अच्छी सोच

ब्रू शरणार्थियों पर बड़ा एलान, मिलेगा प्लॉट, 4 लाख का फिक्स डिपॉजिट और हर महीने 5 हजार रुपये

नई दिल्ली|मिजोरम के 30 हजार से ज्यादा ब्रू शरणार्थियों को स्थायी रूप से त्रिपुरा में बसाया जाएगा। इसे लेकर गुरुवार को दिल्ली में अमित शाह और तीन पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ। केंद्रीय गृहमंत्री और प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते के तहत ब्रू शरणार्थियों को चार लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ 40 से 30 फीट का प्लॉट और दो साल तक 5,000 रुपये प्रति माह की नकद सहायता और मुफ्त राशन दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने 600 करोड़ रुपये का पैकेज देने का एलान किया है।

 

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ब्रू शरणार्थियों के प्रतिनिधियों ने त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब और मिजोरम के मुख्यमंत्री गोरमथांगा की मौजूदगी में मिजोरम से ब्रू शरणार्थियों के संकट को समाप्त करने और त्रिपुरा में उन्हें बसाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

मिजोरम के 30,000 से अधिक विस्थापित ब्रू आदिवासी जो 1997 से त्रिपुरा में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। ये अब स्थायी रूप से त्रिपुरा में बस जाएंगे। गुरुवार को इस आशय एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में हुए इस समझौते पर ब्रू समुदाय के प्रतिनिधियों और और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हस्ताक्षर किए।

 

 

शाह ने कहा कि समझौते के तहत 30 हजार से अधिक ब्रू आदिवासी त्रिपुरा में स्थायी रूप से रहेंगे। चार पक्षों में त्रिपुरा सरकार, मिजोरम सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और मिजोरम ब्रू विस्थापित जन फोरम एमबीडीएफ शामिल हैं।

 

 

कौन हैं ब्रू शरणार्थी?
ब्रू पूर्वोत्तर में बसने वाला एक जनजातीय समूह है। वैसे तो इनकी कमोबेश आबादी पूरे पूर्वोत्तर में है, लेकिन मिजोरम के ज्यादातर ब्रू मामित और कोलासिब जिसे में रहते हैं। ब्रू समुदाय के अंदर तकरीबन एक दर्जन उपजातियां आती हैं। मिजोरम में ब्रू अनुसूचित जनजाति का एक समूह माना जाता है और त्रिपुरा में एक अलग जाति। लेकिन त्रिपुरा में इन्हें रियांग नाम से पुकारते हैं। इनकी भाषा ब्रू है।

 

images(39)

 

ब्रू और बहुसंख्यक मिजो समुदाय के बीच 1996 में हुआ सांप्रदायिक दंगा इनके पलायन का कारण बना था। मिजोरम में 1997 में हुई हिंसक झड़पों के बाद ब्रू जनजाति के हजारों लोग भाग कर पड़ोसी राज्य त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में चले गए थे। इस तनाव ने ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (बीएनएलएफ) और राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल यूनियन (बीएनयू) को जन्म दिया, जिसने राज्य के चकमा समुदाय की तरह एक स्वायत्त जिले की मांग की। इस तनाव की नींव 1995 में तब पड़ी जब यंग मिजो एसोसिएशन और मिजो स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने राज्य की चुनावी भागीदारी में ब्रू समुदाय के लोगों की मौजूदगी का विरोध किया। इन संगठनों का कहना था कि ब्रू समुदाय के लोग राज्य के नहीं है।

 

images(40)

 

पहले भी सरकार ने किया था पैकेज का एलान
3 जुलाई 2018 को नई दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव और मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथनहवला के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था। इस समझौते में ब्रू परिवारों के 30 हजार से ज्यादा लोगों के लिए 435 करोड़ का राहत पैकेज दिया गया था। इसमें हर परिवार को चार लाख रुपये की एफडी, घर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपये, 2 साल के लिए मुफ्त राशन और हर महीने पांच हजार रुपये दिए जाने थे। इसके अलावा त्रिपुरा से मिजोरम जाने के लिए मुफ्त ट्रांसपोर्ट, पढ़ाई के लिए एकलव्य स्कूल, मूल निवासी और जाति प्रमाणपत्र (एसटी) मिलने थे।ब्रू लोगों को मिजोरम में वोट डालने का हक भी मिलना तय हुआ था।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.