इतिहास

प्रयागराज:नेहरू के आनंद भवन में पहुंचा 4 करोड़ 19 लाख के गृहकर बकाया का नोटिस

प्रयागराज :पंडित जवाहरलाल नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन को प्रयागराज नगर निगम ने चार करोड़ 19 लाख के गृहकर बकाए का नोटिस भेजा है। नगर निगम ने यह नोटिस इस भवन की कमर्शल ऐक्टिविटी के आधार पर भेजा है। इसको लेकर राजनीतिक बखेड़ा खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस पर विरोध जताते हुए साबरमती ट्रस्ट पर भी टैक्स लगाने की मांग की है।
जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड की ओर से आनंद भवन में म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का संचालन होता है। इसको देखने के लिए प्रति दिन हजारों लोग आते हैं और उनसे टिकट के पैसे भी वसूले जाते हैं। इसी आधार पर नगर निगम ने इसे कमर्शल ऐक्टिविटी मानते हुए गृहकर का नोटिस भेज दिया है। नगर निगम के मुताबिक पहले आनंद भवन का गृहकर जमा किया जाता था। हालांकि, कई वर्षों से गृहकर जमा नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से आनंद भवन पर दो करोड़ 71 लाख 13 हजार 534 रुपये का बकाया है। ब्याज समेत यह धनराशि चार करोड़ 19 लाख 57 हजार 495 रुपये हो गई है। 2003 से आनंद भवन का गृहकर बकाया है।

 

मेयर को लिखा पत्र
गृहकर की नोटिस भेजे जाने के बाद जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड के प्रशासनिक सचिव डॉ एन. बाला कृष्णन ने 8 नवंबर को मेयर को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि, चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधि कमर्शल नहीं हो सकती है। उन्होंने गृहकर का मूल्यांकन गलत होने की बात कही है। वहीं, नगर निगम की नोटिस के बाद कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के पूर्व प्रवक्ता बाबा अभय अवस्थी ने इसे सियासी साजिश बताते हुए साबरमती ट्रस्ट और संसद पर भी टैक्स लगाने की मांग की है।

 

 

‘भवन के बारे में नहीं थी यह जानकारी
नोटिस पर मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी का कहना है कि आनंद भवन प्रबंधन ने बढ़ने वाले हाउस टैक्स पर कभी कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई है। आनंद भवन की ओर से आपत्ति न दर्ज कराए जाने से बकाया बढ़ता रहा। आनंद भवन की ओर से कभी यह जानकारी नगर निगम को दी ही नहीं गई कि हम चैरिटेबल ट्रस्ट हैं और यह भवन राष्ट्र को समर्पित है। यदि इस संबंध में जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड की ओर से कोई कागजात मुहैया कराए जाते हैं तो कार्यकारिणी में गृहकर कम करने करने पर विचार किया जाएगा।

 

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आनंद भवन की खास बातें
आनंद भवन 1920 से लगातार स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों का केंद्र रहा। 1928 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा करने वाला भाषण आनंद भवन में ही लिखा था। भारत छोड़ो आंदोलन का प्रारूप भी यहीं बना। विदेशी कपड़ों की होली भी यहीं जलाई गई। 1930 में इसे कांग्रेस का मुख्यालय बनाया गया, 1940 में यहां कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में महात्मा गांधी के साथ दूसरे बड़े नेता भी शामिल हुए।

 

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हालांकि, स्वतंत्रता मिलने के बाद कांग्रेस मुख्यालय 1948 में दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया। आनंद भवन को इसके बाद जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड के हवाले कर दिया गया। स्वराज भवन में पंडित नेहरू की इच्छा से बाल भवन बनाया गया, जहां आज भी अनाथ बच्चों को रखा जाता है। वहीं, आनंद भवन को 16 नवंबर 1969 को पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया और 1971 में इसे संग्रहालय बना दिया गया।

 

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