September 27, 2022

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साइबर क्राइम से लगती है साल में इतनी वैश्विक चपत, रिपोर्ट में हुआ चौकाने वाला खुलासा

साइबर क्राइम के पूरी दुनिया में इस तरह पैर पसरे हुए है,इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। इस बात का खुलासा करते हुए एक रिपोर्ट सामने आयी जिससे पता चलता है की सिर्फ साइबर क्राइम पर ही दुनिया भर को कितनी वैश्विक चपत लगती है। दिन प्रतिदिन बढ़ते साइबर अपराध की रिपोर्ट चौकाने वाली है।
आपको बता दे की ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी फर्म मैकएफी और सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआइएस) ने इकोनॉमिक इंपैक्ट ऑफ साइबरक्राइम-नो स्लोइंग डाउन नामक रिपोर्ट में यह दवा किया गया है की दुनियाभर में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध से सालाना 600 अरब डॉलर की वैश्विक चपत लगती है। बताते चले की साइबर अपराध से वैश्विक अर्थव्यवस्था में सालाना लगने वाली छह सौ अरब डॉलर की रकम 80 देशों की अर्थव्यवस्था के बराबर है। इन देशों में मालदीव, ग्रीनलैंड, भूटान, अफगानिस्तान, जिम्बॉब्वे, अफगानिस्तान समेत कई अफ्रीकी देश शामिल हैं।
इस रिपोर्ट की सूचि में भारत को सातवां स्थान मिला है। वर्ष 2017 में होने वाले 53,000 साइबर हमले का करीब 40 फीसद शिकार भारत का फिनांश सेक्‍टर रहा। इसे देखते हुए एक रिपोर्ट में भारत को वेब एप्लिकेशन अटैक (डब्ल्यूएए) के लिए लक्षित देशों की सूची में सातवें स्थान पर रखा गया है। हैकरों का सबसे पसंदीदा निशाना बैंक, इनवेस्टमेंट एजेंसी और बीमा कंपनियां हैं।सिक्‍योरिटी संबंधित घटनाएं जैसे फिशिंग, वेबसाइट घुसपैठ, वायरस और रैनसमवेयर ने भारत में तेजी से बढ़ते बैंकिंग, फिनांश सर्विसेज एंड इंश्‍योरेंस को निशाना बनाया है। कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क सर्विसेज अकामाई टेक्‍नोलॉजीज की रिपोर्ट ने कहा- इससे मजबूत इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर व साइबर सिक्‍योरिटी के लिए रोडमैप नियोजन की वारंटी मिल रही है।

रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में साइबर अपराध फैलाने के लिए साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उन्हें साइबर अपराध करने में मदद मिल रही है। वे तकनीक की मदद से लाखों लोगों को एक साथ रैनसमवेयर (फिरौती) हमले कर अपनी चपेट में ले रहे हैं।रैनसमवेयर हमले स्वचालित होते हैं। इसके द्वारा अपराधी क्रिप्टोकरेंसी में फिरौती मांगते हैं। इससे उनके पकड़े जाने का डर भी नहीं रहता है।

रिपोर्ट के अनुसार साइबर क्राइम के मामले में रूस सोची में सबसे आगे है। रूस सबसे अधिक वित्तीय संस्थानों को साइबर अपराध के जरिये निशाना बनाता है। इसके पीछे पश्चिमी देशों के कानूनों को धता बताने और रूसी हैकरों की कुशलता है। इस सूची में दूसरे नंबर पर उत्तर कोरिया का स्थान है। आपको यह जान कर हैरानी होगी की वह साइबर अपराध से प्राप्त रकम और क्रिप्टोकरेंसी यानी ऑनलाइन वर्चुअल मुद्रा को अपने शासन को सशक्त बनाने में इस्तेमाल करता है। 2017 में दुनियाभर में हुए वन्नाक्राई रैनसमवेयर साइबर हमले में भी अमेरिका की जांच में उत्तर कोरिया को ही आरोपी ठहराया गया था। रूस और उत्तर कोरिया के अलावा साइबर क्राइम करने वाले देशों में ब्राजील, भारत और वियतनाम का नाम भी है। वहीं चीन साइबर जासूसी में अव्वल है।

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