क्राइम्स

बस्ती:निर्भया कांड आरोपी पवन के पैतृक गांव में सन्नाटा, फांसी को मौन स्वीकृति

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बस्ती|देश को झकझोर देने वाले निर्भया कांड के एक आरोपी पवन गुप्ता उर्फ कालू के पैतृक गांव लालगंज थानांतर्गत जगन्नाथपुर में मंगलवार को फांसी की सजा पर मुहर लगने के बाद सन्नाटा पसरा रहा। पवन के बारे में चर्चा करने से लोगों ने परहेज किया तो 22 जनवरी 2020 को फांसी की सजा बरकरार रखने का मौन समर्थन किया। मौजूदा समय परिवार में केवल महिलाएं हैं। पवन की दादी मेवाती देवी को हमेशा से उसके बरी होने की उम्मीद रहती थी, लेकिन उम्मीदों के बीच जनवरी 2018 में उनकी मौत हो गई।

 

 

बस्ती के कुदरहा विकास खंड स्थित जगन्नाथपुर निवासी पवन गुप्ता के पिता हीरालाल परिवार के साथ दिल्ली में सेक्टर-1 आरके पुरम में रहकर फल बेचने का काम करते हैं। पवन भी उनका साथ देता था। दो भाई व दो बहन में वह सबसे बड़ा था। करीब तीन दशक पूर्व पैतृक गांव स्थित मकान छोटे भाई को देकर हीरालाल ने महादेवा चौराहे के पास हटवा गांव में भी एक जमीन ली। वहां मकान बनाना शुरू किया था। लेकिन 16 दिसम्बर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद से निर्माण कार्य ठप हो गया। मौजूदा समय अर्द्धनिर्मित मकान खंडहर जैसा दिखता है।

 

 
पवन के चाचा जुग्गीलाल व सुभाषचन्द्र भी दिल्ली में रहकर फल बेचने का काम करते हैं। उनके परिवार के सदस्य गांव जगन्नाथपुर में रहते हैं। निर्भया कांड के बाद मां मेवाती देवी की मौत पर हीरालाल एक बार अपने गांव जगन्नाथपुर आए थे। मां के क्रिया-कर्म के बाद दिल्ली लौट गए।

 

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निचली अदालत ने 10 सितम्बर 2013 में जब पवन को फांसी की सजा सुनाई तो गांव में लोगों ने समर्थन किया लेकिन दादी को उसके रिहा होने की उम्मीद थी। 13 मार्च 2014 में हाईकोर्ट व 27 मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा बरकरार रखी। अब दया याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट के बाद गृह मंत्रालय एवं राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के बाद 22 जनवरी 2020 को फांसी तय हो गई है। फांसी दिए जाने की मुद्दे पर गांव में कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। अलबत्ता हर किसी ने फैसले को मौन स्वीकृति दे दी है।

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