अच्छी सोच

महिला हॉकी कप्तान के पिता आज भी चलाते हैं घोड़ा गाड़ी, ऐसी है उनकी फैमिली

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रानी अपने मां और पिता के साथ

कुरुक्षेत्र: भारतीय महिला हॉकी टीम की फास्ट फॉरवर्ड प्लेयर रानी जहां फ्लाइट से ओलिंपिक खेलों के लिए रियो जा रही थीं। वहीं, उनके पिता रामपाल घोड़ा गाड़ी चला अपने काम में जुटे रहे। बेटी रियो ओलंपिक में देश का परचम लहराएगी, लेकिन उसके पिता इन सब बातों से बेखबर आज भी अपनी घोड़ा गाड़ी पर माल ढोने का काम कर रहे हैं।

 

ऐसी है रानी की फैमिली… – रानी की पूरी फैमिली का गुजर-बसर घोड़ागाड़ी से होता है। उनके पिता रामपाल ने घोड़ागाड़ी चलाकर रानी के हॉकी खेलने के सपने को साकार किया औरटीम इंडिया के साथ उसका रियो तक का सपना पूरा कराया।

 

– गरीबी के बीच पली-बढ़ी रानी रामपाल को इस बात की जरा भी हिचक नहीं है कि उसके पिता आज भी मजदूरी करते हैं, बल्कि उसे अपने पिता पर गर्व है।

 

 

 

– बेटी को इतनी शोहरत मिलने और पैसा भी आने के बावजूद पिता आज भी जमीन से ही जुड़े हैं।

 

– पिता पर गर्व है, इसीलिए इस स्टार खिलाड़ी ने अपने नाम के साथ अपने पिता का भी नाम लगा रखा है। आज वह विश्व में रानी रामपाल के नाम से ही फेमस है।

 
बेटी आज बन चुकी शिखर सितारा – हालांकि, रानी के पास बचपन में न तो खेलने के लिए जूते थे और न ही हॉकी किट थी। बस पास था केवल खेल का जुनून और कुछ करने की जिद।

 

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कोच बलदेव सिंह के साथ रानी

 

– द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच बलदेव सिंह की ट्रेनिंग और अपनी इसी जिद के बदौलत ही रानी ने सफलता के शिखर को छुआ।

 

– जर्मनी में खेले गए वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता था और रानी प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रही थी।

 

– ओलिंपिक क्वालिफायर टूर्नामेंट में भी रानी रामपाल के गोल की बदौलत ही भारतीय टीम ने 36 साल बाद ओलिंपिक के लिए टिकट पाया।

 

– अपने प्रदर्शन की बदौलत ही रानी ने रेलवे में क्लर्क की नौकरी हासिल की थी और टीम के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी भी संभाली थी।

 

– रानी की हॉकी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसका हॉकी सेंस बहुत गजब का है और यह बात उसके कोच भी मानते हैं।

 

– रानी रामपाल बॉल को लेकर बहुत तेज फर्राटा लगाती है और तेज रफ्तार और धार के साथ जब हमला बोलती है तो प्रतिद्वंद्वी टीम की रक्षा पंक्ति को संभलने का मौका ही नहीं मिलता।

 

– डी के भीतर रानी के निशाने अचूक होते हैं और इसी प्रतिभा की बदौलत आज रानी का नाम विश्व की चोटी की फारवर्ड में शुमार है।

 

– रानी के पिता रामपाल को पूरा विश्वास है कि ओलिंपिक में रानी उम्दा प्रदर्शन कर देश को पदक दिलाएगी।

 

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रानी के पिता घोड़ा गाड़ी चलाते हुए

कोई काम नहीं होता छोटा
– रानी के पिता रामपाल कहते हैं कि वह ईमानदारी से रोजी-रोटी कमा रहे हैं और कोई भी काम छोटा नहीं होता। न तो उन्हें घोड़ा गाड़ी चलाने में कोई हिचकिचाहट होती है और न ही उनकी बेटी रानी को।

 

– वे कहते हैं कि मेहनत की कमाई के बलबूते न तो उन्हें किसी सहायता की जरूरत है और न ही किसी का अहसान लेने की। रानी परिवार में सबसे छोटी है उसके दो बड़े भाई दुकान में काम करते हैं। शुरू में परिवार चलाने के लिए पापड़ बेलने पड़े थे।

 

– उन्होंने बताया कि रानी ने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल हो गई थी।

 

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