इतिहास

आजादी (1947) से पहले बस्ती जिला किस रियासत में था?

 

अयोध्या से सटा यह जिला प्राचीन काल में कोशल देश का हिस्सा था। रामचंद्र राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र थे जिनकी महिमा कौशल देश में फैली हुई थी जिन्हें एक आदर्श वैध राज्य, लौकिक राम राज्य की स्थापना का श्रेय जाता है। परंपरा के अनुसार राम के बड़े बेटे कुश कौशल के सिहासन पर बैठे जबकि छोटे लव को राज्य के उत्तरी भाग का शासक बनाया गया जिसकी राजधानी श्रावस्ती थी। इक्ष्वाकु से 93वीं पीढ़ी और राम से 30 वीं पीढ़ी में बृहद्वल था। यह इक्ष्वाकु शासन के अंतिम प्रसिद्ध राजा थे,जो महाभारत युद्ध में चक्रव्यूह में मारे गए थे। भगवान बुद्ध के काल में भी यह क्षेत्र शेष भारत से अछूता न रहा। कोशल के राजा चंड प्रद्योत के समय यह क्षेत्र कोशल के अधीन रहा। गुप्त काल के अवसान के समय समय यह क्षेत्र कन्नौज के मौखरी वंश के अधीन हो गया। 9वीं शताब्दी में यह क्षेत्र फिर पुन: गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट के अधीन हो गया। 1225 में इल्तुतमिश का बड़ा बेटा नासिर उद दीन महमूद अवध का गवर्नर बन गया और इसने भार लोगों के सभी प्रतिरोधों को पूरी तरह कुचल डाला। 1479 में बस्ती और आसपास के जिले जौनपुर राज्य के शासक ख्वाजा जहान के उत्तराधिकारियों के नियंत्रण में था। बहलूल खान लोधी अपने भतीजे काला पहाड़ को इस क्षेत्र का शासन दे दिया। उस समय महात्मा कबीर,प्रसिद्ध कवि और दार्शनिक इस जिले के मगहर में रहते थे।

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अकबर और उनके उत्तराधिकारी के शासनकाल के दौरान बस्ती अवध सूबे गोरखपुर सरकार का एक हिस्सा बना हुआ था। 1680 में मुगलकाल के दौरान औरंगजेब ले एक दूत काजी खलील उर रहमान को गोरखपुर भेजा था। उसने ही गोरखपुर से सटे सरदारों को राजस्व भुगतान करने को मजबूर किया था। अमोढ़ा और नगर के राजा को जिन्होंने हाल ही में सत्ता हासिल की थी राजस्व का भुगतान करने को तैयार हो गए। रहमान मगहर गया,यहां उसने चौकी बनाई और राप्ती के तट पर बने बांसी राजा के किले को कब्जा कर लिया। नवनिर्मित जिला संतकबीरनगर का मुख्यालय खलीलाबाद शहर का नाम खलील उर रहमान से पड़ा,जिसका कब्र मगहर में मौजूद है। उसी समय गोरखपुर से अयोध्या सड़क का निर्माण हुआ था।

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एक महान और दूरगामी परिवर्तन तब आया जब 9 सितंबर 1772 में सआदत खान को अवध सूबे का राज्यपाल नियुक्त किया गया जिसमें गोरखपुर का फौजदारी भी था। उस समय बांसी और रसूलपुर पर सर्नेट राजा का,बिनायकपुर पर बुटवल के चौहान का,बस्ती पर कल्हण शासक का,अमोढ़ा पर सूर्यवंश का नगर पर गौतम का,महुली पर सूर्यवंश का शासन था। अकेले मगहर पर नवाब का शासन था। मुस्लिम शासन काल में यह क्षेत्र कभी जौनपुर तो कभी अवध के नवाबों के हाथ रहा। अंग्रेजों ने मुस्लिमों से जब यह इलाका प्राप्त किया तो गोरखपुर को अपना मुख्यालय बनाया। शासन सत्ता सुचारू रूप से चलाने और राजस्व वसूली के लिए अंग्रेजों ने 1865 में इस क्षेत्र को गोरखपुर से अलग किया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास छावनी के अमोढ़ा में आज भी बिखरा पड़ा है जहां राजा जालिम ¨सह व महारानी तलाश कुंवरि की शौर्य गाथा गर्व से सुनी और सुनाई जाती है। महात्मा गांधी के आंदोलन से लगायत देश के आजाद होने तक यह क्षेत्र सदैव सक्रिय रहा।

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इतिहास के झरोखे में

1801 में बस्ती तहसील मुख्याल बना

6 मई 1865 को गोरखपुर से जनपद मुख्यालय बना

1988 में उत्तरी हिस्से को काटकर सिद्धार्थनगर जिला बना

1997 में पूर्वी हिस्से को काटकर संतकबीरनगर जिला बना

जुलाई 1997 में बस्ती मंडल मुख्यालय बना

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गायत्री शक्तिपीठ बस्ती

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ऋषि वशिष्ठ जिनके नाम पर जिले का नाम बदलने की हो रही है मांग।

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बस्ती की शान वीरांगना रानी तलासकुवरि

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छावनी शहीद स्मारक जहां सैकड़ों लोगों को एक साथ अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था।

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