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कोरोना और अर्थतंत्र

Suchkesath| देश में कोरोना वायरस से निपटने की तैयारी हर स्तर पर चल रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था को इसके असर से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कई कदम उठाए हैं। सोमवार को उसने लांग टर्म रेपो ऑपरेशन (एलटीआरओ) का दायरा बढ़ाने का फैसला किया।

 

 

एलटीआरओ एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत रिजर्व बैंक विभिन्न बैंकों को एक से तीन साल के लिए वर्तमान रेपो रेट (5.15 प्रतिशत) पर कर्ज उपलब्ध कराता है। बदले में बैंक कोलैटरल के तौर पर अपने पास मौजूद पब्लिक सिक्युरिटीज यानी सरकारी बॉन्ड रिजर्व बैंक के पास गिरवी रखते हैं। इस कदम का उद्देश्य बैंकों को अपनी ब्याज दरें घटाने के लिए प्रेरित करना है।

 
इसके पहले रिजर्व बैंक चार बार, 17 फरवरी, 24 फरवरी, 1 मार्च और 9 मार्च को एलटीआरओ का संचालन कर चुका है। इस सस्ते फंड के बल पर बैंकों ने अगर अपना कर्ज सस्ता किया तो बाजार में कुछ गति आ सकती है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि नए एलटीआरओ के जरिए कई हिस्सों में एक लाख करोड़ रुपये सिस्टम में डाले जाएंगे। इसके अलावा आरबीआई ने छह महीने तक दो अरब डॉलर की खरीद-बिक्री करने का फैसला किया है, जिसका मकसद देश के विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में तरलता बनाए रखना और डॉलर की जरूरतों को आसान बनाना है।

 

 

डॉलर के मुकाबले रुपये में जो तेज गिरावट देखी जा रही है, उस पर आरबीआई के इस कदम से कुछ लगाम लगेगी। शक्तिकांत दास के मुताबिक देश के कई हिस्सों में नीलामी के जरिए डॉलर की खरीद-बिक्री (स्वैप) की जाएगी। कोरोना वायरस से इंडस्ट्री पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सरकार ने सेक्टोरल पैकेज की तैयारी शुरू की है। सरकार अलग-अलग सेक्टरों के लिए खास योजनाएं बनाएगी। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय और नीति आयोग के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। कुछ क्षेत्रों पर खास फोकस किया जाएगा, जैसे फार्मा इंडस्ट्री। दवा कंपनियां अपना 75 फीसदी कच्चा माल (एपीआई) बाहर से मंगाती हैं।

 

 

सरकार इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नई कंपनियां लगाने वालों को विशेष रियायत देगी। इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट बनाने वाली कंपनियों पर भी सरकार की नजर है। उनके लिए तीन स्कीमें सरकार ने तैयार की हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट सेक्टर के लिए भी सरकार खास तैयारी कर रही है जिसमें कपड़ा, चमड़ा और केमिकल्स के एक्सपोर्ट पर ज्यादा जोर रहेगा। सरकार ने चाइना वन प्लस पॉलिसी भी बनाई है। इसके तहत चीन में उत्पादन करने वाली कंपनियों को भारत में काम शुरू करने पर विशेष रियायत दी जाएगी। सरकार को ध्यान रखना होगा कि मौजूदा संकट से लोगों की नौकरियां न जाएं। सर्विस सेक्टर पर खास तौर से नजर बनाए रखने की जरूरत है क्योंकि कोरोना वायरस के प्रसार से सबसे ज्यादा संकट उसी पर आया है।

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