क्राइम्स

देवरिया बालिका गृह काण्ड : सालभर बीतने के बाद भी नहीं खुले बालिका, शिशु गृह

देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बालिका गृह काण्ड के सवा साल बाद भी जिले में विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण, शिशु गृह, बालिका गृह व महिला अल्पवास गृह नहीं खोला गया। इसके चलते लावारिस मिले शिशुओं, बालिकाओं और महिलाओं को रखने को लेकर आये दिन पुलिस परेशान होती है। मानसिक मंदिता गृह, वृद्धाश्रम के अभाव में पीड़ित भटकने को मजबूर है।

 

 

शासन से रोक के बाद भी शहर के रेलवे स्टेशन रोड पर मां विध्यवासिनी महिला सेवा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा अवैध रूप से चलाये जा रहे रहे शिशु गृह, बालिका गृह विशेष दत्तक ग्रहण इकाई पर 5 अगस्त-18 को प्रशासन ने छापा मारा था। जहां से 23 संवासिनियां बरामद हुई थी। बालिका गृह काण्ड के नाम से चर्चित इस मामले में संस्था संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके परिवार के सदस्यों, कर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ।

 

 

इस संवेदनशील मामले में लापरवाही बरतने व नियमों की अनदेखी में डीएम,एसपी सहित कई अधिकारियों पर गाज गिरी। इस काण्ड के चंद दिनों बाद शासन ने मामले की जांच एसआईटी को सौंप दिया। उसकी टीम कई दिनों तक जिले में जमी रही और कईयों से पूछताछ कर उनका बयान लिया। अब बालिका गृह काण्ड की जांच सीबीआई कर रही हैं। लेकिन इस काण्ड के सवा साल बाद भी आधा दर्जन गृह खोलने को लेकर शासन, प्रशासन के अधिकारी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। इसका खामियाजा नवजात बच्चों, शिशुओं, बालिकाओं, महिलाओं, मानसिक विक्षिप्त बालिकाओं, महिलाओं और वृद्धों को भुगतना पड़ रहा है।

 

 

मानसिक मंदित महिला/बालिका गृह को छोड़कर सभी परियोजनाएं गिरिजा त्रिपाठी की संस्था से संचालित होती थी। शिशु और बालिका गृह नहीं खुलने से पुलिस को डेढ़ साल से इनको रखने को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे अधिक दिक्कत शिशुओं और बालिकाओं के रखने को लेकर होती है। इस गंभीर व संवेदनशील मामले में भी सवा साल बाद अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता पर अब सवाल उठने लगे हैं।

 

खुल जाते केन्द्र तो इनको मिल जाता ठिकाना

 

-विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण-इसमें 0 से 6 साल के लावारिस बच्चे रखे जाते हैं।

-शिशु गृह बालक/बालिका-इसमें 6 से 10 साल तक भटके, भागे, लावारिस लड़के, लड़की रखे जाते हैं।

-बालिका गृह-इसमें 10 से 18 साल की परिवार से बिछड़ी, घर से भागी, दुष्कर्म केस में बयान दर्ज कराने वाली बालिकायें रखी जाती हैं।

-अल्पवास गृह-इसमें 19 साल से अधिक की युवती, परिवार से बिछड़ी, प्रताड़ित, छोड़ी गई महिलाएं रखी जाती हैं।

-मानसिक मंदित महिला/ बालिका गृह- इसमें मानसिक दिक्कत वाली घर से बिछड़ी, छोड़ी गईं महिलाओं, युवतियों को रखा जाता है।

-वृद्धाश्रम-इसमें परिवार द्वारा त्याग किये गये, निराश्रित, लावारिस वृद्धों को रखा जाता है।

शिशु, बालिका, अल्पवास सहित आधा दर्जन गृहों को खोलने को विज्ञापन निकाला गया था। लेकिन अभी तक कोई संस्था इसके लिए तैयार नहीं हुई है। इससे शासन के अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। आश्रय गृह खोलने को लेकर लगातार प्रयास किया जा रहा है। आपात स्थिति में शिशुओं, बालिकाओं को सुरक्षित रखने को वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।

प्रभात कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी

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