अच्छी सोच

मोबाइल फोन और मोबाइल टावर के लाभ और नुकसान

मोबाइल फोन आज के समय में सबसे उपयोगी और जरुरी वस्तु हो गई है. दुनिया में आज के समय में हर दुसरे इन्सान के पास मोबाइल फोन है. पहले एक जगह से दूसरी जगह बात करने के लिए चिट्ठियां चला करती थी, फोन में टेलीग्राम हुआ करते थे, जिसमें नंबर लगाकर घंटों, या कई दिन तक इंतजार के बाद बात हो पाती थी. फिर कुछ समय बाद घर में फोन आ गया, जिसे लैंडलाइन कहा गया. लैंडलाइन के द्वारा देश, विदेश में सब जगह बात होने लगी. फिर कुछ समय बाद विज्ञान ने और तरक्की की और वायरलेस फोन का निर्माण हुआ, जिसे मोबाइल कहा गया. विज्ञान के क्षेत्र में मोबाइल ने अविस्मरणीय काम किये है.

मोबाइल आज के समय में मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन है. मोबाइल फोन एक ऐसी चीज है, जो इन्सान के साथ चोबीस घंटे रहती है. यह आज के समय में सबकी आदत बन गई, जिसे लोग चाह कर भी नहीं छोड़ पाते है. मोबाइल के उपभोक्ता बढ़ रहे है, तो मोबाइल टावर कंपनियां भी बढ़ती जा रही है, जो जगह-2 अपने शहरों के बीच टावर खड़े कर रहे है. ये मोबाइल टावर का मानव जीवन में क्या असर पड़ता है, क्या मोबाइल टावर के दुष्परिणाम है? या सिर्फ ये भ्रम मात्र है. मोबाइल टावर लगाने के नियम, मोबाइल टावर रेडिएशन इफ़ेक्ट क्या है?

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मोबाइल फोन इतिहास (Mobile phone history)

पहला मोबाइल फोन बना 1973
पहला मोबाइल फोन कंपनी मोटोरोला
पहला मोबाइल भारत में 31 जुलाई, 1995

मोबाइल के फायदे (Mobile phone benefits)

मोबाइल है मल्टीटास्किंग – मोबाइल आज सिर्फ बात करने का जरिया नहीं है, इसकी जगह स्मार्टफोन ने ली है. जो मनुष्य की तरह स्मार्टली काम करता है. मोबाइल ने अलार्म घडी की जगह ले ली है, मोबाइल के द्वारा अच्छी से अच्छी फोटो खींच सकते है, विडियो बना सकते है. मोबाइल में तरह तरह के गेम भी होते है, आप इसमें मेल भी चेक कर सकते है. इसे छोटा कंप्यूटर कहा जाता है. ऍफ़ एम् (FM), म्यूजिक प्लेयर, मूवी सब इसमें आसानी से चलती है.
आसान कम्युनिकेशन – बात करने के लिए आज हर कोई छोटा, बड़ा, सस्ता महंगा मोबाइल रखता है. मोबाइल को कभी भी साथ में ले जाया जा सकता है, साथ ही किसी मुसीबत के होने पर इसके द्वारा हम आसानी से किसी से कांटेक्ट कर सकते है.
टेक्नोलॉजी से जुड़ाव – मोबाइल टेक्नोलॉजी का नायाब नमूना है, जो विज्ञान का चमत्कार है. मोबाइल में इन्टरनेट की सहायता से देश दुनिया के बारे में जाना जा सकता है. सोशल मीडिया के द्वारा दूर बैठे, दोस्त, रिश्तेदार से जुड़ा जा सकता है, उनके बारे में हमेशा अपडेट रहती है. मोबाइल जीपीएस नेवीगेशन भी होता है, जिससे हम रास्ता पता कर सकते है. कही किसी जगह भटकने पर मोबाइल हमें सही रास्ता भी दिखा देता है. मोबाइल से एक दुसरे को देखकर बात कर सकते है, विडियो भेज सकते है.
ज्ञान बढ़ता है – पहले किसी चीज को जानने के लिए या तो हम अपने टीचर से पूछते थे, या बड़े या माँ बाप से. पहले ज्ञान किसी के द्वारा या सिर्फ किताब से मिलता था, पुस्तकालय जाकर किताब से ज्ञान लेना होता था, लेकिन अब बात अलग है, अब किसी भी बात को जानने के लिए क्या बच्चा क्या बड़ा सब तुरंत गूगल करते है. मोबाइल में इन्टरनेट के द्वारा हम ज्ञान की बातें, यहाँ वहां की न्यूज़ और भी सब कुछ जान सकते है. बच्चे पुस्तक की बजाय मोबाइल खोलते है. किसी सब्जेक्ट में परेशानी होने पर बच्चे तुरंत अपने दोस्त को फोन करके उसका जबाब पता कर लेते है, और लाइव चैट के द्वारा आमने सामने बैठ पढाई कर लेते है.
मोबाइल है तो सब कुछ है – अगर किसी के पास मोबाइल है मतलब उसके पास सब कुछ है. सुबह वो अलार्म से आपको उठाएगा, इसमें रिमाइंडर के तौर पर जरुरी बातें सेव कर सकते है. यह एक डायरी है, जिसमें नंबर सेव हो जाते है, फोटो और बहुत कुछ सेव हो जाता है. इसमें कैलकुलेटर भी होता है, इसके साथ ही आप किसी चीज की रिकॉर्डिंग भी कर सकते है. मोबाइल एप्प की सहायता से अपने बैंक अकाउंट देख सकते है, घर में cctv कैमरा लगाकर उसका फुटेज भी देख सकते है. मोबाइल में एक दुसरे को फनी मेसेज, जोक्स, विडियो भी भेज सकते है, जिससे लोगों को आजकल थोडा बहुत हंसने का मौका मिल जाता है.

Types of Radiation Hazards
मोबाइल फोन के नुकसान (Mobile phone disadvantages) –

ध्यान भटकाता है –

मोबाइल होने से सारा ध्यान उसी पर लगा रहता है, विद्यार्थी के जीवन में तो ये सबसे अधिक दुष्प्रभाव डालता है. आजकल छोटे से लेकर सभी बच्चे अच्छे से मोबाइल चला लेते, और दिन भर गेम, विडियो चलाते रहते है. बच्चो में इसकी बहुत गन्दी आदत लग रही है, जिससे वे पढाई एवं दूसरी चीजों में ध्यान ही नहीं लगा पाते है. बच्चे बाहर जाकर खेलने की बजाय मोबाइल में ही लगे रहते है. बच्चों को मोबाइल की गन्दी आदत से बचाना चाइये, उनके लिए मोबाइल चलाने का समय निश्चित कर देना चाहिए.
सेहत में नुकसान – लगातार मोबाइल चलाने से आँखों को नुकसान होता है. बच्चे एक टकटकी लगाये गेम खेलते है, जिससे कम उम्र में ही बच्चों की आँखें ख़राब होने की शिकायत आजकल बढ़ती ही जा रही है. एक सर्वे के अनुसार मोबाइल से निकलने वाली किरणें शरीर पर घटक प्रभाव करती है, जिससे बड़ी बड़ी बीमारियों के खतरे बढ़ रहे है. मोबाइल कई बार जानलेवा भी साबित होता है. मोबाइल की बैट्री का आजकल भरोसा नहीं रहता है, और हम इसकी सावधानी पर ध्यान भी नहीं देते है. मोबाइल बैटरी फटने से कई लोग को घातक नुकसान हुए है, जिसकी ख़बरें समाचार पत्र पर आये दिन आती रहती है.
समय का दुरुपयोग – मोबाइल एक गन्दी लत है, जो पड़ जाये तो छुटाना मुश्किल है. लोग आजकल कहते है, जैसे नशा मुक्ति केंद्र होते है, वैसे मोबाइल मुक्ति केंद्र भी होना चाइये. दिनभर मोबाइल में लगे रहने से बच्चे ढंग से पढाई नहीं करते, लोग अपना काम काज छोड़ मोबाइल की दुनिया में लगे रहते है, जिससे समय बर्बाद होता है. लोग मोबाइल को देर रात तक चलाते रहते है, जिससे नींद पूरी नहीं और शारीरिक परेशानियाँ सामने आती है.
अपनों से दूर करता है – मोबाइल में लगे रहने से लोग अपने परिवार से दूर होते जा रहे है. आजकल सभी की आदत होती है, दिन भर काम करके घर लौटकर मोबाइल हाथ में ले लेते है और परिवार वालों के साथ बैठ कर भी किसी और दुनिया में रहते है. कहते है मोबाइल बाहरी दुनिया से तो जोड़ता है, लेकिन अपने आसपास की दुनिया से दूर करता जा रहा है. लोग फॅमिली टाइम को जरुरी नहीं समझते है, लेकिन ये बहुत जरुरी है.
एक्सीडेंट होते है – लोग गाड़ी चलाते समय भी मोबाइल का प्रयोग करते है, जो की बिलकुल गलत है. इससे आये दिन बड़ी बड़ी दुर्घटना की खबर आती है. गाड़ी चलाते वक़्त मोबाइल का प्रयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए, इससे ध्यान भटकता है.
गलत आदतें पड़ रही है – मोबाइल में बहुत सी अवांछित चीजें भी होती है, जिसे बच्चों को नहीं देखना चाहिए. आजकल कम उम्र में ही सबके पास मोबाइल होता है, और फिर वे दुनिया की बातों में आकर गंदे गंदे मेसेज, विडियो एक दुसरे को भेजते है, जिससे बच्चे समय से पहले ही बिगड़ने लगे है.

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मोबाइल टावर क्यों नुकसानदायक है (Mobile Tower Radiation Effects Human Body)

मोबाइल टावर में रेडिएशन होता है, जिससे वे अपने उपभोक्ता के मोबाइल से जुड़ते है. ये रेडिएशन ही मानव के साथ-साथ जीव जंतु के लिए भी नुकसानदायक है. कुछ लोगों का मानना है कि मोबाइल टावर से निकलने वाली विकिरण मनुष्य को जानलेवा बीमारी भी दे सकती है. मोबाइल टावर उपभोक्ता के मोबाइल से विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves) द्वारा जुड़ते है. ये तरंगे अगर एक सिमित अवस्था में है तो कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन अधिकता से इसके दुष्परिणाम सामने आते है. टावर कंपनी उपभोक्ता अधिक होने पर, अपने टावर की संख्या नहीं बढाती, बल्कि वे अपने पहले से इनस्टॉल टावर में अधिक उपभोक्ता को जोड़ देती है, जिससे उस टावर के आसपास अधिक विद्युतचुम्बकीय तरंगें एक घना जाल जैसा बना लेती है. फिर जो इसके आसपास आता है, उसे किसी न किसी रूप में वो नुकसान देने लगती है.

मोबाइल टावर कैसे नुकसान पहुंचाता है

मोबाइल टावर के 100 मीटर के दायरे में विकिरण का प्रभाव 100 गुना होता है. मोबाइल टावर में जितने अधिक एंटीना होते है, वो टावर उतना ही अधिक लोगों को नुकसान पहुंचाता है. वहां रेडिएशन सबसे अधिक होता है. टावर के 300 मीटर के अंदर आने वाले सभी लोगों को इसका दुष्परिणाम देखने को मिलता है. इन रेंज में आने वाले लोगों में अलग अलग समस्या देखने को मिलती है.

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मोबाइल टावर के दुष्परिणाम (Mobile Tower Radiation Side Effects)

मनुष्य के दिमाग में असर करता है – रिपोर्ट के अनुसार जो लोग मोबाइल टावर के आसपास रहते है, उसके संपर्क में अधिक आते है, उन्हें सर दर्द, ट्यूमर, माइग्रेन की समस्या अधिक होती है. कुछ लोगों को भूलने की बीमारी, याददाश्त खो जाना जैसी समस्या ये भी गुजरना पड़ता है.
कैंसर – कुछ लोगों का मानना है कि मोबाइल टावर मानव शरीर में कैंसर के सेल्स बनाने में भी मदद करते है, लेकिन इस पर अभी जांच पड़ताल चल रही है. ये कितना सही है, कितना गलत अभी नहीं कहा जा सकता.
बच्चों पर बुरा असर – मोबाइल टावर विकिरण का बच्चों पर भी बहुत बुरा असर होता है. आँखों में जलन, आँखों से पानी आना, सर दर्द, चिड़चिड़ाहट आदि समस्याएं सामने आती है. बच्चों का इन विकिरण के पास अधिक खतरनाक है, क्यूंकि आगे चलकर ये समस्याएं उनके लिए अधिक मुसीबत बन जाएँगी. बच्चों में ध्यान केंद्रित करने में भी समस्या होती है, जिससे उनकी पढाई पर असर पड़ता है.
जीव जंतु पर असर – मोबाइल टावर मनुष्यों के साथ-साथ पशु पक्षी के लिए भी बहुत खतरनाक है. पक्षी इन मोबाइल टावर से निकलने वाली विकिरण से दूर रहते है, क्यूंकि वो जब इसके संपर्क में आते है, उनकी मृत्यु हो जाती है. आजकल हमारे घर के आस-पास नाम मात्र को चिड़िया या कोई भी अन्य पक्षी देखने को मिलते है, हम खुद ही इस बात के गवाह है. शहरों के बीच में ये मोबाइल टावर खड़े हो रहे है, जिससे पक्षी शहरों में अपना बसेरा छोड़ चुके है, वो ऐसे हिस्सों में रहना पसंद करते है, जहाँ मोबाइल विकिरण न हो. मधुमक्खियों में इसका असर बहुत गहरा दिख रहा है, उनके अंदर प्रजनन की समस्या भी हो रही है.
पेड़ों के लिए नुकसान – कुछ अध्ययन में पाया गया है कि मोबाइल टावर रेडिएशन पेड़ों के लिए भी अच्छी नहीं है. मोबाइल टावर एंटीना के सीधे संपर्क में आने से पेड़ों के ऊपरी हस्से सुख जाते है. उनका विकास उतनी गति से नहीं होता, जितना होना चाहिए.
गर्भवती महिलाओं पर बुरा असर : इसके विद्युतीय विकिरण का प्रभाव गर्भ पर भी बुरा पड़ता हैं, जिससे भ्रूण कमजोर हो सकता हैं और गर्भपात भी हो सकता हैं.
अन्य समस्या – मनुष्यों में इसकी वजह से अनिंद्रा (नींद न आने की बीमारी), तनाव, चिड़चिड़ाहट होना, पाचन में समस्या, धड़कन बढ़ना, बहरापन, बाँझपन आदि.
सरकार का इस विषय पर कहना है कि मोबाइल टावर से मनुष्य को कोई नुकसान नहीं है. इसकी जांच चल रही है, इसलिए किसी भी टिपण्णी पर हामी भरना गलत होगा. दरअसल ग्वालियर के एक आदमी ने अपने घर के पास लगे टावर को हटाने के लिए याचिका दर्ज की है, उनका कहना है कि टावर की वजह से ही उन्हें कैंसर हो गया है. इस पर दूरसंचार मंत्री ने बैठक की और जाँच के आदेश दिए है. संचार मंत्री मनोज सिन्हा का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य संसथान में शोध हुए है, जिसके परिणाम के अनुसार मानव शरीर में मोबाइल टावर रेडिएशन का कोई असर नहीं होता है. लेकिन इस पर अभी विश्व स्तर पर और गहरी जांच हो रही है.

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मोबाइल टावर रेडिएशन की ऑनलाइन जाँच (How can I check my mobile radiation level?)

सरकार ने इस समस्या का एक हल भी निकाला है. कई कंपनी सरकार के नियमों का उलंघन करते हुए, इन टावर्स को गलत जगह खड़ा कर देते है. मोबाइल टावर से इलेक्ट्रोमेग्नेटिक रेडिएशन निकलती है, जिसे इएम्ऍफ़ एमिशन (EMF Emissions) कहते है. इसकी शिकायत के लिए के पोर्टल बनाया गया है. आप अपने घर के पास बने मोबाइल टावर की शिकायत ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा कर सकते है, आप इस पोर्टल के द्वारा यह भी चेक करवा सकते है कि आपके करीब का मोबाइल टावर सुरक्षित है की नहीं.

दूरसंचार विभाग एवं संचार मंत्रालय ने तरंग संचार नाम का एक पोर्टल लांच किया है, जिसमें जाकर आप मोबाइल टावर सम्बन्धी शिकायत कर सकते है. बहुत से अध्ययन के बाद भी सभी के अंदर इसको लेकर भ्रम बना हुआ है, इसीलिए सरकार इस पोर्टल के द्वारा सही जानकारी पहुंचाएगी. लोगों में जो भी गलत अवधारणा प्रचलित है, उसे इस पोर्टल के द्वारा विराम मिलेगा.

कैसे करें तरंग पोर्टल में शिकायत (Tarang Online Portal)

सबसे पहले तरंग संचार ऑनलाइन पोर्टल खोलें. यहाँ अपने एरिया, जहाँ आप रहते है, उसे डालें.
आप जीपीएस सिस्टम ऑन करके अपने एरिया की जानकारी आटोमेटिक भी दे सकते है. इसके बाद इएम्एफ ओवरव्यू (EMF Overview) पर क्लिक करें. यहाँ अपनी पर्सनल जानकारी भरें और सबमिट करें, आपकी मेल आईडी पर ओटीपी आएगा, जिसे भरने के बाद आपके शहर के सारे टावर आपको स्क्रीन पर दिखाई देंगें.
किसी एक टावर पर क्लिक कर के आप ये पता कर सकते है, कि यह सरकारी नियमों के अनुसार लगा है या नहीं और सुरक्षित है या नहीं.
इसके अलावा अगर आप ईएमएफ एमिशन (EMF Emissions) की और गहराई से सही जानकारी चाहते है तो 4000 रूपए देकर आप इसकी जांच करवा सकते है.
मोबाइल टावर सुरक्षित है या जानलेवा ये तो क्लियर नहीं है, लेकिन कई लोग जो इसके करीब रहते है, उन्हें महसूस हुआ है कि उन्हें बहुत सी समस्याएं इसकी वजह से ही हो रही है. आने वाले में दिनों शोध से और भी सही रिजल्ट सामने आ सकते है.

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