इतिहास

Yes Bank का सफर: ग्राहकों को तगड़ा ‘ब्याज’ बांटने वाला प्राइवेट बैंक कैसे हुआ बर्बाद? जानिए

यस बैंक (Yes Bank) आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब इसे बचाने की कोशिश की जा रही है। बैंक के शेयर लगातार गिर रहे हैं, यहां तक कि शुक्रवार को तो यह 50 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा है। ऐसे में एक सवाल यह है कि यस बैंक का ऐसा हाल हुआ कैसे? खासकर तब जब एक समय इस बैंक का जलवा पूरे देशभर में फैला हुआ था। यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक दौर ऐसा था जब इस बैंक को दूसरे बैंकों के मुकाबले ज्यादा ब्याज देने के लिए पहचाना और पसंद किया जाता था। आज हम आपको यस बैंक के अब तक के सफर के बारे में बताने जा रहे हैं। हम आपको बताएंगे कि इसकी शुरुआत कैसे हुई और समय के साथ यह कैसे मुसीबतों में घिरता चला गया। डालते हैं एक नजर,

 

 

2004 में शुरू हुआ सफर
यस बैंक का सफर साल 2004 में शुरू हुआ। इस बैंक को राणा कपूर ने अपने रिश्तेदार अशोक कपूर के साथ मिलकर शुरू किया था।

यस बैंक देश का चौथा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है।
यस बैंक का हेडक्वॉर्टर मुंबई में है।
यस बैंक की देशभर में 1000 से ज्यादा ब्रांचेज हैं।
यस बैंक के देशभर में 1800 एटीएम हैं।

 
Yes Bank कैसे था अलग?
यस बैंक देश का एक ऐसा निजी बैंक है, जिसकी महिला स्पेशल ब्रांच भी है।
महिला स्पेशल ब्रांच YES Grace के नाम से चलती है।
YES Grace ब्रांच में पूरी तरह से महिलाकर्मी काम करती हैं।
यस बैंक के देशभर में 30 से ज्यादा YES SMI ब्रांचेज हैं, जो SMEs को सबसे खास सर्विस देते हैं।

 

 

कब शुरू हुई पहली लड़ाई?
2004 में शुरू हुआ यस बैंक का सफर शुरुआती दिनों में काफी शानदार रहा, लेकिन 26/11 मुंबई हमलों ने इस बैंक की नींव में एक बड़ी दरार डाल दी। दरअसल मुंबई में हुए 26/11 हमलों में अशोक कपूर की मौत हो गई। इसके बाद अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच हो रही नोकझोंक की खबरें बाहर आने लगीं। दोनों के बीच बैंक के मालिकाना हक को लेकर लड़ाई शुरू हो गई। मधु कपूर अपनी बेटी को बोर्ड में शामिल करना चाहती थीं, जिसे लेकर राणा और मधु के बीच काफी अनबन होने लगी।

 

हालत इतने खराब हो गए कि यह मामला अदालत तक जा पहुंचा। इस पूरे मामले की मुंबई की अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने राणा कपूर के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट से मिली जीत के बाद राणा कपूर और मधु कपूर के बीच लड़ाई रुक गई। इसके बाद रणवीर गिल को Yes Bank का एमडी बनाया गया।

 

 
बुलंदियों पर पहुंचा Yes Bank
एक छोटा सा बैंक महज एक दशक में तीन लाख करोड़ रुपये की एसेट वाली कंपनी बन गई। स्टॉक मार्केट में यस बैंक के शेयर आसमान छूने लगे। एक समय तो ऐसा भी आया जब कंपनी के शेयर 1400 रुपये तक पहुंच गए थे।

 
कब हुआ RBI को शक?
Yes Bank की शोहरत उसके लिए मुसीबत बनने लगी। आरबीआई को संदेह होने लगा कि यस बैंक अपनी बैलेंसशीट और एनपीए (NPA) में गड़बड़ी कर रहा है। इसके बाद RBI ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया।

 
ताकत बनी बर्बादी
दूसरे बैंकों के मुकाबले यस बैंक ग्राहकों को ज्यादा ब्याज देता था। यही वजह थी कि यह बैंक ग्राहकों के दिलों पर राज करने लगा। हालांकि, कंपनी की बर्बादी का सिलसिला भी यहीं से शुरू होता है। दरअसल यस बैंक ने कई ऐसी कंपनियों को लोन दिया, जिन्हें दूसरे बैंक लोन नहीं दे रहे थे। इसके पीछे का कारण इन कंपनियों का डिफाल्टर होना या बैलेंसशीट का साफ नहीं होना शामिल था। ऐसे में यस बैंक ने जिन कंपनियों को लोन दिया उनमें से कई दिवालिया हो गईं या उनके एनपीए बहुत ज्यादा बढ़ गए।

 

 

Yes Bank की बर्बादी के लिए राणा कपूर कितने जिम्मेदार?
कॉरपोरेट सेक्टर में राणा कपूर की जबरदस्त पकड़ थी। राणा कपूर ने साल 2008 के बाद से ही ज्यादातर लोन देने शुरू किए। इस बीच भारत की आर्थिक स्थिति में गिरावट दर्ज होने लगी। इसका असर लोन लेने वाली कंपनियों पर पड़ने लगा। Yes Bank ने जिन कंपनियों को लोन दिया था, उनमें से ज्यादातर बर्बाद होने लगीं। इसकी वजह से यस बैंक का NPA लगातार बढ़ने लगा। इस दौरान यस बैंक ने अपनी स्थिति को सुधारने की बहुत कोशिश की लेकिन कंपनी को कोई भी राहत नहीं मिली।

 

 
Yes Bank का बुरा दौर
बैलंस शीट की सही जानकारी नहीं देने पर राणा कपूर को RBI ने 31 जनवरी को पद छोड़ने के लिए कहा।
बैंक की खराब हालत के चलते कंपनी के को-फाउंडर राणा कपूर को पद से हटना पड़ा।
बैंक मेसेजिंग सॉफ्टवेयर स्विफ्ट के नियमों का पालन न करने पर आरबीआई (RBI) ने Yes Bank पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। बता दें कि बैंक में लेनदेन के लिए इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है।

 
अगस्त 2019 में मूडीज ने यस बैंक की रेटिंग घटा दी।
Yes Bank की खस्ता हालत के चलते राणा कपूर को अपने शेयर बेचने पड़े.
अक्टूबर 2019 में राणा कपूर और उनके ग्रुप की हिस्सेदारी घटकर 4.72 पर आ गई।
सितंबर 2019 में कंपनी के सीनियर ग्रुप प्रेसिडेंट रजत मोंगा ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी।
3 अक्टूबर को रजत मोंगा ने इस्तीफा दे दिया।
कभी कंपनी का शेयर 1400 रुपये तक पहुंच गया था, लेकिन आज बैंक का शेयर 36 रुपये तक गिर गया है।

 

Yes Bank पर RBI की सबसे बड़ी मार
Yes Bank के ग्राहकों के लिए गुरुवार को RBI ने 50 हजार रुपये निकालने की सीमा तय कर दी है। आसान भाषा में समझा जाए तो अब यस बैंक के ग्राहक एक महीने में केवल 50 हजार रुपये ही निकाल सकते हैं।

 

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YES बैंक को अब मूडीज ने दिया झटका, रेटिंग पर चलाई कैंची

प्राइवेट सेक्‍टर के यस बैंक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक महीने तक के लिए पाबंदी लगा दी तो अब रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी रेटिंग को कम कर दिया है. मूडीज की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यस बैंक पर आरबीआई की पाबंदी नकारात्मक है क्योंकि यह बैंक जमाकर्ताओं और लेनदारों के री-पेमेंट को प्रभावित करता है.
इसी तरह, रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) ने भी यस बैंक के टियर- II और टियर- I बॉन्ड पर रेटिंग में कटौती की है. बता दें कि बीते गुरुवार को यस बैंक पर आरबीआई ने कई तरह की पाबंदी लगा दी है. इसके बाद यस बैंक के खाताधारक 3 अप्रैल 2020 तक सिर्फ 50 हजार रुपये की निकासी कर सकेंगे. हालांकि, इमरजेंसी में 5 लाख तक निकालने की छूट है. इसके अलावा यस बैंक के बोर्ड को भी भंग कर प्रशांत कुमार को एडमिनिस्‍ट्रेशन नियुक्‍त किया गया है. प्रशांत कुमार, एसबीआई के पूर्व सीएफओ हैं.

 
री-स्‍ट्रक्‍चरिंग प्‍लान का ऐलान
इस बीच, केंद्रीय रिजर्व बैंक ने यस बैंक के री-स्‍ट्रक्‍चरिंग प्‍लान का ऐलान किया है. वहीं एसबीआई ने यस बैंक में हिस्‍सेदारी खरीदने में दिलचस्‍पी दिखाई है. निवेशक बैंक अगले तीन साल के लिए 49 फीसदी हिस्‍सेदारी ले सकता है. वहीं अपनी हिस्‍सेदारी 26 फीसदी से कम नहीं कर सकता है. बहरहाल, इस प्‍लान को सुझाव के लिए एसबीआई और यस बैंक को भेज दिया गया है. बता दें कि ये प्‍लान एक महीने के भीतर ही लाया जाएगा.

 

 

यस बैंक के संकट पर फाउंडर क्‍या बोले?
इन हालातों में यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर ने कहा कि उन्‍हें कोई आइडिया नहीं है. बिजनेस टुडे से बातचीत के दौरान राणा कपूर ने कहा- मैं पिछले 13 महीने से बैंक में सक्रिय नहीं हूं, ऐसे में मुझे कोई आइडिया नहीं है कि क्‍या चल रहा है. बता दें कि यस बैंक ने नवंबर 2019 में शेयर बाजार को बताया था कि राणा कपूर की बोर्ड से कंप्‍लीट एग्जिट हो गई है.

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