December 5, 2020

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सिद्धार्थनगर: आत्मा योजना अन्तर्गत किसान खरीफ गोष्ठी का हुआ आयोजन

सिद्धार्थनगर |कृषि विभाग द्वारा संचालित सब मिशन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा)योजना अंतर्गत जनपद सिद्धार्थनगर के विकास खंड डुमरिया गंज में ग्राम भानपुर रानी में खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन ग्रामीण बाल विकास एवम् प्रशिक्षण संस्थान तुरकौलिया बस्ती द्वारा आयोजित किया गया। गोष्ठी में के बी के ओ सोहना के वैज्ञानिक डाक्टर एस के मिश्रा ने किसानों को धान में लगे हल्दिया रोग के रोकथाम हेतु बीजो को उपचारित करके नर्सरी डालने की सलाह दी।तथा उसके उपचार भी बताए। तथा पराली को न जलाकर उसको सड़ा कर खाद बनाने की विधि बताए।

डाक्टर राघवेन्द्र चौधरी ने किसानों को सब्जी की खेती करके किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए तरीके बताए। सहायक विकास अधिकारी कृषि रंगी लाल गुप्ता ने कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से अवगत कराया। गोष्ठी में हरिंद्र कुमार,राजकिशोर, चौधरी ,राहुल सिंह गौरव कांबोज सत्यराम मौर्य विश्वनाथ श्रीवास्तव सहित सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।

जानें ! कैसे ‘आत्मा योजना’ किसानों की कमाई दोगुनी करेगी

अगर फसल का उत्पादन अच्छा है तो किसानों के लिए उनकी मेहनत रंग लायी लेकिन अगर अच्छा नहीं हुआ, तो किसानों के लिए मुश्किल बढ़ा सकता है. ऐसे में यह बहुत ज़रूरी है कि अच्छा उत्पादन हो जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमा सकें. अब बात आती है कि यह कैसे हो ? इसका जवाब यह है कि किसान आधुनिक खेती को अपनाएं. इसके साथ ही खेती से जुड़ीं सभी तकनीक की जानकारी लें और उसके ज़रिए फसल उत्पादन करें. किसानों के लिए ही उनकी आय को बढ़ाने की कोशिश में सरकार भी समय-समय पर नई योजनाएं लाती रहती है. इन्हीं में से एक “आत्मा योजना” (AtmaYojna) भी है.
आत्मा स्कीम (Atma Scheme) की बात करें तो इसके तहत किसानों को खेती जुड़ी हर एक नई तकनीक की जानकारी दी जाती है. इसके साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता हैं जिससे वे उस जानकारी का सही तरह से उपयोग कर सकें. इतना ही नहीं, खेती में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों को भी किसानों को उपलब्ध कराया जाता है. इस तरह सभी तरह की जानकारी के साथ उन्हें उन्नत खेती के गुण सिखाए जाते हैं जिससे वे एक प्रगतिशील किसान बन सकें.

महिला किसान भी बनें आत्मनिर्भर

इस योजना के तहत महिला किसानों को भी आगे लाया जा रहा है और खेती की सभी जानकारी देकर उन्हें भी प्रशिक्षित किया जा रहा है. महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें व्यवसाय से जुड़ने के भी मौके दिए जाते हैं. इसके लिए कृषि विभाग की कृषि तकनीकी अभिकरण (आत्मा) योजना एक बड़े मंच के तौर पर सामने आ सकती है. महिला किसान के एक समूह में 10 महिलाओं का होना ज़रूरी है.

इन क्षेत्रों में दिया जा रहा प्रशिक्षण

Agriculture technology management agency (ATMA) के ज़रिए किसानों को खेती-बाड़ी के साथ दुग्ध उत्पादन, पशुपालन के साथ कई और क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाता है. आपको बता दें कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती से भी अवगत कराना है, जिसके बारे में अभी भी कुछ किसान नहीं जानते हैं. वैज्ञानिक खेती की मदद से किसान अपनी फसल की अच्छी और सही देखभाल कर ज़्यादा पैदावार पा सकते हैं और अपनी आय में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं. किसानों को जानकारी और प्रशिक्षण देने के लिए वैज्ञानिकों को बुलाया जाता है. ये कृषि विशेषज्ञ आधुनिक खेती के बारे में बताते हैं. हर प्रशिक्षण के लिए पांच हजार से पांच लाख रुपये तक की धनराशि निर्धारित की गयी है. इसके साथ ही महिला किसानों के लिए समूहों को विभाग की तरफ से धन उपलब्ध कराया जाता है जिससे वे अपना रोज़गार शुरू कर सकें. कराकर उनको रोजगार देने का अवसर प्रदान किया जाएगा.

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