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जिस सॉफ्टवेयर से हैक हुआ WhatsApp, उसकी कीमत 56 करोड़ से भी ज्यादा

जिस सॉफ्टवेयर से हैक हुआ WhatsApp, उसकी कीमत 56 करोड़ से भी ज्यादा

व्हाट्सएप के जरिए भारत समेत दुनियाभर के 1,400 पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की जासूसी हुई है। इसकी जानकारी व्हाट्सएप ने खुद अमेरिकी फेडरल कोर्ट में दी है। व्हाट्सएप ने इजरायल की एनएसओ नाम की कंपनी पर पिगासस सॉफ्टवेयर (स्पाईवेयर) के जरिए जासूसी करने का आरोप लगाया है। व्हाट्सएप ने अपने एक बयान में कहा है कि व्हाट्सएप एप के कॉलिंग फीचर में एक कमी के कारण यह जासूसी हुई है। अब सवाल यह है कि पिगासस सॉफ्टवेयर है क्या, इसके लाइसेंस की कीमत क्या है, यह क्या-क्या कर सकता है, इसकी मदद से कौन-कौन सी डिवाइस हैक हो सकती है? आइए जानते हैं…

 

 
56 करोड़ से भी अधिक है पिगासस सॉफ्टवेयर की कीमत
इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिगासस (Pegasus) सॉफ्टवेयर की कीमत 7-8 मिलियन डॉलर यानी करीब 56 करोड़, 56 लाख, 40 हजार रुपये है। इस कीमत में पिगागस सॉफ्टवेयर का एक साल के लिए लाइसेंस मिलता है। एक लाइसेंस पर आप एक साल में 500 फोन को मॉनिटर कर सकते हैं। पिगासस के जरिए एक बार में 50 मोबाइल फोन पर पल-पल नजर रखी जा सकती है। पिगासस सॉफ्टवेयर यूजर की परमिशन के बिना उसके फोन को ऑफ/ऑन के अलावा फॉर्मेट भी मार सकता है। व्हाट्सएप हैकिंग मामले में हैकर्स ने लोगों को निशाने पर लेने के लिए अलग-अलग नंबर्स से अकाउंट्स बनाए थे जो कि ब्राजील, इजरायल, स्वीडन और इंडोनेशिया जैसे देशों में एक्टिव थे। व्हाट्सएप को हैक करने के लिए पिगासस ने व्हाट्सएप के सर्वर का इस्तेमाल किया।

 

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पिगासस जैसे खतरनाक सॉफ्टवेयर को किसने तैयार

पिगासस सॉफ्टवेयर को इजरायल की एनएसओ नाम के एक ग्रुप ने तैयार किया है। इसी साल फरवरी में एनएसओ का अधिग्रहण इसी की मैनजमेंट फ्रांसिस्को पार्टनर ने किया है। फ्रांसिस्को पार्टनर के को-फाउंडर दिपंजन देव हैं, जबकि एनएसओ के को-फाउंडर शलेव हुलिओ और ओमरी लैवी हैं। एनएसओ ग्रुप ने ही पिगासस को तैयार किया है। ग्रुप का दावा है कि उसने यह सॉफ्टवेयर सरकार की मदद के लिए बनाया है ताकि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद जैसी गतिविधियों से निपट सकें। इस ग्रुप की शुरुआत 2010 में तीन दोस्तों ने साइबर सिक्योरिटी इंटेलिजेंस फर्म के रूप में की थी। जिन लोगों ने इसकी शुरुआती की थी उनके नाम शलेव हुलिओ निव कार्मी और ओमरी लैवी है।

 

हमेशा से शक के घेरे में एनएसओ ग्रुप

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब इजरायल की एनएसओ ग्रुप को पर संदेह किया जा रहा है। इससे पहले भी मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसराइली कंपनियों के स्पाइवेयर ग्राहकों में शामिल हैं। इस लिस्ट में एनएसओ का भी नाम है। बता दें कि इस्तांबुल में मौजूद सऊदी अरब वाणिज्य दूतावास में मारे गए चर्चित पत्रकार जमाल खशोगी के स्मार्टफोन को भी पिगासस सॉफ्टवेयर के जरिए ही ट्रैक किया गया था। स्थानीय मीडिया में कई बार यह चर्चा रही है कि कुछ देशों ने NSO के स्पाइवेयर पिगासस का इस्तेमाल अपने राजनैतिक विरोधियों को मौत के घाट उतारने के लिए भी किया है। फाइनेंसियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया की रवांडा की सरकार ने भी इसका बहुत इस्तेमाल किया।

 

 

NSO ने अपनी सफाई में क्या कहा?

इजराइली साइबर इंटेलिजेंस कंपनी NSO ने अपनी प्रतिक्रिया में खुद पर लगे आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वह इन आरोपों के खिलाफ मजबूती से मुकाबला करेगी। एनएसओ की तरफ से जारी बयान में लिखा है, “हम कड़े शब्दों में आरोपों का खंडन करते हैं और इनके खिलाफ लड़ेंगे। एनएसओ का एकमात्र उद्देश्य लाइसेंस प्राप्त सरकारी खुफिया और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आतंकवाद और गंभीर अपराध से लड़ने में मदद करने के लिए टेक्नोलॉजी देना है। हमारी तकनीक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन नहीं की गई है और न ही इसकी इजाजत है हमारी तकनीक ने हाल के वर्षों में हजारों लोगों की जान बचाने में मदद की है।”

 

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