इतिहास

कंप्यूटर से भी तेज चलता था बिहार के गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का दिमाग, नासा ने भी माना लोहा

नासा ने जिसके ज्ञान का इस्तेमाल कर अंतरिक्ष के अपने मिशन को आगे बढ़ाया, वह विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ इन दिनों पटना में किराये के अपने फ्लैट में जिंदगी गुजार रहे हैं. साठ और सत्तर के दशक में उनकी प्रतिभा की चर्चा भारत से लेकर अमेरिका तक होती थी.

 

 

हम बात कर रहे हैं गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह की, जिनका मंगलवार को जन्मदिन है. वह 74 वर्ष के हो गये हैं. दो अप्रैल, 1946 को उनका जन्म भोजपुर जिले के वसंतपुर गांव में हुआ था. वशिष्ठ ने अपने गणित के ज्ञान की वजह से युवा अवस्था में ही खूब सुर्खियां पायीं. नेतरहाट स्कूल से इंटर स्टेट टॉपर बने. 19 वर्ष की उम्र में पटना यूनिवर्सिटी से जब उन्होंने बीएससी और एमएससी किया, तो इसकी चर्चा सारे देश में हुई. 1969 में उन्होंने अमेरिका की कैलिर्फोनिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की.

 
इसके बाद वाशिंगटन यूनिवर्सिटी और नासा से जुड़ कर काम किया. नासा के अंतरिक्ष मिशन से जुड़ कर जब वह अपने जीवन को सफलता के शीर्ष पर ले जा सकते थे, तब सब छोड़ वह भारत लौट आये. कारण था कि देश की मिट्टी इन्हें वापस बुला रही थी. मन में देश के लिए कुछ करने की चाहत थी. अपने ज्ञान का इस्तेमाल कर भारत को आगे ले जाना चाहते थे.

 

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आइआइटी कानपुर, इंडियन स्टेटिकल इंस्टीट्यूट कोलकाता में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम भी किया. वह और भी बहुत कुछ करना चाहते थे, लेकिन किस्मत या ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था. 1973 में शादी हुई और 1975 में तलाक. यही वह दौर था, जब काम का बेहतर माहौल नहीं मिलने से वह तनाव में थे और रिश्ते भी टूट रहे थे. इसी बीच उनका एक रिसर्च पेपर भी चोरी हो गया. इस असर यह हुआ कि उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो गया और वह सिजनोफ्रेनिया के मरीज हो गये.

 
11 साल रांची के सीआइपी में रहे. 1989 से 1993 तक गुमसुदा रहे. देश के कई मनोरोग संस्थानों में इलाज हुआ, लेकिन फायदा नहीं हुआ. आज गुमनामी में जिंदगी गुजार रहे वशिष्ठ नारायण सिंह पटना के अशोक राजपथ स्थित एक फ्लैट में अपने भाई और भाई के परिवार के साथ रहते हैं. मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं, पर आज भी हर पल करते हैं गणित के सवाल हल : वह करीब 45 साल से सिजनोफ्रेनिया के मरीज हैं.

 

 

मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है. लेकिन आज भी हर रोज हर पल गणित के सवाल हल करते रहते हैं. मुलाकात के दौरान बार-बार गणित के सवालों पर ही बात करते. गणित में ही खोये नजर आते. परिवार के लोग बताते हैं कि हर रोज एक से दो कॉपी गणित के सवाल बनाकर भर देते हैं.

 

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