December 2, 2020

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

संपादकीय: लड़कियों की लिए मुश्किल

सच के साथ |सोशल मीडिया स्त्रियों के लिए एक प्रतिकूल जगह है, ऐसी शिकायतें पहले भी आई थीं। अब एक ताजा सर्वे से यह सामने आया है कि ऑनलाइन दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के कारण लड़कियां सोशल मीडिया छोड़ने को मजबूर हो रही हैं। सोशल मीडिया को लेकर किए गए इस अध्ययन में कहा गया कि 58 प्रतिशत से अधिक लड़कियों ने किसी ना किसी प्रकार के दुर्व्यवहार का सामना किया है। इस सर्वे को प्लान इंटरनेशनल नामक संस्था ने कराया। इसमें 15-25 वर्ष उम्र की 14,000 लड़कियों को शामिल किया गया। सर्वे ब्राजील, अमेरिका और भारत समेत 22 देशों की लड़कियों के बीच कराया गया। सामने आया कि सोशल मीडिया पर महिलाओं पर कटाक्ष या अभद्र टिप्पणियां करने की घटनाएं आम बात हैं। फेसबुक पर हमले की घटनाएं सबसे आम हैं, जहां 39 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

इंस्टाग्राम पर 23 फीसदी, व्हाट्सऐप पर 14 फीसदी, स्नैपचैट पर 10 फीसदी, ट्विटर पर 9 फीसदी और टिक टॉक पर 6 प्रतिशत महिलाओं ने दुर्व्यवहार या उत्पीड़न का अनुभव किया। अध्ययन में पाया गया कि इस तरह के हमलों के कारण हर पांच लड़कियों में से एक ने सोशल मीडिया साइट का इस्तेमाल या तो बंद कर दिया या फिर सीमित कर दिया। सोशल मीडिया पर निशाने पर आने के बाद हर दस लड़कियों में से एक ने सोशल मीडिया पर अपने आपको जाहिर करने के तरीके में बदलाव कर लिया। सर्वे में शामिल 22 फीसदी लड़कियों ने कहा कि वे या फिर उनकी दोस्तों को शारीरिक हमले का भय था। सर्वे में शामिल लड़कियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर हमले के सबसे सामान्य तरीके में अपमानजनक भाषा और गाली शामिल है। 41 फीसदी लड़कियों ने कहा कि बॉडी शेमिंग और यौन हिंसा की धमकियां उन्हें झेलनी पड़ीं। सामने आया कि अल्पसंख्यकों पर जुबानी हमले, नस्लीय दुर्व्यवहार और एलजीबीटी समुदाय से जुड़ी लड़कियों का उत्पीड़न बहुत आम है। जानकारों के मुताबिक इस तरह के हमले शारीरिक नहीं होते हैं, लेकिन वे अक्सर लड़कियों की अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खतरा होते हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम का कहना है कि वे दुर्व्यवहार से जुड़ी रिपोर्ट की निगरानी करते हैं। परेशान करने वाली सामग्री की पहचान कर कार्रवाई करते हैं। ट्विटर का भी कहना है कि वह ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करता है, जो अपमानजनक सामग्री की पहचान कर सके और उसे रोक सके। लेकिन यह साफ है कि ये दावे खोखले हैं। इन कंपनियों के उपाय अप्रभावी हैं।

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