ताज़ा ख़बरें

Coronavirus:इस महिला पर अमेरिका ने किया वैक्सीन का पहला परीक्षण

Suchkesath|अमेरिका समेत दुनिया के विभिन्न देशों में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अमेरिका ने कोरोना की वैक्सीन का परीक्षण किया है। डॉक्टर ने सिएटल शहर में कोविड-19 की वैक्सीन सबसे पहले एक महिला को लगाई है। इस महिला का नाम जेनिफर हॉलर है।

अमेरिका की जेनिफ़र हेलर दुनिया की पहली महिला बनीं जिन पर कोरोनावाइरस की वैक्सीन का टेस्ट किया गया।

किसी भी वैक्सीन के टेस्ट के लिए पहले किसी स्वस्थ व्यक्ति को उस बीमारी से इन्फ़ेक्ट किया जाता है और फिर उस पर वैक्सीन का रेस्पॉन्स देखा जाता है।

जेनिफ़र और उनके साथ 44 लोग वालंटियर्ली यानि स्वेच्छा से सामने आए ताकि मानव जाति पर आए इस संकट से उन्हें बचाया जा सके। जेनिफ़र के दो बच्चे हैं, फिर भी वो सामने आयीं, इस पूरी प्रक्रिया में वैक्सीन के असफल होने की स्थिति में उनकी जान को ख़तरा हो सकता है।

दुनिया में बहुत कुछ बहुत बुरा हो रहा है तो बहुत कुछ बहुत अच्छा भी हो रहा है। और यही अच्छे लोग और उनके अच्छे प्रयासों के चलते ये दुनिया आज भी ख़ूबसूरत है और तभी हम सभी लाख दिक्कतों के बाद भी इस दुनिया में रहना चाहते हैं।

हमें उम्मीद है कि इनके प्रयास ज़रूर सफल होंगे, लेकिन तब तक हमें प्रयास करने होंगे, कि इन्हें इनके प्रयास बेकार न लगें, इस दुनिया को इतने प्रयासों से बचाए जाने के लायक बनाए रखना भी हमारी ज़िम्मेदारी है।

 

Covid-19

कोरोना के इस वैक्सीन को कोड नेम mRNA-1273 दिया गया है.

 

43 वर्षीय जेनिफर हॉलर एक टेक कंपनी में बतौर ऑपरेशन मैनेजर काम करती हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी बहुत असहाय महसूस कर रहे हैं। ऐसे में मेरे लिए कुछ करने का शानदार अवसर है। उन्होंने बताया कि उनकी दो बेटियां मानती हैं कि स्टडी में भाग लेना काफी कूल है। कई देशों में वॉल्टर रीड आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च सहित दुनियाभर में संभावित कोविड-19 के टीके विकसित किए जा रहे हैं।
वहीं, बॉलीवुड गीतकार मनोज मुंतशिर ने जेनिफर के बार में ट्वीट कर लिखा है कि जेनिफर हॉलर ने अपनी जान दांव पर लगाकर कोरोना वायरस की वैक्सीन अपने ऊपर टेस्ट करवाई। दोबारा कभी औरत की हिम्मत पर शक मत करना।

 

इस अध्ययन और प्रयोग की टीम लीडर डॉ. लीजा जैक्सन हैं। लीजा मानती हैं कि वैक्सीन के पहले चरण में परीक्षण के लिए तैयार इन चार लोगों के साथ अब हम टीम कोरोना वायरस हो गए हैं। ऐसे मौके पर हर कोई यही चाहता है कि इस आपात स्थिति से निपटने के लिए वह क्या और कैसे करें। जेनिफर सीटेल में ही एक टेक कंपनी में ऑपरेशन मैनेजर हैं।
इनके अलावा तीन और लोगों को इस परीक्षण का इंजेक्शन लगाया जाना है। इसके अलावा 45 अन्य लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा और इन्हें एक महीने के बाद दो और डोज दिए जाएंगे।

 

 

ब्रॉथल के रहने वाले 46 साल के ही नील ब्राउनिंग भी एक माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क इंजीनियर हैं जो इस परीक्षण टीम के सदस्य हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटियां इस तरह के सामाजिक काम के लिए उन्हें बेहद प्रोत्साहित करती हैं और गर्व महसूस करती हैं। उनकी बेटियां मानती हैं कि ये दुनिया के उन तमाम लोगों को बचाने के लिए बेहद जरूरी है कि कोई न कोई तो यह जोखिम उठाए।

 

 

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉ एंथनी फॉसी का कहना है कि अगर यह परीक्षण कामयाब रहा तो अगले 12 से 18 महीनों के बाद ही यह वैक्सीन दुनिया भर में इस्तेमाल की जा सकेगी। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस परीक्षण से उम्मीद जताते हुए दावा किया है कि जुलाई तक अमेरिका कोरोना से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने यह श्रेय लेने की भी कोशिश की अमेरिका में ही इस खतरनाक वायरस का पहला वैक्सीन इतने कम वक्त में बन कर तैयार होने की उम्मीद है। चीनी वैज्ञानिकों ने 65 दिन पहले इसके बारे में जानकारियां दी थीं और यह वैक्सीन परीक्षण के लिए इतनी जल्दी तैयार कर लिया गया। इसे मॉडर्ना इंक नाम की कंपनी विकसित कर रही है।

 

 

इस समय दुनिया के तमाम देशों में कोरोना की वैक्सीन पर काम हो रहा है। दर्जनों रिसर्च संस्थान इसपर काम कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया में भी अगले महीने तक ऐसे ही वैक्सीन पर काम होने की संभावना है जिसे इनोवियो फार्मास्युटिकल्स बना रही है। सिएटल में हुए इस परीक्षण की तैयारी उस दिन के बाद से ही तेजी के साथ शुरू हो गई थी जिस दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को एक महामारी घोषित किया था।

 

 

इस परीक्षण के लिए 18 से 55 साल के बीच के ऐसे लोगों को चुना जा रहा है जो भीतर से मजबूत हों और जो वैक्सीन के कड़े डोज को भी बर्दाश्त कर सकें। इस परीक्षण के लिए चुने गए लोगों को प्रयोग के लिए जितनी बार क्लीनिक बुलाया जाएगा, इसके लिए उन्हें 100 डॉलर भी दिए जाएंगे।

 

वैक्सीन का परीक्षण सोमवार से शुरू

अमेरिकी सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, कोरोना वायरस से बचाने के लिए बनाए गए वैक्सीन का परीक्षण सोमवार से शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) इस परीक्षण के लिए धन मुहैया करा रहा है और यह सिएटल में कैसर परमानेंट वॉशिंगटन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में हो रहा है। जन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित टीके की पुष्टि में एक साल से 18 महीने तक का वक्त लगेगा। यह परीक्षण 45 युवा एवं स्वस्थ स्वेच्छाकर्मियों के साथ शुरू हुआ।

 

 

ऑस्ट्रेलिया: दो दवाएं खोजने का दावा

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज करने में कारगर दो दवाओं – एचआईवी और मलेरिया रोधी- का पता लगा लिया है। क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के क्लिनिकल शोध केंद्र के निदेशक डेविड पैटर्सन ने बताया कि दो दवाओं को टेस्ट ट्यूब में कोरोना वायरस को रोकने के लिए इस्तेमाल किया गया और यह कारगर है और इंसानों पर परीक्षण के लिए तैयार है।

 

 

अमेरिका में 100 से अधिक लोगों की मौत

अमेरिका जैसे विकसित देश में इस संक्रामक बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 105 पर पहुंच गई है और यह विषाणु उसके सभी 50 राज्यों तक फैल गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हालात को संभालने के लिए युद्ध जैसे प्रयास तेज कर दिए हैं जिनमें अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए एक हजार अरब डॉलर का पैकेज देना भी शामिल है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.