, उत्तर प्रदेश से घटना के अनावरण में सहयोग मांगा था। इसके क्रम में राजीव नारायण मिश्र वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ के निर्देशानुसार प्रमेष कुमार शुक्ल पुलिस उपाधीक्षक के पर्यवेक्षण में एसटीएफ के निरीक्षक पंकज मिश्रा व जिले के जांच अधिकारी धर्मेन्द्र सिंह की संयुक्त टीम ने अपहृत राम गोपाल त्रिपाठी के पारिवारिक व्यावसायिक व निजी संबंधों को देखते हुए रखकर अभिसूचना संकलन की कार्रवाई शुरू की।

 

 

इस तरह हत्यारों तक पहुंची टीम

जांच में जुटी संयुक्त टीम को पता चला कि सात सितंबर की रात्रि लगभग आठ बजे रामगोपाल त्रिपाठी नई जेल लखनऊ के इन्दिरा नहर के आसपास थे। इसके बाद से उनके तीनों मोबाइल फोन स्वीच ऑफ हो गए। जांच में सामने आया कि सुरेश कन्नौजिया ने रामगोपाल त्रिपाठी के विरुद्ध थाना मेंहदावल में मुकदमा पंजीकृत कराया था। सुरेश कन्नौजिया का भाई सुभाष कन्नौजिया लखनऊ में निवास करता है। जिसने उक्त मुकदमें में समझौता कराने के लिए रामगोपाल त्रिपाठी को लखनऊ 6 सितंबर को बुलाया था। सुभाष कन्नौजिया के लखनऊ स्थित ठिकानों, उसकी गतिविधियों एवं नम्बरों के सम्बन्ध में जानकारी किये जाने पर पता चला कि 7 सितंबर को शाम जीवन प्लाजा गोमतीनगर एवं नई जेल रोड लखनऊ पर रामगोपाल त्रिपाठी को सुभाष कन्नौजिया दो अन्य लोगों के साथ देखा भी गया था। 23 सितंबर को सूचना मिली कि रामगोपाल त्रिपाठी की हत्या सुभाष कन्नौजिया ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर की है। उक्त लोगों ने शव व कार को कहीं छिपा दी है। सुभाष अपने एक अन्य साथी जो हत्या में शामिल था, उससे मिलने के लिए उसी कार से शहीदपथ गोमतीनगर स्थित एक रेस्टोरेन्ट के पास मिलने आने वाला है। इस सूचना पर एसटीएफ ने पहुंचकर धर दबोचा।

 

हत्यारोपियों ने खोले राज

गिरफ्तार अभियुक्तों ने संयुक्त रूप से अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने 7 सितंबर को रामगोपाल त्रिपाठी की हत्या कर शव को इन्दिरा नहर में फेंक दिया था। अभियुक्त सुभाष कन्नौजिया ने बताया कि कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र में कामता यादव, अभय जैन व उमाशंकर दास के संयुक्त रकबे की लगभग 2.50 बीघा जमीन का उसने पांच करोड़ रुपये में एग्रीमेंट कराया था। शहर के अन्दर की बेसकीमती जमीन होने के कारण इस जमीन में कई लोगों ने उसके पास अपने पैसे का निवेश किया। उनसे प्राप्त लगभग दो करोड़ रुपये उसके द्वारा विक्रेतागणों को अदा किए गए। राम गोपाल त्रिपाठी ने निवेशकों को यह कहकर भड़का दिया कि यह विवादित जमीन है। इसमें लगाया हुआ पैसा डूब जाएगा। साथ ही साथ क्षेत्रीय व्यक्तियों से उक्त जमीन को जोतवा दिया। इससे निवेशक भड़क गए और उन्होंने उन्हें बंधक बनाकर मारपीट की। इसके साथ ही पैसा वापस करने के लिए दबाव बनाया। छूटने पर भागकर लखनऊ आ गया और छिपछिपाकर रहने लगा। इसी दौरान निवेशकों ने उसके भाई सुरेश जो कि मेंहदावल के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र है, का अपहरण कर पिटाई की। पैसा वापस कराने का दबाव बनाया। परिणास्वरूप उसके भाई सुरेश द्वारा रामगोपाल त्रिपाठी सहित अन्य के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा थाना मेहदावल में पंजीकृत कराया गया। रामगोपाल त्रिपाठी द्वारा उसका पारिवारिक, व्यावसायिक व सामाजिक जीवन समाप्त कर दिया गया था। इसलिए उसकी हत्या करने की योजना तैयार कर सन्तकबीरनगर निवासी अपने साथी सोमनाथ सोलंकी व सूरज सिंह को तैयार किया। योजना के तहत पांच सितंबर को सोमनाथ व सूरज सिंह लखनऊ पहुंच गए। जिनके साथ कार से गोसाईगंज इन्दिरा नहर की पटरियों पर कई किलोमीटर रेकी कर प्लान तैयार हुआ। इसके बाद रामगोपाल त्रिपाठी को एससीएसटी एक्ट के मुकदमे में समझौता के लिए लखनऊ बुलाया। कार से प्लाट दिखाने के बहाने इन्दिरा नहर पर ले जाया गया। सुनसान स्थान पर गमछे से तीनों ने मिलकर रामगोपाल त्रिपाठी का गला घोंट दिया। वहां से करीब 12 किलोमीटर आगे अचली खेड़ा बैराज को पार करने के बाद तीनों ने मिलकर लाश को इन्दिरा नहर में फेंक दी। उसके बाद गोमतीनगर वापस आ गए। जहां कार उसने रामगोपाल त्रिपाठी की कार को ट्रांसपोर्टनगर की सुनसान सड़क पर खड़ी कर चाबी दूर नाले में फेंक दी। सोमनाथ सोलंकी ने चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचकर दो अलग-अलग रेलगाड़ियों के डिब्बों में मृतक के मोबाइल रख दिए।

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