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Donald Trump India Visit : ट्रंप ने भारत दौरे से पहले दिया झटका, विकासशील देशों की सूची से हटाया नाम

सोमवार को भारत को उन विकासशील देशों की सूची से हटा दिया है, जिन्हें अमेरिकी की काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) से छूट हासिल है। ब्राजील, इंडोनेशिया, हॉन्गकॉन्ग, साउथ अफ्रीका और अर्जेंटीना भी बाहर।

 

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नई दिल्ली|प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 24 फरवरी को दो दिवसीय भारत के दौरे पर आ रहे हैं। ट्रंप ने मंगलवार को मीडिया को अपने इस दौरे के बारे में जानकारी दी। इससे पहले दिन में सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया के लिए सरकार अहमदाबाद में उसी तरह ‘केम छो, ट्रंप’ कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है, जिस प्रकार टेक्सास में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मगर, इससे पहले ही ट्रंप के एक कदम को लेकर भाजपा की पूर्व सहयोगी शिवसेना ने मोर्चा खोल दिया है।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप 24-25 फरवरी को भारत दौरे पर आने वाले हैं। हालांकि इससे पहले अमेरिका ने सोमवार को भारत को उन विकासशील देशों की सूची से हटा दिया है, जिन्हें अमेरिकी की काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) से छूट हासिल है। यह छूट देने के लिए यह देखा जाता है कि ये देश अनुचित सब्सिडी एक्सपोर्ट के जरिए अमेरिकी इंडस्ट्री को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे हैं।

 

 

शिवसेना ने भारत को विकासशील राष्ट्रों की सूची से हटाने के अमेरिका के कदम की आलोचन की है। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना में कहा- भारत को मिलने वाली सभी सब्सिडी और लाभ अब नहीं मिलेंगे। जब भी कोई मेहमान आता है, तो वह प्यार के टोकन के रूप में कुछ उपहार लाता है। मगर, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस परंपरा को तोड़ दिया। भारत में ट्रंप के स्वागत की तैयारी चल रही है और अमेरिका ने भारत को विकासशील देशों की सूची से हटा दिया है। यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। भारत का नाम जब विकासशील देशों की सूची में होता था, तो सब्सिडी और कर लाभ मिला करते थे। मगर, अब वह सब नहीं मिलेगा।

 

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) ने भारत के अलावा ब्राजील, इंडोनेशिया, हॉन्गकॉन्ग, साउथ अफ्रीका और अर्जेंटीना को भी लिस्ट से बाहर किया है। इन सभी देशों को स्पेशल तरजीह दी जाती थी, जिसके चलते इन्हें CVD जांच से छूट हासिल थी। USTR ने कहा कि इन देशों को 1988 की स्थिति के आधार पर छूट दिया गया था, जो ‘अब मौजूद नहीं’ हैं। भारत को इस सूची से इस आधार पर बाहर किया गया कि वह जी-20 देशों में आता है और वर्ल्ड ट्रेड में उसका योगदान 0.5 पर्सेंट या उससे ज्यादा है।

 

 

बताते चलें कि 10 फरवरी 2020 को अमेरिका ने कुछ अन्य देशों के साथ भारत को विकासशील देशों की अपनी सूची से हटा दिया, जिन्हें इस बात की जांच से छूट है कि क्या वे अनुचित सब्सिडी वाले अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं। अमेरिका ने भारत को शामिल करने वाले स्व-घोषित विकासशील देशों की सूची के लिए अपनी विशेष प्राथमिकताओं को समाप्त कर दिया। सामान्यीकृत प्रणाली वरीयताएं (GSP) अमेरिका की सबसे पुरानी तरजीही व्यापार योजना है, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलती थी।

 

 

विकासशील राष्ट्रों की सूची से भारत को हटाने के लिए अमेरिका के इस कदम से जीएसटी योजना के तहत भारत को अपने लाभों को पुनः प्राप्त करने के सभी अवसरों के खत्म होने की आशंका है। नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी एक उच्च प्रोफाइल वाले देश की छवि पेश की है। हालांकि, यह दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। देश में प्रति व्यक्ति आय मात्र 2,016 डॉलर के साथ प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में भारत दुनिया का 146वां देश है।

 

 

शिवसेना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा से पहले संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने भारत को विकासशील देश की सूची से बाहर कर भारत को संकट में डाल दिया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से कहा कि ट्रंप प्रशासन ने एक ‘गुगली’ फेंक दी है। भारत अब एक विकासशील देश नहीं बल्कि एक विकसित राष्ट्र है। यह भारत के लिए एक बड़ा संकट है। भारत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार स्वच्छता और गरीबी उन्मूलन जैसे मापदंडों पर विकसित देशों की स्थिति से बहुत दूर है।

 

शिवसेना ने आगे कहा कि भारत एक विकसित देश नहीं है और अब यह उन लाभों का अधिक फायदा नहीं उठा सकेगा, जो एक विकासशील राष्ट्र को मिलता है। हालांकि, हमारे प्रधानमंत्री इसे लेकर एक रास्ता खोज लेंगे और ट्रंप द्वारा भेजे गए करेले को मिठाई में बदल देंगे।

 

वैश्विक व्यापार की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम

सामना में आगे कहा गया है कि भारत के वैश्विक व्यापार की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला यह कदम ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार और गुजरात प्रशासन डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा की व्यवस्था कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं।

 

 

 

अमेरिका ने भारत को विकासशील देशों की सूची से हटाया

24 और 25 फरवरी को ट्रंप की यात्रा से पहले, अमेरिका ने भारत को विकासशील देशों की सूची से हटा दिया। यूएसटीआर कार्यालय ने भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में वर्गीकृत किया है, जो विकासशील देशों को वाशिंगटन से मिलने वाले लाभों के लिए अयोग्य बनाता है।

 

भारत अब विकासशील देश नहीं कहलाएगा. विश्व बैंक ने भारत और दुनिया के सभी देशों को उनकी कमाई के आधार पर वर्गीकृत किया है. अब भारत को ‘लोअर मिडिल इनकम’ वाले देशों में शामिल किया गया है.
भारत के साथ ही पाकिस्तान भी इसी श्रेणी में शामिल है. हालांकि खास बात यह है कि चीन को ‘अपर मिडिल इनकम’ देशों की श्रेणी में रखा गया है. चीन के साथ ही मैक्सिको, ब्राजील को भी इसी श्रेणी में रखा गया है.
नए वर्गीकरण के मुताबिक जिन देशों का ग्रॉस नेशनल इंकम (प्रति व्यक्ति) 1,045 डॉलर से कम है उन्हें लो इनकम देश या अर्थव्यवस्था कहा जाएगा. वहीं जिन देशों में ये आय 1,046 डॉलर से लेकर 4,125 डॉलर के बीच रहती है उन्हें लोअर मिडिल इनकम देश कहा जाएगा.

 

भारत के साथ ही पाकिस्तान भी इसी श्रेणी में शामिल है. हालांकि खास बात यह है कि चीन को ‘अपर मिडिल इनकम’ देशों की श्रेणी में रखा गया है. चीन के साथ ही मैक्सिको, ब्राजील को भी इसी श्रेणी में रखा गया है.

 

अमेरिका के साथ ट्रेड डील के तहत भारत जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) के तहत विशेष छूट पाने वाले देश का दर्जा वापस बहाल करने की मांग में जुटा था। हालांकि अमेरिका के इस कदम से उसकी मुहिम को भारी झटका लगा है क्योंकि GSP दर्जा सिर्फ विकासशील देशों को ही दिया जाता है। USTR ने एक बयान में कहा, ‘जिन देशों का वर्ल्ड ट्रेड में हिस्सा 0.5 पर्सेंट या उससे अधिक है, USTR उन्हें अमेरिकी CVD नियम के लिए विकसित देश मानती है।’ 2018 में भारत का ग्लोबल एक्सपोर्ट में 1.67 पर्सेंट और ग्लोबल इंपोर्ट में 2.57 पर्सेंट हिस्सा था। पिछले साल ट्रंप ने कहा था कि कुछ देशों ने नियमों में लचीलेपन का फायदा उठाने के लिए खुद को विकासशील घोषित कर रखा है। उन्होंने ऐसे देशों को दिए जाने वाले विशेष छूट को बंद करने के लिए अपने प्रशासन को निर्देश दिए थे।

 

 

 

USTR ने अपने बयान में कहा, ‘इसलिए ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम 2 पर्सेंट डी मिनिमिस स्टैंडर्ड के लिए योग्य नहीं हैं। इसके बावजूद वर्ल्ड बैंक के हालिया आंकड़ों के मुताबिक प्रत्येक देश की ग्रॉस नेशनल इनकम 12,375 डॉलर से कम है।’ विकासशील देशों को 2 पर्सेंट तक एक्सपोर्ट या प्रॉडक्शन सब्सिडी दी जाती है।’

 

अमेरिका ने पिछले साल जनवरी में भारत और चीन जैसे उभरती इकनॉमीज को दिए जाने वाले विशेष छूट और अधिकार वापस लेने का प्रस्ताव रखा था। ये देश ऑर्गनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डिवेलपमेंट (OECD), G20 के सदस्य देश हैं, जो वर्ल्ड बैंक की ओर से ‘अधिक आय’ वाली श्रेणी में आते हैं और ग्लोबल देश में इनका हिस्सा 0.5 पर्सेंट से अधिक है।

 

एक्सपर्ट का कहना है कि इससे भारत की GSP दर्जा वापस बहाल करने की मुहिम को झटका लगा है। एक एक्सपर्ट ने बताया, ‘इस नोटिस के मुताबिक भारत अब विकासशील देश नहीं है। अगर वह GSP दर्जा पाने के योग्य ही रहेगा, तो वह ट्रेड डील पर बातचीत के दौरान इसकी मांग कैसे करेगा?’

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