इतिहास

प्रियंका गांधी ने गोरखपुर में स्वतंत्रता सेनानी विध्यवासिनी प्रसाद वर्मा के नाम पर स्थापित पार्क का नाम बदले जाने पर जताया विरोध, फेसबुक पर शेयर की पोस्ट

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प्रियंका गांधी ने गोरखपुर में स्वतंत्रता सेनानी विध्यवासिनी प्रसाद वर्मा के नाम पर स्थापित पार्क का नाम बदले जाने पर विरोध जताया है। अपने ऑफिशियल फेसबुक एकाउंट पर एक पोस्‍ट कर उन्‍होंने इस कदम को स्‍वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताया है। इसके पहले गोरखपुर के कुछ बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के अलावा भाजपा के एमएलसी देवेन्‍द्र प्रताप सिंह भी पार्क का नाम बदले जाने पर अपना एतराज जता चुके हैं।

 

गुरुवार को हिन्‍दू-मुस्लिम एकता कमेटी के लोगों ने इस बारे में डीएम कार्यालय पर ज्ञापन भी दिया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने आफिशियल फेसबुक एकाउंट पर इस मुद्दे पर एक पोस्ट डाली है जिसमें स्वतंत्रता सेनानी विध्यवासिनी प्रसाद वर्मा का नाम पार्क से हटाए जाने को स्‍वतंत्रता सेनानियों का अपमान करार दिया गया है। प्रियंका गांधी ने पोस्ट में लिखा है, ‘हमारे स्वतंत्रता सेनानी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। गोरखपुर के विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा जी ने चंपारण सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक गांधी जी के साथ कदम से कदम मिलाकर आज़ादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया। आज भाजपा सरकार अपने घमंड में चूर होकर विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा जी के नाम पर बने गोरखपुर स्थित पार्क का नाम बदल रही है। ये स्वतंत्रता सेनानी का अपमान है।’

 
उधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने फेसबुक पोस्‍ट कर इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने लिखा, ‘चम्पारण सत्याग्रह से भारत छोड़ो आंदोलन तक गांधीजी के सहयोगी रहे महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी बाबू विंध्वासिनी प्रसाद वर्मा के नाम पर आजादी से पहले बने विंध्वासिनी पार्क का नाम बदला जाना सम्पूर्ण स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है। सरकार का काम निंदनीय है।’

 
भाजपा एमएलसी ने इस तरह जताया विरोध
पार्क का नाम बदले जाने को लेकर भाजपा एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह भी विरोध में उतर आए हैं। गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर नाम बदलने का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिसके नाम पर पार्क का नाम रखा गया था वह महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। अब पार्क का नाम बदलना स्वतंत्रता सेनानी का अपमान है।

 

विंध्यवासिनी बाबू 1917 में गांधीजी की चम्पारण यात्रा में उनके साथ थे। 1919 में अंग्रेजों के रोलेट एक्ट का विरोध करने वाले क्रांतिकारियों के वह अगुवा थे। 1920 से 1930 तक उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी। 1942 के एतिहासिक ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन के नेतृत्वकर्ता के रूप में संघर्ष करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। गांधी जी ने अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ में विन्ध्यवासिनी बाबू की सराहना की है।

 

सरकारी बेवसाइट और प्रवेश द्वार पर विन्ध्यवासिनी पार्क ही अंकित

 

 

जिला प्रशासन का दावा है कि सरकारी दस्तावेज में स्वतंत्रा संग्राम सेनानी विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा के नाम पर राजकीय उद्यान के नामकरण का कोई दस्तावेज नहीं है। लेकिन गोरखपुर की सरकारी वेबसाइट https://gorakhpur.nic.in पर ही ‘ प्लेसेज आफ इंटरेस्ट ‘में पार्कों की सूची में ‘राजकीय विन्ध्यवासिनी पार्क नाम और फोटो मौजूद है। यही नहीं, पार्क के प्रवेश द्वार पर अब भी ‘विन्धयासिनी पार्क राजकीय उद्यान गोरखपुर लिखा हुआ है।

 

 

हालांकि जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह का कहना है कि जल्द ही बोर्ड पर नाम बदल कर ‘श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार राजकीय उद्यान गोरखपुर लिख दिया जाएगा। वे भी दावा करते हैं कि किसी भी दस्तावेज में विंध्यवासिनी पार्क दर्ज नहीं है। उधर, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी है तो भाजपा एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने भी पार्क का नाम बदले जाने का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री और उद्यान मंत्री को पत्र लिखा है।

 

 

इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि बाबू विन्ध्यवासिनी प्रसाद के नामकरण का यदि कोई दस्तावेज नहीं है तो उसकी खुद की वेबसाइट पर नाम, फोटो और विवरण कैसे मौजूद है? दूसरे गुरुवार को भी गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा पार्क का जीर्णोद्धार कर मुख्य द्वार पर बोर्ड लगाया गया तो उस पर ‘राजकीय विन्धावासिनी पार्क-राजकीय उद्यान गोरखपुर किस आधार पर लिखा?

 

 

स्थापना वर्ष के शिलापट्ट पर राजकीय उद्यान गोरखपुर-सचित्र

पार्क में लगे शिलापट्ट के मुताबिक स्थापना वर्ष 1952 में हुई थी। इस पार्क पर भी राजकीय उद्यान गोरखपुर अंकित है। इसके अलावा सांसद स्थानीय क्षेत्रीय विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2002-03 में 5 लाख रुपये से सड़क का लेपन कार्य कराया गया। तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने 15 नवंबर 2002 को लोकार्पण किया था, लेकिन इस पत्थर पर भी राजकीय उद्यान गोरखपुर ही लिखा हुआ है।

 

 

 

फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र के बोर्ड पर व्ही पार्क अंकित

उद्यान परिसर में तीन साल पहले एक पुराना बोर्ड जीर्णोद्धार के समय हटाया गया, अब भी उपेक्षित पार्क के कोने में पड़ा पार्क का नाम विन्ध्यवासिनी पार्क होने की गवाही देता दिखता है। परिसर में स्थित ‘राजकीय सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र के बोर्ड पर उद्यान का नाम व्ही पार्क उद्यान परिसर लिखा हुआ है।

 

 

नाम पूर्ववत बनाए रखने के लिए एमएलसी ने लिखा सीएम को पत्र

विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर विंध्यवासिनी पार्क का नाम पूर्ववत बनाए रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया जाना चाहिए। इससे जनभावनाओं एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान होगा।

 

 

विंध्यवासिनी पार्क का नाम बदलने पर एनएसयूआई एवं कांग्रेस करेगी विरोध

चारु चंद्रपुरी स्थित कार्यालय पर गुरुवार को एनएसयूआई एवं कांग्रेसियों ने प्रदेश अध्यक्ष सुमित पांडेय की अध्यक्षता बैठक की। निर्णय लिया कि पार्क का नाम बदले जाने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। बैठक को एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अंशुमान पाठक, महेंद्र मोहन, गुड्डू तिवारी, विजय सिंह,योगेश प्रताप सिंह, अभिजीत पाठक, बादल ,रहमान साहब ने संबोधित किया। बैठक में एनएसयूआई प्रदेश महासचिव ऋषि यादव, महानगर अध्यक्ष प्रखर पांडेय, केतन तिवारी, विख्यात भट्ट ,विश्वजीत मिश्रा,आशुतोष शुक्ला पंकज यादव, अंकित पांडेय समेत अन्य शामिल रहे।

 

 

 

किसी भी विभागीय दस्तावेज में पार्क का नाम विन्ध्यवासिनी पार्क रखे जाने कोई साक्ष्य नहीं है। यह सही है कि यह लोगों में विन्ध्यवासिनी पार्क के नाम से लोकप्रिय है। मुख्य द्वार पर यह नाम कैसे लिखा गया मुझे नहीं मालूम। कर्मचारियों/ अधिकारियों के नियुक्ति पत्र में राजकीय उद्यान गोरखपुर ही लिखा जाता है।

-बलजीत सिंह, जिला उद्यान अधिकारी गोरखपुर

 

 

संघर्ष मोर्चा गठित, डीएम को ज्ञापन

एक होटल में बैठक कर पार्क का नाम बदलने जाने के विरोध में गुरुवार की शाम संयुक्त संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया। निर्णय लिया गया कि क्रमिक अनशन, आमरण अनशन, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ सभा, धरना प्रदर्शन और ज्ञापन दिया जाएगा। शनिवार को सारे कार्यक्रम की रूपरेखा तय करके श्री चित्रगुप्त मन्दिर में पत्रकार वार्ता की जाएगी। इसके पूर्व हिन्दू मुस्लिम एकता कमेटी के बैनर तले डीएम के विजयेंद्र पांडियन को ज्ञापन देकर पार्क का नाम पूर्ववत बनाए रखने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में कमेटी के महासचिव विजय कुमार श्रीवास्तव, संरक्षक शाकिर अली सलमानी, विपुल त्रिपाठी, इरशाद अहमद, जययू नेता गौतम लाल, यासिर अली, गौरव पाण्डेय, सतीश राय आदि शामिल थे।

 

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