अखण्ड भारत

‘जो करना है कर लो, अब डरने का मन नहीं करता’, संसद के बाहर बैठी दिल्ली की बेटी ने दागे सवाल

हैदराबाद में एक युवती के साथ दुष्कृत्य और फिर जलाकर मार देने की घटना से देश के जनमानस की भावनाओं में उबाल आ गया है। दिसंबर 2012 की यादें ताजा हो गई हैं। लोग सड़कों पर निकल आए हैं और सोशल मीडिया पर सरकार-प्रशासन के दावों की पोल खुलने लगी है। सूचना प्रौद्योगिकी के विख्यात शहर रातों-रात सुर्खियों में आ गया है। दुष्कर्म के आरोपियों के लिए कठोरतम कानून और सजा की मांग ने फिर से जोर पकड़ लिया है।

 

ऐसे में दिल्ली की एक बेटी का गुस्सा फूटा और वो शनिवार सुबह सात बजे लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर के सामने पहुंच गई अपना दर्द लेकर। उसके हाथों में तख्ती थी, जिस पर लिखा था, ‘जो करना है कर लो, अब डरने का मन नहीं करता।’ यह केवल दर्द नहीं बल्कि वो कटु सच्चाई है, जिससे समाज-सरकार और प्रशासन ने मुंह मोड़ रखा है। अनु दुबे की बात सुनने और उसका जवाब देने के बजाय दिल्ली पुलिस ने उसे खदेड़ दिया।

 
स्वाति मालिवाल ने बताया पुलिस ने अनु की पिटाई की
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने बताया कि वह अनु से मिलीं और उसने बताया कि पुलिस ने उसके साथ बर्बरता की। अनु ने स्वाति को बताया कि थाने में मौजूद एक बिस्तर पर उसे धकेला गया और तीन महिला हवलदारों ने उसके ऊपर चढ़कर पीटा और धमकाया। पुलिस ने उससे लिखित में ये लिया है कि अब वह संसद के बाहर प्रदर्शन नहीं करेगी। स्वाति मालिवाल ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कर अनु के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसवालों को सस्पेंड करने की मांग की है।

 
अनु क्यों कर रही है प्रदर्शन और क्या है उसका कहना
अनु का कहना है कि ये सिर्फ हैदराबाद वाले मामले के खिलाफ नहीं है बल्कि दुष्कर्म के सभी मामलों के खिलाफ और महिला सुरक्षा के लिए प्रदर्शन है। अनु दुबे ने महिलाओं और लड़कियों से अपील भी कि है कि अगर आपके साथ कुछ गलत हो रहा है तो आप मुझे बताइए मैं आपके लिए प्रदर्शन करूंगी। उन्होंने बताया कि वो लगातार दुष्कर्म के मामले देख-देख कर थक गई थीं इसलिए अब प्रदर्शन कर रही हैं।

 

गिरफ्तारी से पहले एक न्यूज चैनल ने अनु से बात की तो उन्होंने कहा कि हैदराबाद में वो जली है, कल मैं भी जलूंगी लेकिन मैं लड़ूंगी। उन्होंने ये कहा कि बस अब डरने का मन नहीं करता। क्या मेरा भी बाकियों जैसा हाल होगा।

 

 

नहीं करना मुझे अब कोई नाटक-नौटंकी। जाओ कर लो बात मंदिर-मस्जिद की। बड़े लोग हो आप, हम छोटे लोगों को बस खुल के सांस लेने दो। कुछ दिन पहले मैं बाइक के साइलेंसर से जल गई थी, बहुत दर्द हुआ। अब जब तुम्हारे बारे में सुना तो रुकने का मन नहीं करता।

 

 

 

क्या है हैदराबाद का पूरा मामला

हैवानियत की पराकाष्ठा से आगे जाते हुए हैदराबाद में कुछ लोगों ने एक युवा महिला पशुचिकित्सक (27) के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और फिर उसे जिंदा ही जला दिया। इसके बाद उसकी अधजली लाश को पुल से नीचे फेंक दिया गया।

 

 

जिस तरह निर्भया को मदद का भरोसा देकर बस में बैठा लिया गया था, उसी तरह मदद का झांसा यहां भी देकर इंसानियत को शर्मसार कर दिया गया। यहां के शादनगर थाने में हुई इस घटना के प्रकाश में आने के बाद शुक्रवार को पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

 

 

आरोपी पेशे से ट्रक ड्राइवर और उसके सहायक हैं। इस पशुचिकित्सक का शव शादनगर के बाहरी इलाके में बृहस्पतिवार को बरामद हुआ था। पुलिस को शक है कि इस पशुचिकित्सक के साथ दुष्कर्म करने के बाद हत्या की गई है।

 

 

इस पीड़िता की छोटी बहन ने पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा था कि बुधवार रात नौ बजकर 22 मिनट पर उसकी इस बड़ी बहन से बात हुई थी और उसने कहा था कि वह एक टोल प्लाजा के पास है और किसी ने उसकी स्कूटी के टायर की हवा निकली होने की बात कह कर मदद की पेशकश की थी।

 
गृहराज्य मंत्री ने कहा दोषियों का हो सामाजिक बहिष्कार

गृहराज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह तेलंगाना सरकार के संपर्क में हैं ताकि दोषियों को मृत्युदंड दिलवाया जा सके। उन्होंने कहा कि मामले में लिप्त लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए और किसी वकील को उनका मुकदमा नहीं लड़ना चाहिए।

 

 
सोशल मीडिया पर आया उबाल
इस घटना के सामने आने के बाद से पूरे देश में आक्रोश फैल गया। लोगों ने ट्विटर, फेसबुक जैसे माध्यमों से अपनी नाराजगी प्रकट की। इनमें केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, खिलाड़ी साइना नेहवाल जैसी बड़ी हस्तियां भी शामिल हैं। ट्विटर पर टॉप तीन ट्रेंड इस मामले को लेकर रहे।

 
महिला आयोग ने जांच समिति गठित की
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस नृशंस हत्याकांड के लिए जांच समिति का गठन कर दिया है। चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कहा कि आयोग दोषियों को सजा दिलाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेगा। आयोग ने उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है जिन्होंने पीड़िता के पिता की मदद करने से इंकार कर दिया था।

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