क्राइम्स

#KabTakNirbhaya: अनु दुबे से जब मिलीं निर्भया की मां, नम आंखों से कही ये बात

संसद के बाहर बेटियों को सुरक्षा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाली अनु दुबे को निर्भया की मां का भी साथ मिल गया है। निर्भया की मां का कहना है कि हैदराबाद की घटना ने फिर 2012 की यादें ताजा कर दी हैं। पुलिस पहले तो कभी समय पर पहुंचती नहीं है, उसके बाद जनता के आक्रोश को दबाने का प्रयास करती है।

 

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अन्नू दूबे और निर्भया की मां

 

निर्भया की मां ने  बताया कि संसद के बाहर हैदराबाद की घटना से डरी-सहमी लड़की किसी को क्या नुकसान पहुंचा सकती थी। मान लिया कि उस इलाके में धारा- 144 लगी हुई है, पर एक अकेली लड़की उस धारा को कैसे तोड़ रही थी। लड़की को आराम से जंतर-मंतर तक पहुंचाया जा सकता था।

 

 

अकेली विरोध कर रही लड़की को थाने ले जाकर मारपीट करने की क्या जरूरत थी? लड़की चोट के निशान दिखा रही है। महिला पुलिस अधिकारियों को सब्र से काम लेते हुए उसे समझाना चाहिए था कि विरोध संसद के बाहर नहीं, बल्कि जंतर-मंतर पर किया जाए।

 

 

निर्भया के पिता ने प्रधानमंत्री से की सख्त कानून बनाने की मांग
निर्भया के पिता ने कहा कि 2012 में मेरी बेटी के साथ जब बर्बरता हुई तो सारा देश सड़कों पर सरकार से बेटियों को सुरक्षित माहौल देने की मांग कर रहा था। हैदराबाद की घटना ने एक बार फिर निर्भया की घटना की याद दिला दी। निर्भया मामले के बाद केंद्र में सरकार बदल गई। आम लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहद उम्मीद थी कि वे बेटियों को सुरक्षित वातावरण देंगे।

 

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निर्भया के पिता ने आगे कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा तो हैदराबाद में भी पूरा हुआ, अभिभावक ने बेटी को पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाया पर सुरक्षा तो पुलिस देगी। इसलिए प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे अपने इस नारे को पूरा करने के लिए सख्त कानून बनाएं, ताकि भविष्य में किसी बेटी से ऐसी बर्बरता न हो। दूसरा प्रधानमंत्री को इन नेताओं को नसीहत देनी होगी कि अगर उन्हें बोलने नहीं आता तो चुप रहे। नेता अपने बेतुके बयानों के चलते सरकार की भी फजीहत करवाते हैं।

 

By-ABP NEWS

अनु दूबे का कहना है कि थाने में लेकर जाकर तीन लेडी कांस्टेबल मेरे ऊपर चढ़ी थी। वो मुझसे कुछ जानकारी मांग रहे थे तो मैंने कहा था बाहर जाकर बोलूंगी। इस पर उन्होंने मुझे बहुत मारा। अनु ने कहा कि ये मेरे बारे में नहीं है वो लड़की मर गई। मैं मरना नहीं चाहती और नहीं चाहती हूं कि अब कोई रेप की घटना हो। इसलिए मैं प्रदर्शन कर रही थी। जब इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को पता चला वह अनु दूबे की मदद के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंची।

स्वाति मालीवाल ने कहा कि अनु दूबे को पुलिस ने मारा है। दिल्ली पुलिस को शर्म आनी चाहिए। अनु को थप्पड़ और नाखून मारे गए और दोबारा प्रर्दशन करने से रोका गया। उन्होंने कहा कि अनु को धक्के मार के लिटाया गया और फिर उस पर तीन लेडी कांस्टेबल चढ़ गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और तीन अफसरों को बर्खास्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक लड़की अपनी आवाज नहीं उठा सकती है। नेता तो कुछ करते नहीं है और आज का युवा आवाज उठाता है तो उसकी आवाजा को तो उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है। दिल्ली पुलिस पर धिक्कर है।
अनु दुबे के शरीर पर चोट के निशान हैं।

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