July 7, 2022

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हाईवे गिरवी रखकर कर्ज लेगी सरकार, टोल रेवेन्यू से कमाई कर चुकाएगी लोन

नई दिल्ली:केंद्रीय सड़क परिवहन के अंतर्गत काम करने वाली संस्थानेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) लोन लेने के नए मॉडल के साथ आया है। इसके तहतहाईवे को गिरवी रखकर बैंकों से हाईवे निर्माण के लिए लोन लिया जाएगा। इस तरह की डील कोएजेंसी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ साइन कर रही है। डील के तहत एसबीआई हाईवे की कुल लागत का 80 प्रतिशत फंड मुहैया कराएगी। बाकी 20 प्रतिशत फंड एनएचएआई को खुद इकट्ठा करना होगा।देश में राजमार्गों व सड़कों का निर्माण करने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कर्ज के बोझ तले दब गया है। अथॉरिटी की इस स्थिति के बाद मोदी सरकार ने उसे पत्र लिखकर राजमार्गों के निर्माण पर रोक लगाने को कहा था।

खबर के अनुसार पीएमओ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से इस बारे में एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। पीएमओ ऑफिस का यह निर्णय पीएम मोदी के पहले कार्यकाल के बिल्कुल विपरीत है। मालूम हो कि पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश में हाईवे के तेजी से निर्माण के लिए एनएचएआई की तारीफों के पुल बांध रही थी। सरकार का कहना था कि प्राधिकरण ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने में मदद की है।

 

एसबीआईकैप सिक्योरिटीज लिमिटेड के अनुसार मौजूदा समय में एनएचएआई पर 1.8 खरब रुपये का कर्ज है। प्राधिकरण की तरफ से इस कर्ज पर 140 अरब रुपये ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। जबकि प्राधिकरण को विभिन्न राजमार्गों पर टोल के रूप में 100 अरब रुपये की कमाई करती है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के विश्लेषक रोहित नटराजन के अनुसार प्राधिकरण पर वित्त वर्ष 2020 में 56 अरब रुपये, वित्त वर्ष 2021 में 66 अरब रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 47 अरब रुपये की कर्ज देयता होने का अनुमान है।

जानकारों का कहना है कि कर्ज बढ़ने पर प्राधिकरण को सड़क निर्माण परियोजनाओं को धीमा करना पड़ेगा या फिर सरकार आर्थिक विकास में गति के लिए प्राइवेट साझेदारों पर निर्भर होगी। सड़क निर्माण करने वाली कई निजी कंपनियां भारी निवेश के कारण बीओटी प्रोजेक्ट में रुचि नहीं दिखाती हैं। लेकिन अब सरकार कर्ज लेकर Nhai की स्थिति सुधारने की कोशिश में लगी है।

 

15 साल में चुकाना होगा कर्ज:-
हाईवेटोल और अन्य माध्यमों से होने वालीआय से एजेंसी स्टेट बैंक के कर्ज को अगले 15 साल में चुकाएगी। लोन लेने के इस नए मोड कोसिक्योरिटाइजेशन मॉडल कहा गया है। यह मॉडल एक हाउसिंग लोन की तरह काम करेगा। बैंक भी आमतौर पर लोगों को प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 80 प्रतिशत कर्ज मुहैया कराते हैं। बाकी फंडबॉयर को खुद इकट्ठा करना होता है। एनएचएआई को लोन देने के इस तरह के मॉडल को अभी केवल एसबीआई ने स्वीकार किया है। हालांकि जल्द ही अन्य बैंक इस मॉडल में शामिल हो सकते हैं।

 

ज्यादा से ज्यादा बैंक लोन देने को आएंगे आगे
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल एसबीआई की तरफ से एनएचएआई 10 साल के लिए 25 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया गया था। इसके प्रिसिंपल लोन की अदायगी तीन साल बाद शुरु हुई थी और यह लोन अनसिक्योर्ड था। हालांकि इस नई सिक्योर्ड योजना के तहत अब ज्यादा से ज्यादा बैंक एनएचएआई को लोन देने के लिए आगे आएंगे। बता दें कि लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से भी एनएचआई को 25 करोड़ रुपए लोन देने का ऑफर दिया गया है।

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