अयोध्या

अयोध्या धाम: ढाई साल में होगा 128 फीट ऊंचे भव्य राम मंदिर का निर्माण

अयोध्या:भगवान श्रीराम कण-कण में विराजमान हैं। हिंदू धर्म मानने वाले लोगों के आस्था के प्रतीक हैं श्रीराम। ऐसे में जहां राम ने जन्म लिया वो जगह उनके लिए कितनी अहमियत रखती है, इसे बयां करने में शायद शब्द कम पड़ जाएं। 500 साल पुराने विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाकर सुप्रीम कोर्ट ने भूमि विवाद को खत्म कर दिया है। फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे में अब लोगों के जहन में एक सवाल है कि आखिर राम मंदिर कैसा होगा। इस खबर के जरिए हम आपके मन में उठ रहे सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

 

 

दो मंजिल का होगा राम मंदिर
सदियों पुराने जिस मंदिर का सपना देखा गया वो दो मंजिल का होगा। प्रथम मंजिल की ऊंचाई 18 फीट एवं दूसरी मंजिल की ऊंचाई 15 फीट 9 इंच होगी। इसमें इस्तेमाल होने वालों पत्थरों को तराशने का काम भी लंबे समय से चल रहा है। बीते 28 वर्षों से राजस्थान, गुजरात, मिर्जापुर व देश के अन्य हिस्सों से आए कारीगर कार्यशाला में करीब एक लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का कार्य पूरा कर चुके हैं। विहिप के प्रस्तावित मंदिर मॉडल के भूतल के पत्थरों की तराशी का कार्य हो चुका है।

 

 

भव्य भवन में विराजमान होंगे रामलला
रामजन्मभूमि के पार्श्व में प्रवाहित उत्तरावाहिनी मां सरयू, आग्नेय कोण पर विराजमान हनुमानजी, अयोध्यावासी और श्रद्धावनत साधक अब जल्द अपने रामलला को ऐसे भव्य भवन में विराजमान होते देखेंगे, जिसकी कामना पांच सदी से होती रही है। इसे एक मॉडल की तरह समझिए।

 

…तो ऐसा होगा राम मंदिर का नक्शा

लंबाई: रामजन्मभूमि पर राममंदिर बनाने के लिए विहिप ने जो नक्शा बनाया है, उसके अनुसार प्रस्तावित मंदिर 268 फीट लंबा है।
चौड़ाई: प्रस्तावित राममंदिर की चौड़ाई करीब 140 फीट है।
ऊंचाई: जन्मभूमि पर बनने वाले राममंदिर की ऊंचाई 128 फीट है।
8 फीट ऊंची पीठिका: मंदिर की प्रथम पीठिका (चबूतरा) आठ फीट ऊंची होगी। इन तक प्रशस्त सीढ़ियों से पहुंचा जा सकेगा। इसी पीठिका पर मंदिर का 10 फीट चौड़ा परिक्रमा मार्ग होगा। चार फीट नौ इंच ऊंची एक आधार पीठिका पर मंदिर का निर्माण होना है।
होंगे पांच प्रखंड: अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप और गर्भगृह के रूप में मंदिर के मुख्यतया पांच प्रखंड होंगे।
लगेंगे 212 स्तंभ: मंदिर में 212 स्तंभ लगेंगे। प्रथम मंजिल में 106 एवं इतने ही दूसरी मंजिल पर लगेंगे। प्रथम मंजिल पर लगने वाले स्तंभों की ऊंचाई 16 फीट छह इंच एवं दूसरी मंजिल पर लगने वाले स्तंभों की ऊंचाई 14 फीट छह इंच होगी।
हर स्तंभ पर यक्ष-यक्षिणियां: प्रत्येक स्तंभ पर यक्ष-यक्षिणियों की 16 मूर्तियां और अन्य कलाकृतियां उत्कीर्ण होंगी। इनका व्यास चार से पांच फीट तक रहेगा।

 
गर्भगृह: मंदिर के जिस कक्ष में रामलला विराजेंगे, उस गर्भगृह से ठीक ऊपर 16 फीट तीन इंच का विशेष प्रकोष्ठ होगा। इसी प्रकोष्ठ पर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिखर निर्मित होगा।
इस्तेमाल होगा इतना पत्थर: प्रस्तावित मंदिर में एक लाख 75 हजार घन फीट लाल बलुआ पत्थर प्रयुक्त होगा।

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इतने समय में तैयार होगा राम मंदिर
यदि तैयारियों पर गौर करें निर्धारित स्थल पर प्रथम तल के तराशे गए पत्थरों को शिफ्ट करने में अधिक से अधिक छह माह का समय लगेगा। इसके बाद दो से ढाई वर्ष में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। पत्थरों को ईंट-गारा की बजाय कॉपर और सफेद सीमेंट से जोड़ा जाएगा। प्रथम तल के पत्थरों की शिफ्टिंग के साथ ही गर्भगृह भी आकार लेगा, जहां रामलला की प्रतिष्ठा होगी।

 

 

इन्होंने की थी स्थापना
परमहंस के साथ मंदिर आंदोलन के अग्रदूत अशोक सिंहल, आचार्य गिरिराज किशोर, महंत नृत्यगोपाल दास, संघ विचारक मोरोपंत पिंगले आदि ने कार्यशाला की आधारशिला रखी थी।

 

तीन माह में बना नक्शा
नाप आदि लेने के बाद रामजन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर का नक्शा तैयार करने में तीन माह का समय लगा था। चंद्रकांत सोमपुरा बताते हैं कि तीन माह तक रोजाना थोड़ा-थोड़ा समय निकालकर नक्शा तैयार किया। इसके बाद यह नक्शा अशोक सिंहल को सौंपा। फिर विहिप के शीर्ष नेताओं, संतों और अखाड़ों के प्रमुखों को यह नक्शा दिखाया गया। फिर तय हुआ कि इसी नक्शे के मुताबिक मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

 

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