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‘संविधान बचाने’ के नाम पर संविधान का उल्लंघन तो नहीं कर रहे आप?

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट  का कहना है कि संविधान में सभी को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार दिया गया है. अगर कोई विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव, तोड़फोड़, आगजनी, बलवा और दंगा करता है या फिर कानून को अपने हाथ में लेता है, तो वह विरोध प्रदर्शन असंवैधानिक हो जाता है.

 

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•संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिला है शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार

•विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और दंगा करना संविधान के खिलाफ है

• भारत में चलता है सिर्फ कानून का राज, किसी को हिंसा की इजाजत नहीं।

 

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सच के साथ|नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) को लेकर पिछले दो दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों में जोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. वो संविधान को बचाने के लिए सड़क पर निकले हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का यह भी दावा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक और सरकार की नीतियों का विरोध करना उनका मौलिक अधिकार है.

 
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट  का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 19 में सभी को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार है. हालांकि, हिंसा करने की किसी को इजाजत नहीं दी जा सकती है. जब तक कोई विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से किया जाता है, तो वह संविधान के दायरे में आता है.

 

 
अगर कोई विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव, तोड़फोड़, आगजनी, बलवा और दंगा करता है या फिर कानून व्यवस्था को बिगाड़ता है और कानून को अपने हाथ में लेता है, तो वह विरोध प्रदर्शन असंवैधानिक हो जाता है. यह उस संविधान का उल्लंघन है, जो सभी नागरिकों शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन समेत सभी मौलिक अधिकार देता है.

 

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विरोध प्रदर्शन के नाम पर दंगा, आगजनी और पथराव करना अपराध

 

सीनियर एडवोकेट जितेंद्र मोहन शर्मा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर दंगा, बलवा, आगजनी और पथराव करना भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी के तहत अपराध है. इसके लिए सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना भी अपराध है. सुप्रीम कोर्ट भी अपने फैसलों में साफ कह चुका है कि अगर कोई विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उससे संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली की जा सकती है.

 

 
कैसे करें सरकार की नीतियों और फैसलों का विरोध?
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट जितेंद्र मोहन शर्मा का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है. एक सवाल के जवाब में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट शर्मा ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम या सरकार का कोई कदम संविधान के खिलाफ है, तो उस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की जानी चाहिए. इसको लेकर सरकार और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना चाहिए और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करना चाहिए.

 

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हिंदुस्तान में चलता है कानून का राज, हिंसा की इजाजत नहीं
उन्होंने कहा कि इसके अलावा नागरिकता संशोधन अधिनियम या सरकार की नीतियों के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. हिंदुस्तान लोकतांत्रित देश है और यहां कानून का राज चलता है. कानून से ऊपर न सरकार है, न संसद है और न ही न्यायपालिका. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, बलवा, आगजनी, पथराव या गुंडागर्दी करने वाले लोग संविधान बचाने की बजाय खुलेआम संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं. कोई भी लोकतांत्रित देश इसकी इजाजत नहीं दे सकता है.

 

 
नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर हिंसा
आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर हिंदुस्तान हिंसा की आग में जल रहा है. उत्तर प्रदेश से लेकर कर्नाटक और महाराष्ट्र से लेकर गुजरात तक नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जा रहा है. लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन की आड़ में अपने नागरिक कर्तव्यों को आग लगा रहे हैं और संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और पुलिस पर पथराव किया जा रहा है. इस हिंसक प्रदर्शन में कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हो चुके हैं. वाहनों में आग लगाई जा रही है.

 

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