अच्छी सोच

गिरगिट भी रंग बदलने मे घबराता है, जब उसका मुकाबला इंसान से हो जाता है;

मानव की उत्पत्ति कैसे हुई ,विकासवाद कहलाने वाले डार्विन के सिद्धांत से या भिन्न भिन्न धर्मों के सिद्धांत से ये तो कोई निश्चित नहीं है लेकिन इंसानों के रंग बदलती आदतों (Cheating) को देखकर यही लगता है कि गिरगिट की आदतें इंसानों से ज्यादा मिलती जुलती है। शायद इसीलिए मानव में गिरगिटो का अंश डार्विन वाले बंदरों से अधिक है।

देख कर शर्मिंदा है गिरगिट भी फ़न इंसान का ,
नादान खुद को शाह-ए-शातिर समझता था. . .

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ग़ुरूर गिरगिटों का इंसान पकड़ने लगा है
ज़मीर पर रंग “गुलाबी” जो चढ़ने लगा है …..

गिरगिट सा रंग बदलता है
और साँप सा डसता है
हर इंसान के अंदर भी
एक चिड़ियाघर बसता है

पल में अक्सर बदल जाता है मौसम l
पल में अक्सर बदल जाता है इंसान ll
यू ही बदनाम है गिरगिट रंग बदलने मे l
रंग तो अक्सर बदलता है , ये इंसान ll

जो दिखता है, वो वैसा होता नही l
जो होता है , वो हमे दिखता नही ll
मन में क्या छुपा हैं,ये हमे पता नही l
जो सोचे वैसा हो,ये ज़रूरी तो नही ll

पल में माशा और पल में तोला l
पल में सब कुछ बदल जाता हैं ll
मानते हो जिसको दिल से अपना l
कभी-कभी वो भी बदल जाता हैं ll

बदलना हैं तो आपनी सोच बदलो l
अच्छी सोच तुम्हे आगे ले जायेगी ll
तुमको तो उससे खुशी मिलेगी ही l
दुसरो को भी वो खुशी दे पायेगी ll

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जैन स्थानक में दिवाकर अनुपम मुनि जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला इंसान अपने जीवन में कभी सुखी नहीं रहता। वह अपनी आदतों से कभी खुश और कभी परेशान दिखाई देता है। ऐसे व्यक्ति के पास अगर कोई पैसे देने वाला ग्राहक आ जाए तो वह खुश हो जाता है। अगर इससे कोई पैसा लेने वाला आ जाए तो वह परेशान हो जाता है। अगर कोई दुकानदार इस स्वभाव का है और उससे चार ग्राहक सामान खरीदने के लिए आता है तो वह खुश हो जाता है। अगर पड़ोसी की दुकान पर एक भी ग्राहक आ जाए तो परेशान हो जाता है। ऐसे व्यक्ति के ससुराल से कोई आ जाए तो वह खुश होकर उसके आवभगत में लग जाता है मगर उसकी बहन-बहनोई आ जाए तो वह दुखी रहने लगता है।। मुनि ने कहा कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला इंसान सच-झूठ, बुरे-भले और ऊंच-नीच को समझने में कोई फर्क नहीं करता है। उसे जो अ’छा लगता है उसी के अनुसार वह अपने को ढाल लेता है। एक दिन ऐसा व्यक्ति परिवार और समाज में भी अपनी प्रतिष्ठा गवां देता है। मुनि ने कहा कि इंसान को जीवन में एक ही निर्णय लेकर चलना चाहिए।

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और ये भी सत्य है कि:-

कौन अच्छा है इस ज़माने में
क्यूँ किसी को बुरा कहे कोई

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ऐ इंसान !!
सीख लिया गिरगिट की तरह रंग बदलना,
कुत्तों से थोड़ी वफादारी भी सीखी होती;
जिन्दगी निभाने के नाम पे कर चुके सारे ओछे कर्म,
असली वाली थोड़ी दुनियादारी भी सीखी होती |

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