क्राइम्स

बस्ती जिले के बंजरिया में स्थापित पौने सात करोड़ की परियोजना वर्ष भर में बदहाल

बस्ती: इंडो-इजराइली तकनीकि से उत्कृष्ट पौधों का उत्पादन कर किसानों को मालामाल करने की परियोजना पहले पायदान पर ही दम तोड़ रही है। पौने सात करोड़ की यह परियोजना वर्ष भर में ही बदहाल है। एक वर्ष में नर्सरी से 10 लाख पौधों का उत्पादन कर किसानों को निरोगी पौधे उपलब्ध कराना था। जिससे किसानों की आय दो गुनी की जा सके। मगर बुनियादी ढांचा खड़ा करने में खामियों से पूरी परियोजना की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

 
26 अक्तूबर 2018 को परियोजना का लोकार्पण किया गया। करीब सात करोड़ 40 लाख परियोजना की अनुमानित धनराशि का आवंटन उद्यान विभाग को मिला। जिसमें से छह करोड़ 70 लाख रुपये खर्च किया गया मगर न तो मानक अनुरुप उपकरण लगाए गए, न ही उचित निर्माण कराया गया। सूबे की दूसरी सबसे उत्कृष्ट नर्सरी की सौगात बस्ती जिले को मिली है। पूरे प्रदेश के कन्नौज और बस्ती में ही इंडो-इजरायल योजना के तहत फल उत्कृष्ठता केंद्र स्थापित किए गए हैं। जिसमें पहले पौध उत्पादन का गौरव बस्ती को ही प्राप्त है। जलगांव की निजी संस्था जैन इरिगेशन को करीब तीन करोड़ में परियोजना की नर्सरी, पॉली हाउस, ऑटोमेटिक ड्रिप व फर्टीगेशन इकाई आदि का कार्य दिया गया था। निर्माण कार्य में हुई खामियां को नजरअंदाज करते हुए कार्यदायी संस्था को भुगतान भी कर दिया गया। जो सालभर बाद पौध उत्पादन में संकट पैदा कर रहा है। निविदा शर्तों के अनुसार कार्यदायी संस्था को तीन साल तक इंफ्रास्ट्रक्चर समेत मशीन आदि की फ्री मेंटिनेंस करनी थी। केंद्र पर पेयजल के लिए लगा आरओ अभी तक नहीं चालू किया गया।

 
नर्सरी हाईटेक न मानकों का ख्याल
हाईटेक नर्सरी सिर्फ नाम की है, जिसमें उत्कृष्टता का नाम-ओ-निशान तक नहीं। बूम पद्घति से सब्जियों की सिंचाई होनी थी मगर तकनीक में बिछाई पाइप छठे महीने में ही फट गई। पैबंद लगाकर सिंचाई का काम किया जा रहा है। नर्सरी में ट्रे-स्टैंड के नीचे ड्रेनेज सिस्टम बनाने थे। जिससे पौध की सिंचाई करते समय अनावश्यक पानी की निकासी होती रहे। मगर निर्माण करने वाली संस्था ने ड्रेन की जगह गिट्टी पाट दिया। जिससे सब्जी के पौधों में एगली (शैवाल) और नर्सरी में काई बन रही है। नतीजन पौधे रोग ग्रसित निकल रहे हैं। इस लापरवाही के चलते प्रतिवर्ष 10 लाख पौधों का उत्पादन करने वाली यह उत्कृष्ट नर्सरी किसानों को निरोगी पौधे उपलब्ध कराने में समर्थ नही है। मृदा परीक्षण लैब, कृषि यंत्रों को खड़ा करने का शेड भी नहीं बनाया।

 
बेपानी पॉली हाउस,मर रही कलमी
आम की कलम के लिए दो पॉली हाउस बनाए गए हैं। जिसकी क्षमता तकरीब 25 हजार पौधे प्रतिवर्ष की है। सिचाई और पोषक तत्व के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया गया मगर उसमें एक का मोटर खराब है तो दूसरा लीकेज के कारण बंद पड़ा है। ऐसे में पौध को पानी व पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं। जिससे उनका विकास नहीं हो पा रहा और पौध सूख रही है।

 
सीसीटीवी कैमरे व स्ट्रीट लाइटें खराब
परिसर की सुरक्षा के लिए 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। जो चार माह से खराब पड़े हुए हैं। वहीं रोशनी के लिए लगाई गईं दो दर्जन से अधिक स्ट्रीट लाइटें उद्घाटन के तीसरे महीने से बंद पड़ी हैं। जिससे दिन ढलने के बाद परिसर अंधेरे में डूब जाता है।

 
जल्द खामियां दूर करने का दावा
फल उत्कृष्टता केंद्र के प्रभारी अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि संयुक्त निदेशक बस्ती को पत्र लिखकर केंद्र की खामियों को दुरुस्त कराने की अपील की गई है। जल्द ही सभी खामियां ठीक कर ली जाएंगी।

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