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‘एनपीआर में नहीं मांगा जाएगा बायोमीट्रिक और पैन, नहीं देना होगा कोई भी डॉक्यूमेंट

नई दिल्ली|राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर भ्रम दूर करने में जुटी सरकार ने एनपीआर फार्म में अहम बदलाव किए हैं। अब पैन की जानकारी नहीं देनी होगी साथ ही बायोमेट्रिक भी नहीं मांगा जाएगा। किसी भी तरह का दस्तावेज भी नहीं देना होगा। बस लोगों को सही जानकारी देनी होगी। गृह मंत्रालय ने बुधवार (15 जनवरी) को यह बात कही।

 

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एनपीआर में गणना अधिकारी आधार नंबर, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर मांगेंगे। सिर्फ इनकी जानकारी देनी होगी, कागज नहीं देना होगा। अगर नहीं है तो भी कोई बात नहीं। गणना अधिकारी की ओर से मांगी गई जानकारी न देने पर जुर्माने का प्रावधान है लेकिन जुर्माना लेने पर सरकार का रुख लचीला है।

 
सूत्रों ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। एनपीआर के सवालों को लेकर भी अभी फीडबैक लिया जा रहा है और जरूरी होने पर कुछ और बदलाव किए जा सकते हैं। सूत्रों ने कहा, इस बार एनपीआर में कई नए सवाल शामिल किए गए हैं। जैसे मातृभाषा क्या है, मकान मालिक पहले कहां रहते थे, उनका जन्म स्थान और अभिभावकों की जानकारी।

 

 

एनपीआर और जनगणना का फॉर्म अलग-अलग होगा। जनगणना 2021 के पहले चरण में मकानों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी जबकि दूसरे चरण में व्य्त्तित विशेष की जानकारी ली जाएगी। पहले चरण में 34 सवाल पूछे जाएंगे।

 

 

जैसे घर में इंटरनेट है या नहीं, पुरुष-महिला या ट्रांसजेंडर कौन घर का मुखिया है, पानी पीने के लिए सप्लाई पानी पर निर्भर हैं या पैकेज पानी पीते हैं। यह पहली बार पूछा जाएगा कि किस तरह का शौचालय इस्तेमाल करते हैं व्यक्तिगत, परिवार के साथ या सार्वजनिक, घर के मालिक का कहीं और घर है या नहीं, एलपीजी कनेक्शन, रेडियो ,टीवी, मोबाइल है या नहीं, बैंक अकाउंट के बारे में हर किसी से जानकारी ली जाएगी। घर में मोबाइल नंबर कितने हैं, इसकी जानकारी देना चाहें तो दे सकते हैं। पहला चरण एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरा किया जाएगा।

 

 

फरवरी 2021 से दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें घर में कितने लोग रह रहे हैं इसकी जानकारी ली जाएगी जिससे ये पता चल सके कि गणना करने वाला शख्स कितनी जनसंख्या कवर कर रहा है।

 

 

बंगाल-केरल को छोड़ सभी राज्यों ने अधिसूचना जारी की
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर मचे घमासान के बीच केरल व पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की फिर से अधिसूचना जारी की है। केरल और पश्चिम बंगाल ने केंद्र सरकार को बताया है कि वह अभी इसे लागू करने के पक्ष में नहीं हैं। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। राज्य सरकारों का यह रुख पहले से काफी अलग है। पहले तमाम राज्य सरकारों ने एनपीआर लागू नहीं करने की बात कही थी, इनमें से ज्यादातर वैसे राज्य हैं जहां विपक्षी दलों की सरकार है।

 

 

एनपीआर के लिए 3941.35 करोड़ रुपए मंजूर
एनपीआर देश में रहने वाले निवासियों का रजिस्टर है। नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम, 2003 के प्रावाधनों तहत यह स्थानीय (गांव/कस्बा) उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। नियम में इसका उल्लंघन करने वाले पर एक हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। असम को छोड़कर पूरे देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एनपीआर की कवायद वर्ष 2020 में अप्रैल से सितंबर के बीच पूरी की जानी है। एनपीआर की कवायद के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3941.35 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।

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