इतिहास

Suchkesath:YES Bank को बचाने में SBI का भी हाल बुरा तो नहीं हो जाएगा?

31 मार्च 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार एसबीआई ने होम लोन और अन्य कंज्यूमर लैंडिंग के तहत 6,48,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। ये बैंक के कुल कर्ज का 32.5 फीसदी है। वहीं, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास एसबीआई के 1,87,000 करोड़ रुपये बकाया कर्ज के रूप में हैं।

 

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नई दिल्ली|नकदी का संकट झेल रहे येस बैंक को बचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया आगे आया है। एसबीआई के निदेशक मंडल ने पहले ही यस बैंक में निवेश की संभावनाओं को टटोलने के लिए ‘सैद्धान्तिक मंजूरी’ दे दी है। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यदि एसबीआई अकेले 49 प्रतिशत हिस्सेदारी लेता है तो उसे तत्काल 2,450 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।

 

 

रजनीश कुमार ने शनिवार को कहा कि स्टेट बैंक ने येस बैंक में निवेश के लिए अधिकतम 10,000 करोड़ रुपये की सीमा तय की है। भारतीय रिजर्व बैंक की पुनर्गठन योजना के तहत एसबीआई संकटग्रस्त येस बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ले सकता है। रजनीश कुमार का कहना है कि मसौदा योजना के तहत येस बैंक में 2450 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

 

 

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि एसबीआई अगर 2450 करोड़ रुपये निवेश करता है तो उसे इसके बदले में कितना रिटर्न मिलेगा। एसबीआई की तरफ से येस बैंक को बचाने के फैसले के बाद से बैंक के शेयरों में 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का कहना है कि ये निवेशकों के डर को दर्शाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या येस बैंक को बचाने में एसबीआई का हाल भी बुरा तो नहीं हो जाएगा।

 

 

31 मार्च 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार एसबीआई ने होम लोन और अन्य कंज्यूमर लैंडिंग के तहत 6,48,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। ये बैंक के कुल कर्ज का 32.5 फीसदी है। वहीं, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास एसबीआई के 1,87,000 करोड़ रुपये बकाया कर्ज के रूप में हैं। एसबीआई की तरफ से छोटे और मझोले उद्योगों को जो लोन दिया गया है, उसकी बैंक के कुलकर्ज में हिस्सेदारी 14.5 फीसदी है।
हालांकि, एसबीआई के निवशकों को हितों के प्रभावित होने के सवाल पर रजनीश कुमार ने कहा कि योजना के तहत एसबीआई के निवेशकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के एक बैंक में एसबीआई के निवेश से हितों के टकराव जैसी कोई बात भी नहीं होगी।

 

 

मालूम हो कि येस बैंक में 21 लाख खाताधारक हैं। येस बैंक में 18238 कर्मचारी, 1122 ब्रांच हैं। ये 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौजूद हैं। इतना ही नहीं येस बैंक के 1722 एटीएम भी हैं। 1999 में राणा कपूर, अशोक कपूर और हरकीरत सिंह ने एक साथ मिलकर 1999 में बैंक खोलने की सोची। 2002 में बैंक खोलने की इजाजत मिल गई। बैंक खुलने के एक अगले साल ही हरकीरत सिंह इससे अलग हो गए।

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