अखण्ड भारत

वामपंथ और दक्षिणपंथ क्या है? जानिए

वामपंथ और दक्षिणपंथ (Left Wing & Right Wing)

सच के साथ:वंदे मातरम मित्रों! बहुत दिनों से आप सब की ये मांग थी कि वामपंथ, आदर्श उदारवादी और छद्म बुद्धजीवियों पर एक श्रृंखला शुरू की जाए जिसमें उनके दोहरे चरित्र को जनता के सामने रखा जाये। मित्रों! हमने आज से ये श्रृंखला शुरू की है और ये उसकी प्रथम कड़ी है। भारत में अगर आप किसी राजनैतिक पार्टी के समर्थक हैं तो मीडिया आपके ऊपर एक विचारधारा का एक लेबल लगा देती है और आप भी बिना ये जाने कि उस विचारधारा से आप वाकई वास्ता रखते हैं, उसको यथावत मान लेते हैं। प्रथम लेख का यही उद्देश्य है कि पहले आप अपनी विचारधारा और अपनी राजनैतिक पार्टी की विचारधारा तो समझें उसके बाद ही उस लेबल स्वयं से जोड़े। दरअसल इसे मीडिया की बेवकूफी कहें या पहले से तय प्रोपेगैंडा कि लोगों को गुमराह कैसे किया जाए? चलिये विस्तार से नजर डालते हैं पोलिटिकल स्पेक्ट्रम पर…

 

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मैंने एक बहुत ही साधारण पोलिटिकल स्पेक्ट्रम लिया है जोकि रैखिक बदलती विचारधाराओं को दर्शाता है। इसमें अगर हम मध्य में हैं तो इसका मतलब ये है कि न तो आप दक्षिणपंथी हो न ही वामपंथी; आपकी विचारधारा मध्यमार्गी है हालांकि ऐसा हक़ीक़त में कोई नहीं होता। इसके बाद यदि हम लेफ्ट यानि वायीं तरफ जाते हैं तो ‘सेंटर-लेफ्ट‘ यानि उदारवादी सोच के कहलाते हैं। यदि थोड़े से और वायीं तरफ जाते हैं तो ‘फार-लेफ्ट‘ यानि समाजवादी सोच के कहलाते हैं और यदि पूरी तरह वायीं छोर पर आ गए तो ‘एक्सट्रीम-लेफ्ट‘ यानि कम्युनिस्ट बन जाते हैं। इसके विपरीत यदि हम दायीं तरफ जाना शुरू करेंगे तो पहले ‘सेंटर-राइट‘ यानि कंज़र्वेटिव (रूढ़िवादी) , थोड़ा और वायीं तरफ जाने पर लिबेरलटेरियन और एकदम अंत में जाने पर ‘एक्सट्रीम-राइट‘ यानि फासिज्म विचारधारा होती हैं। ये तो मैंने बस एक रैखिक स्पेक्ट्रम के बारे में बताया अगर हम इसे चार अक्षों में विभाजित करें तो X-अक्ष पर सामाजिक विचारधारा और Y-अक्ष पर आर्थिक विचारधारा लेते हैं और उसके बाद हमारा ग्राफ लगभग ऐसा हो जाएगा –

 

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इसमें Y अक्ष ये दर्शा रहा है कि देश में सरकार का आर्थिक नियंत्रण कितना रहना चाहिए और X-अक्ष ये दिखा रहा है कि लोगों की स्वतंत्रता में देश का हस्तक्षेप कितना रहना चाहिए।

 

इससे पहले कि मैं इन विचारधाराओं के बारे एक एक करके बताऊं, आपके दिमाग में आ रहा होगा कि इस प्रकार की विचारधारा को लेफ्ट यानि वायें तरफ ही क्यों लेते हैं? दरअसल इसका कोई तार्किक कारण नहीं है।

 

 

ये नजारा है तत्कालीन फ्रांस की क्रांति के दौरान फ़ांस के दरबार का जिसे फ्रांस की नेशनल असेम्बली भी कहा गया। इसमें वाएँ तरफ वो लोग बैठे थे जो राजशाही से तंग थे, बदलाव चाहते थे और क्रांति के प्रबल पक्षधर थे इसके विपरीत दायीं तरफ चर्च के विशप, और राजशाही के सामंत थे जो जैसे परम्परा चलती आई है उसी को चलाने के पक्ष में थे। इसी कारण ये लेफ्ट-राइट शब्द पूरी दुनियां में धीरे धीरे लोकप्रिय हो गए।

चलिये अब एक एक करके इन विचारधाराओं पर नजर डालते हैं और देखते हैं वैश्विक स्तर पर या भारत में इन जैसे विचारों की राजनैतिक पार्टियां कौन कौन सी हैं?

 

 

वामपंथ की अगर नीतियों की बात करें तो इनकी नीतियां हैं :

समानता : समाज में सब लोगों के साथ एक जैसा बर्ताव होना चाहिए। याद दिलाना चाहूंगा भारतीय संविधान ये सुनिश्चित करता है कि देश में भारत में सभी नागरिकों के साथ समान रूप से व्यवहार किया जा रहा है।
राष्ट्र में धर्म और सरकार अलग अलग रहेंगे। ये विचार फ्रांस की क्रांति से निकल कर आया था। इसका उदाहरण आप चीन जैसे देश में देख सकते हैं जहां की सरकार लगभग नास्तिक है, सभी धर्मों के हस्तक्षेप को नकार देती है। वही अगर भारत की बात करें तो सनातन संस्कृति की ये परम्परा रही है कि यहां जो भी लोग आए हैं हमने उन्हें उनके धर्म को मानने की स्वतंत्रता दी है। इसी विचार को आगे रखते हुए, भारतीय संविधान सबको अपने अपने धार्मिक रीतिरिवाज पालन करने की स्वतंत्रता देता है। भारत सरकार धर्मनिरपेक्ष है; यही वजह है कि भारत में सभी धर्मों के लोग रह रहे हैं। भारतीय नागरिक चीनी लोगों की अपेक्षा धार्मिक रूप से स्वतंत्र हैं।

 

 
केंद्रीय योजनाएं : राष्ट्र की नीतियां ऐसी हों कि कहां और किस योजना में कितना कितना धन खर्च होना चाहिए, ये सब सरकार तय करेगी; बाजार नहीं। याब अगर भारत की बात करें तो भारत सरकार ने ये सभी नीतियां पहले से ही लागू कर रखी हैं, बस अभी पेट्रोलियम के मूल्य बाजार पर स्वतंत्र छोड़ दिये गए हैं लेकिन उसमें भी सरकार का हस्तक्षेप है।
अर्थव्यवस्था में सरकार का हस्तक्षेप : अर्थशास्त्री कीन्स का मानना था कि सरकार को देश की अर्थव्यवस्था में हस्तक्षेप रखना चाहिए ताकि कभी अर्थव्यवस्था चरमराने की स्थिति में न पहुंच जाए।

 
कल्याणकारी राष्ट्र : सभी वामपंथी ये मानते हैं कि राष्ट्र की योजनाएं जन कल्याण के लिए होनी चाहिए। अब अगर भारत की बात करें तो सरकार ने मनरेगा, आयुष्मान भारत जैसी तमाम कल्याणकारी योजनाएं पहले से चला रखी हैं जिनका खर्च सरकार बहन करती है।

 
स्वतंत्र व्यापार का विरोध : वामपंथी हमेशा से स्वतंत्र व्यापार के खिलाफ रहे हैं इसका मुख्य कारण ये है कि ये नहीं चाहते कि स्थानीय व्यापारी और उत्पादक उत्पादों पर किसी प्रकार की समस्याओं का सामना करें। अब अगर भारत की बात करें तो आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि यहां कथित दक्षिणपंथी संगठन जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो स्वदेशी आंदोलन चलाते हैं जिससे कि चीनी सामान हमारे स्वदेशी सामानों की जगह न ले लें वहीं वामपंथी अपनी ही विचारधारा के उलट इसका विरोध केवल इसलिए करते हैं क्योंकि चीन एक कम्युनिस्ट देश है।

 

 

इसके अलावा वामपंथी विचारधारा ये भी है कि विदेशी वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाया जाए जिससे कि उनके उत्पाद और स्थानीय स्वदेशी उत्पाद के मूल्य एक जैसे हो जाएं। हाल की परिस्थितियों में कथित रूप से दक्षिणपंथी विचारधारा की सरकार यानि मोदी सरकार ने जब अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स लगाया तो वामपंथी अपनी ही विचारधारा के खिलाफ जाकर आलोचना करने लगे।

सामाजिक धारणाएं : ये लोग बदलते परिवेश को लेकर चलते हैं। इन्हें समलैंगिक विवाह से कोई दिक्कत नहीं, इन्हें प्रवासियों से कोई दिक्कत नहीं, इन्हें मौत की सजा से भी समस्या है।

 
दरअसल, वामपंथ इधर कोई परिभाषित धारणा लेकर नहीं आता। भारत की बात करें तो यहां आदिकाल से ही लोगों को लैंगिक स्वतंत्रता मिली हुई थी। हमें प्रवासियों से कभी कोई दिक्कत नहीं रही; यूनानी, पारसी, यहूदी जैसे कई लोग यहां रहते आये हैं। मौत की सजा की बात करें तो भारत में जानवरों से भी दया का भाव रखा जाता रहा है लेकिन देशद्रोह, आतंकवाद, बलात्कार जैसे मुद्दों पर मौत की सजा का विरोध करना कहाँ तक तर्कसंगत है?

वामपंथ की ये सभी विचारधाराओं पर लगभग चालीस साल तक कांग्रेस सरकार चली है। बाद के सालों में भारतीय राजनीति में सैद्धांतिक बदलाव देखने को मिले हैं।

भारत की बात करें तो कांग्रेस की विचारधारा ‘सेंटर-लेफ्ट’ की है। आम आदमी पार्टी कांग्रेस से थोड़ी से ज्यादा है लेफ्ट की तरफ़ है। धुर वामपंथी पार्टियां सीपीआई और सीपीआई (मार्क्सवादी) हैं। अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी और यूनाइटेड किंगडम की लेबर पार्टी भी कांग्रेस जैसी ‘सेंटर लेफ्ट’ है।

 

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दक्षिणपंथ : ‘सामाजिक रूढ़िवाद और आर्थिक उदारवाद’ पर चलने वाले दक्षिणपंथ के मूलतः सिद्धांत हैं –

लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था में सरकार का का हस्तक्षेप सीमित हो, ये दक्षिणपंथ का मूल सिद्धांत है। सरकार ऐसी भी न हो कि लोगों को खुद के निर्णय न लेने दे जैसे वामपंथी चीनी सरकार और सरकार ऐसी भी न हो कि बाजार पर नियंत्रण करे। यही वजह है कि मुक्त बाजार के सिद्धांत पर अंतर्राष्ट्रीय दक्षिणपंथी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अपना समर्थन देते हैं। इधर मैं ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा कि भारत में दक्षिणपंथी आरएसएस विदेशी निवेश के खिलाफ मुखर रहा है। कथित दक्षिणपंथी मोदी सरकार में कई पुरानी नियम कानूनों को बदला गया है जिससे कि लोग अपना रोजगार स्वयं पैदा कर सकें और बाजार स्वतंत्र हो।

 
राष्ट्रवादी : राष्ट्र सर्वोपरि, जिस देश में निवास करते हैं, उसे देश से प्यार करेंगे। सच्चे देशभक्त होना ही राष्ट्रवाद से ओतप्रोत करता है। इसी सोच को जब अति तक ले जाया जाए तब ‘फासिज्म’ का जन्म होता है। हिटलर और मुसोलिनी को फासिज्म का प्रणेता माना जाता है। वही भारत में भी आरएसएस, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी भी राष्ट्रवाद के सिद्धांत पर चलती है। और चलना भी चाहिए, क्योंकि देश हित सर्वोपरि है।

 
व्यक्तिगत स्वतंत्रता : ये सिद्धांत अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी पर ज्यादा लागू होता है जो यह मानती है कि लोगों को उनकी स्वतंत्रता का अधिकार मिलना चाहिए। भारतीय संविधान ये अधिकार अपने नागरिकों को देता है।

 

 
धार्मिक रूढ़िवाद और परंपरा : दक्षिणपंथ में धर्म को विशेष दर्जा दिया गया है। यही वजह है धार्मिक प्रतीकों, परम्पराओं और संस्कृति को लेकर यहां समझौते की कोई गुंजाइश नहीं रहती। पर्यटन को बढ़ावा देने की सोच दक्षिणपंथ में मिलेगी लेकिन संस्कृति से कोई समझौता नहीं।

 

 
सबका साथ, सबका विकास – अल्पसंख्यकों को कोई विशेषाधिकार नहीं : ये बात हमारा संविधान भी सुनिश्चित करता है लेकिन विशेष प्रोविजन जोड़कर उसका महत्व समाप्त किया जा चुका है। दक्षिणपंथ में लोग सबको एक नजरिये से देखने की वकालत करते हैं ऐसा नहीं कि कोई विशेषाधिकार का लाभ ले रहा हो। भारत में यही वजह है कि आरक्षण, हज सब्सिडी वगैरह पर दक्षिणपंथी संगठन मुखर है।

 

 
अर्थव्यवस्था में जरूरी बदलाव – निजीकरण की नीति : दक्षिणपंथी विचारधारा आर्थिक क्षेत्र में निजी क्षेत्रो को बढ़ावा देती है, स्वतंत्रत बाजार की सोच को बढ़ावा देती है। अब अगर भारत की बात की जाए, तो निजीकरण की नीति कांग्रेस शासन में तब शुरू हुई जब हमारी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमराने लगी थी, और मनमोहन सिंह की बाकी की कहानियां तो सब ने सुन रखी होंगी। यहां मैं ध्यान यहां आकृष्ट करूँगा कि सेंटर-लेफ्ट कांग्रेस ने अपनी नीति बदलकर दक्षिणपंथी अर्थव्यवस्था को लागू करना शुरू किया। हम अभी की बात करें तो मोदी सरकार की नीतियां मिश्रित हैं, स्वतंत्र बाजार को लेकर दक्षिणपंथी विचारधारा है तो वहीं जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाएं वामपंथ की सोच को भी बताती हैं।मैं व्यक्तिगत रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा प्रशंसक हूँ जहां पर दक्षिणपंथ और वामपंथ दौनों से ही अच्छी चीजें आत्मसात करके मिश्रित व्यवस्था बनाई गई है।

 
कम से कम कर :दक्षिणपंथी विचारधारा में जनता से टैक्स कम लेने की है इसलिए जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार आई तो वहाँ टैक्स कम किये गए। भारत में भी मोदी सरकार ने GST से टैक्स रिफार्म पर काम किया।

कड़ा कानून : दक्षिणपंथी संगठन कड़े कानून में यकीन करते है। बलात्कार, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर मौत की सजा का भी प्रबल समर्थन करते हैं जबकि वामपंथी मौत की सजा के खिलाफ हैं। भारत में अफजल गुरु, याकूब मैमन और अजमल कसाब के लिए दया याचिकाएं इसी का एक उदाहरण हैं।

 
प्रवासी और शरणार्थी नीति : दक्षिणपंथ में शरणार्थियों लेकर सख्त नीति है। इसी वजह से रिपब्लिकन के डोनाल्ड ट्रम्प ने मैक्सिको बॉर्डर बनाने की बात की। मोदी सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों पर रोक लगाने की बात करती है। यूरोपीय देश जिनकी नीति सेंटर-लेफ्ट की थी वो सब दक्षिणपंथी नीति अपनाते हुए अब अपनी इमीग्रेशन पालिसी सख्त कर रहे हैं।

 
अब बात करते हैं भारत की राजनैतिक पार्टियों के बारे में तो भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा ‘सेंटर-राइट’ की है वहीं शिवसेना थोड़ी सी और राइट की तरफ है। अब जो सबसे जरूरी बात है कि भारत में अभी तक कोई फार-राइट पार्टी नहीं है जबकि फार-लेफ्ट सीपीआई और सीपीआई(मार्क्सवादी) पार्टियां हैं। भाजपा और शिवसेना को एक्सट्रेमिस्ट कहा जाता है जबकि ये सेंटर-राइट हैं जबकि ये कहने वाले वामपंथी संगठन स्वयं एक्सट्रेमिस्ट हैं।

वहीं अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी, UK में टेरिसा मे की कंज़र्वेटिव पार्टी, जर्मनी में एंजेला मर्केल की CDU और फ्रांस की नेशनल फ्रंट पार्टी दक्षिणपंथी सोच की उदाहरण है।

अभी मैंने केवल आपको बीच बीच में ये इशारा किया है कि भारत में दक्षिणपंथ और वामपंथ कितना अलग है। इस श्रृंखला की अगली कड़ी में हम भारत के राजनैतिक हालात का विश्लेषण करेंगे और देखेंगे कि क्या वास्तव में यहां की राजनैतिक पार्टियां दक्षिणपंथी या वामपंथी हैं?

 

 
भारतीय राजनीति का इतिहास बहुत ही प्राचीन है | भारतीय राजनीति में समय- समय पर परिवर्तन देखने को मिलता है | भारत की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दो पार्टियां मुख्य भूमिका निभाती है | भारत वह देश है जहाँ की परिस्थितियां बहुत ही भिन्न रही है, चाहे हिन्दू राजाओं का समय रहा हो या मुस्लिम राजाओं का समय रहा हो अथवा अंग्रेजी शासन का समय रहा हो | यहाँ पर Left Wing (वामपन्थी) और Right Wing (दक्षिणपन्थी) विचारधाराओं से परिचय कराया जा रहा हैं |

 

 

वामपंथ (Left Wing)

वामपंथ एक विचारधारा है, इसका अर्थ है कि समाज में पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाना है | इस विचारधारा के लोग जाति, वर्ण, समुदाय, राष्ट्र और सीमा को नहीं मानते है | इस विचारधारा के लोगों का मुख्य उद्देश्य पिछड़ते लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना है | इस विचारधारा के लोगों के प्रति सहानुभूति रखते है जो किसी कारणवश समाज में पिछड़ गए है और वह शक्तिहीन और उपेक्षा का शिकार हुए है |

 

 

भारत में वामपंथी दल (Left Wing)

भारत में वामपंथी दल का सबसे बड़ा उदाहरण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) है, अंग्रेजी भाषा में इसे Communist Party of India के नाम से जाना जाता है | इसे एक साम्यवादी दल के रूप में माना जाता है | आधिकारिक रूप से इसकी स्थापना 26 दिसंबर सन 1925 को हुई थी परन्तु यह अपने अपनी वास्तविक स्थापना वर्ष 1920 को मानते हैं |

 

 

दक्षिणपंथ (Right Wing)

दक्षिणपंथ विचारधारा के लोग वामपंथ विचारधारा के बिलकुल विपरीत होते है | यह धर्म में, राष्ट्र में और अपने धर्म से जुड़े रीति रिवाजों पर विश्वास करते है | इस विचारधारा के लोग सामाजिक स्तरीकरण या सामाजिक असमानता को अपरिहार्य, प्राकृतिक, सामान्य या आवश्यक मानते हैं | इस प्रकार के लोग समाज की परम्परा, अपनी भाषा, जातीयता, अर्थव्यवस्था और धार्मिक पहचान को बढ़ाने की चेष्टा करते हैं | इस विचारधारा के लोगों का मानना है कि समाज को आधुनिकता के अलावा अपने पुराने रिवाजों को साथ लेकर भी चलना चाहिये |

 

भारत में दक्षिणपंथ (Right Wing)

दक्षिणपंथ विचारधारा में कठोरता पायी जाती है | यह वामपंथी विचारधारा के बिलकुल विपरीत है | यह जमीनी स्तर पर सत्यता पूर्ण मजबूत स्थिति में है | हमारे देश में दक्षिणपंथ विचारधारा का सबसे बड़ा उदाहरण ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‘ है, अंग्रेजी भाषा में इसे Rashtriya Swayamsevak Sangh अथवा R.S.S. के नाम से जाना जाता है | यह एक एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन है | इसके सिद्धांत हिंदुत्व पर आधारित है | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 27 सितंबर 1925 को हुई थी |

 

 

वामपंथ और दक्षिणपंथ में अंतर (Difference In Left Wing & Right Wing)

वामपंथ विचारधारा के लोग जाति, वर्ण, समुदाय, राष्ट्र और सीमा को नहीं मानते है, जबकि दक्षिणपंथ विचारधारा के लोग जाति, वर्ण, समुदाय, राष्ट्र और सीमा को मानते है |

 
वामपंथ विचारधारा का मुख्य उद्देश्य पिछड़ते लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना है, जबकि दक्षिणपंथ विचारधारा के लोग सामाजिक असमानता को अपरिहार्य, प्राकृतिक, सामान्य या आवश्यक मानते हैं |
दक्षिणपंथी विचार धारा के लोग सामाजिक और पारम्परिक व्यवस्था को कायम रखना चाहते हैं बल्कि वामपंथी विचारधारा के लोग सामाजिक और पारम्परिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते है |

 

 

अन्य जानकारी  (Other Information Information)

वामपंथी दल साम्यवाद की राजनीति कई वर्षो से करते आ रहे है | वर्तमान समय में वामपन्थ विचारधारा लोकतंत्र में सफल नहीं हो पायी है | इस समय यह विचारधारा विलुप्त के कगार पर प्रदर्शित हो रही है | इस विचारधारा में राष्ट्रवाद को अपनाना निषेध है, इसी कारण से वह राष्ट्रवाद के नारों से मीलों दूर रहते है | वामपंथी दल स्वयं विभाजन के शिकार हो चुके है | प्रारम्भ में यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी थी जिसके बाद इसमें विभाजन हुआ और नया दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) बन गया | इसके बाद वह वाम मोर्चा दल में परिवर्तित हो गया |

 

यहाँ पर हमनें Left Wing (वामपन्थी) और Right Wing (दक्षिणपन्थी) विचारधाराओं के विषय में जानकारी उपलब्ध करायी है, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है, हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

 

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अगर आपको ये लेख पसन्द आया हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिये ताकि और भी लोग मीडिया द्वारा फैलाई जा रही विचारधाराओं से स्वतंत्र महसूस करें। साथ ही साथ अपने सुझाव कमेंट में दें सकते हैं।

धन्यवाद!! जय हिंद!! ????

 

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2 replies »

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