अच्छी सोच

गोरखपुर:डेढ़ साल में बन कर तैयार हो जाएगा रेलवे बस स्टेशन का नया भवन- जयदीप वर्मा

गोरखपुर|पीपीपी मॉडल में प्रस्तावित रेलवे बस स्टेशन का नया भवन डेढ़ साल में बन कर तैयार हो जाएगा। तय समय सीमा में निर्माण पूरा नहीं हुआ तो एजेंसी के खिलाफ जुर्माना होगा। यह बातें नोडल अधिकारी जयदीप वर्मा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहीं।

 
नोडल अधिकारी ने बताया कि राप्तीनगर वर्कशॉप में काम चल रहा है। इसके बाद रेलवे बस स्टेशन का पीपीपी मोड में निर्माण होगा। बस स्टेशन का निर्माण फर्म को 18 माह में हर हाल में करना होगा। इसमे लेट होने पर जुर्माना लगाया जाएगा। रेलवे बस स्टेशन को तोड़कर इसके 30 प्रतिशत जगह पर निर्माण किया जाएगा। बाकी जगह बसों को खड़ा करने के लिए खाली रहेगी। श्री वर्मा ने बताया कि परिवहन निगम के बेड़े में एक साथ 2500 जनरथ बस टू बाई टू, 50 वॉल्वो लक्जरी बस और 300 ऑर्डिनरी बसें 31 मार्च तक शामिल हो जाएंगी।

 
इसके बाद इसे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जरूरत के हिसाब से दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बसों में सेफ्टी के लिए एसएलडी लगा दिए गए हैं। अब बसें 80 की स्पीड से अधिक नहीं भाग पाएंगी। चालक और परिचालक भी एक ड्रेस में रहेंगे। इसके साथ ही उन्हें जूता भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनका ‘मील ऑन एप’ भी शुरू कर दिया गया है। अब बस में बैठकर आप खाना भी बुक कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में परिवहन निगम द्वारा लगाए गए कैंप में 37 ड्राइवर ऐसे मिले। जिन्हें एकदम कम दिखता था, उन्हें हटाया गया है। श्री वर्मा ने परिवहन निगम ही एक ऐसा निगम है, जो पांच साल से फायदे में चल रहा है। इस बार करीब 100 करोड़ रुपए का लाभ परिवहन निगम को हुआ है।

 

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जानिए, क्‍या होता है पीपीपी मॉडल और इससे क्या होता है फायदा

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत सरकार निजी कंपनियों के साथ अपनी परियोजनाओं को अंजाम देती है। देश के कई हाईवे इसी मॉडल पर बने हैं। यह एक ऐसा करार है, जिसके द्वारा किसी जन सेवा या बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन की व्यवस्था की जाती है। इसमें सरकारी और निजी संस्थान मिलकर अपने अनुभवों का प्रयोग करते हैं और पहले से निर्धारित लक्ष्य पर काम करते हैं और उस हासिल करते हैं। पीपीपी की जरूरत इसलिए पड़ती है, क्योंकि सरकार के पास इतना धन नहीं होता है, जिससे वह हजारों करोड़ रुपयों की घोषणाओं को पूरा कर सके। ऐसी स्थिति में सरकार प्राइवेट कंपनियों के साथ करार कर लेती है और इन परियोजनाओं को पूरा करती है।

 

 

क्या हैं पीपीपी मॉडल के फायदे- => पीपीपी मॉडल अपनाने से परियोजनाएं सही लागत पर और समय से पूरी हो जाती हैं। => पीपीपी से काम समय से पूरा होने के कारण निर्धारित परियोजनाओं से होने वाली आय भी समय से शुरू हो जाती है, जिससे सरकार की आय में भी बढ़ोत्तरी होने लगती है। => परियोजनाओं को पूरा करने में श्रम और पूंजी संसाधन की प्रोडक्टिविटी बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। => पीपीपी मॉडल के तहत किए गए काम की क्वालिटी सरकारी काम के मुकाबले अच्छी होती है और साथ ही काम अपने निर्धारित योजना के अनुसार होता है।

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