अखण्ड भारत

National Youth Day 2020: 12 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय युवा दिवस, जानें इसका महत्त्व व इतिहास

National Youth Day 2020: राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्कूल और कॉलेज में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाता है। इस दिन युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और आदर्शों के बारे में युवाओं को बताया जाता है।

 

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राष्ट्रीय युवा दिवस 2020 : राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी के दिन मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1984 में इसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसे मानाने का मुख्य उद्देश्य भारत के महानतम समाज सुधारक, विचारक और दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों और विचारों को देश भर के भारतीय युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना है और ताकि वो इन्हें अपने जीवन में शामिल कर सकें।

 

 

विवेकानंद जी के बारे में मुख्य बातें:
1. विवेकानंद जी का जन्म सन 1863 में एक कुलीन परिवार में हुआ था।

2. स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेंद्र था। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनने के बाद, स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की स्थापना की।

3. स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन का मुख्य सहज भाषण, शिकागो में 11 सितंबर 1893 में आयोजित विश्व संसद में दिया था। 4 जुलाई 1902 को स्वामी विवेकानंद ने 39 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।

 

 

4. स्वामी विवेकानंद हमेशा हर व्यक्ति को सक्रिय जीवन के लाभों के साथ-साथ जानवरों, गरीबों और बीमार लोगों की देखभाल करने के लिए प्रेरित करते थे, उनका मानना था कि ऐसा करने से कोई भी भगवान की सेवा कर सकता है। स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि लोग केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित न रहें, बल्कि सम्पूर्ण संसार का ज्ञान ग्रहण करें।

 

 

इस तरह से मनाते हैं राष्ट्रीय युवा दिवस:
इस दिन देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में खास इंतजाम किया जाता है, वास्तव में यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर भारत में कई तरह की गतिविधियाँ आयोजित की जाती है। इस मौके पर स्कूल और कॉलेज में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी कराया जाता है। भाषण, पाठ, युवा सम्मेलन, प्रस्तुतियाँ, युवाओं के उत्सव, प्रतियोगिताएँ, संगोष्ठियों, खेल आयोजन, योग सत्र, संगीत प्रदर्शन आदि छात्रों से कराए जाते हैं।

 

राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day 2020) पर शिक्षक, छात्रों को स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और आदर्शों के बारे में बताते हैं। बता दें रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की विभिन्न इकाइयों में राष्ट्रीय युवा दिवस को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। देश के विभिन्न एनजीओएस (गैर-सरकारी संगठन) भी राष्ट्रीय युवा दिवस को एक त्यौहार की तरह ही मनाया जाता हैं।

 

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राष्ट्रीय युवा दिवस: पढ़ें स्वामी विवेकानंद के शिकागो में दिए भाषण की खास बाते

12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में जन्मे नरेंद्र नाथ आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से मशहूर हुए। उनके जन्म जयंती पर देश में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। विवेकानंद की जब भी बात होती है तो अमरीका के शिकागो की धर्म संसद में साल 1893 में दिए उनके भाषण की चर्चा जरूर होती है।

 

 

ये वो भाषण है जिसने पूरी दुनिया के सामने भारत को एक मजबूत छवि के साथ पेश किया। लेकिन भाषण में उन्होंने क्या कहा इसके बारे में कम ही लोग बता पाते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं उनके भाषण की खास बातें

 

 

ये हैं स्वामी विवेकानंद के उस भाषण की खास बातें:
1. अमरीकी भाइयों और बहनों, आपने जिस स्नेह के साथ मेरा स्वागत किया है उससे मेरा दिल भर आया है। मैं दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा और सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं। सभी जातियों और संप्रदायों के लाखों-करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं।

 

 

2. मैं इस मंच पर बोलने वाले कुछ वक्ताओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने यह जाहिर किया कि दुनिया में सहिष्णुता का विचार पूरब के देशों से फैला है।

 

 

3. मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं।

 

 

4. मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी। मुझे गर्व है कि हमने अपने दिल में इजराइल की वो पवित्र यादें संजो रखी हैं जिनमें उनके धर्मस्थलों को रोमन हमलावरों ने तहस-नहस कर दिया था और फिर उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली।

 

5. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं जिसने पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और लगातार अब भी उनकी मदद कर रहा है।

 

 

6. मैं इस मौके पर वह श्लोक सुनाना चाहता हूं जो मैंने बचपन से याद किया और जिसे रोज करोड़ों लोग दोहराते हैं, जिस तरह अलग-अलग जगहों से निकली नदियां, अलग-अलग रास्तों से होकर आखिरकार समुद्र में मिल जाती हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा से अलग-अलग रास्ते चुनता है। ये रास्ते देखने में भले ही अलग-अलग लगते हैं, लेकिन ये सब ईश्वर तक ही जाते हैं।

 

 

7. मौजूदा सम्मेलन जो कि आज तक की सबसे पवित्र सभाओं में से है, वह अपने आप में गीता में कहे गए इस उपदेश इसका प्रमाण है: जो भी मुझ तक आता है, चाहे कैसा भी हो, मैं उस तक पहुंचता हूं। लोग अलग-अलग रास्ते चुनते हैं, परेशानियां झेलते हैं, लेकिन आखिर में मुझ तक पहुंचते हैं।

 

 

8. सांप्रदायिकता, कट्टरता और इसके भयानक वंशजों के धार्मिक हठ ने लंबे समय से इस खूबसूरत धरती को जकड़ रखा है। उन्होंने इस धरती को हिंसा से भर दिया है और कितनी ही बार यह धरती खून से लाल हो चुकी है। न जाने कितनी सभ्यताएं तबाह हुईं और कितने देश मिटा दिए गए।

 

 

9. यदि ये खौफनाक राक्षस नहीं होते तो मानव समाज कहीं ज्यादा बेहतर होता, जितना कि अभी है। लेकिन उनका वक्त अब पूरा हो चुका है। मुझे उम्मीद है कि इस सम्मेलन का बिगुल सभी तरह की कट्टरता, हठधर्मिता और दुखों का विनाश करने वाला होगा। चाहे वह तलवार से हो या फिर कलम से।

 

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