क्राइम्स

कोरोना से संक्रमित बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की करतूत ने बढ़ाई मुसीबत

Suchkesathमहामारी बन चुके कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में न जाने कब से यह स्पष्ट है कि एक अकेले व्यक्ति की लापरवाही पूरे समुदाय और अंतत: देश पर भारी पड़ सकती है, फिर भी कुछ लोग गैर जिम्मेदारी का घातक परिचय देने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस मामले में नया नाम जुड़ा है गायिका कनिका कपूर का, जिन्होंने बीते हफ्ते लंदन से लौटकर लखनऊ में पार्टी तो की ही, अन्य अनेक सार्वजनिक स्थलों में भी उपस्थिति दर्ज कराई। कोरोना वायरस के खतरे से बेपरवाह होकर वह कानपुर भी गई।

 

 

क्या इससे अधिक शर्मनाक और कुछ हो सकता है कि जब विदेश यात्रा करने वालों के लिए यह जरूरी बताया जा रहा था कि वे घर-परिवार लौटते ही खुद को सामाजिक रूप से अलग-थलग रखें तब कनिका कपूर ठीक इसके उलट आचरण कर रही थीं? उन्होंने देश के लिए कितना बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, इसका पता इससे चलता है कि वह जिस पार्टी में गई उसमें दिल्ली, जयपुर आदि शहरों के भी लोग शामिल हुए। इनमें उप्र के स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह, वंसुधरा राजे एवं उनके सांसद बेटे दुष्यंत सिंह भी हैं। दुष्यंत लखनऊ में पार्टी करने के बाद दिल्ली आए और संसद भी गए।

 

कनिका कपूर के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद अब यह अति आवश्यक है कि उनके परिजनों के साथ उनके संपर्क में आने वाले दुष्यंत सरीखे सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। इतना ही नहीं उनकी भी निगरानी करनी होगी जो इस पार्टी में गए लोगों से मिले-जुले। कनिका ने एक तरह से उसी खतरे को बढ़ाने का काम किया जिससे बचने के लिए देश युद्ध स्तर पर जुटा हुआ है। कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में देश अभी दूसरे दौर यानी उस स्थिति में है जहां इसकी पहचान हो जा रही है कि कौन किससे संक्रमित हुआ? यदि इसका पता लगाना मुश्किल हुआ कि कौन किससे संक्रमित हुआ तो फिर हालात हाथ से फिसल सकते हैं।

 

कोरोना वायरस: देश के सामने संकट बड़ा है इसलिए खुद जागरूक होने के साथ ही औरों को भी जागरूक करें

यह घोर चिंताजनक है कि जैसी लापरवाही कनिका ने दिखाई वैसी ही कुछ अन्य भी दिखा रहे हैं। कोई खुद को अलग-थलग करने से इन्कार कर रहा है तो कोई अस्पताल से भागा जा रहा है। कुछ ऐसे भी हैं जो स्वास्थ्य परीक्षण कराने से बच रहे हैं। ऐसे लोग अपने साथ-साथ पूरे देश को ऐसे भीषण खतरे की ओर धकेल रहे हैं जिसका सामना करना बेहद कठिन होगा। चूंकि देश सबसे बड़े संकट से दो-चार है इसलिए उन सबके खिलाफ सख्ती बरतने में तनिक भी संकोच नहीं किया जाए जो अपनी जिम्मेदारी को लेकर सचेत नहीं। यह आपातस्थिति है और इसमें ढिलाई के लिए कहीं कोई गुंजाइश नहीं।

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