इतिहास

तकनीक में छलांग:तकनीकी नवाचार के मामले में विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर भारत

तकनीक के क्षेत्र में भारत का विकास काफी बेहतर रहा है। तकनीकी इनोवेशन के मामले में भारत चीन के बाद दूसरे नंबर पर पहुंच गया है.

images(172)

 

सच के साथ|भारत ने नए दौर की अत्याधुनिक तकनीक के विकास में काफी तत्परता दिखाई है, उसी का सुखद परिणाम है कि आज हम तकनीकी नवाचार के मामले में विश्व में चीन के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी के 2020 ग्लोबल टेक्नॉलजी इंडस्ट्री इनोवेशन सर्वे के अनुसार आर्टिफशल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के क्षेत्र में नई खोजों और अनुसंधान के मामले में चीन के साथ भारत दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

 

 

टॉप पर अमेरिका है। यही नहीं विश्व के प्रमुख टेक्नॉलजी हब में बंगलुरु टॉप टेन में पहुंच गया है। उसका स्थान नौवां है। केपीएमजी के अनुसार भारत में पिछले कुछ वर्षों में पूंजी के बढ़ते प्रवाह और शहरीकरण ने तकनीकी शोध और अनुसंधान के लिए उपयुक्त माहौल तैयार किया है। भारत में विशाल युवा आबादी का होना भी इसमें सहायक है।

 
कुछ विशेषज्ञों की राय है कि अमेरिकी की हाल की कठोर वीजा नीति भारत और चीन के लिए सकारात्मक साबित हुई है। कई तकनीकी विशेषज्ञ इस कारण अमेरिका जाने से वंचित रह गए या उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा और उन्होंने अपने देशों में बेहतर काम किए। वैसे भारत में पिछले कुछ समय से तकनीकी विकास का बेहतर माहौल बना है।

 
केंद्र सरकार ने महसूस किया है कि अगर देश को विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है तो उस तकनीक को अपनाना होगा, जो भविष्य में अहम भूमिका निभाने वाली है। इसी को ध्यान में रखकर कई योजनाएं शुरू की गईं जैसे डेटा पार्क, टाइड 2.0 (टेक्नॉलजी इनक्यूबेशन एंड डिवेलपमेंट ऑफ आंट्रप्रनर्स), सीओई (सेंटर ऑफ एक्सलेंस) और डिजिटल इंडिया।

 

 

गौरतलब है कि यह सर्वे दुनिया भर की टेक्नॉलजी इंडस्ट्री में काम कर रहे 800 बड़े विशेषज्ञों के बीच किया गया। उनमें से 37 फीसदी का मानना है कि जिस तरह से दूसरे देश तकनीकी नवाचार में लगे हैं, जल्दी ही सबसे बड़ा इनोवेशन सेंटर सिलिकन वैली से बाहर होगा। इस संदर्भ में उन्होंने सिंगापुर का उदाहरण दिया। वह टेक्नॉलजी हब के रूप में इस सर्वे में पहले स्थान पर रहा। पिछले साल वह सातवें स्थान पर था।
यह सर्वेक्षण निश्चय ही हमारा मनोबल बढ़ाता है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

 

 

सिर्फ एक बंगलुरु और मुट्ठी भर तकनीकी संस्थानों के बूते यह कार्य संभव नहीं है। अभी भी कई तकनीकी खासकर इंजीनियरिंग संस्थानों का पाठ्यक्रम काफी पुराना है। उनके शिक्षक नए तकनीकी विकास से परिचित तक नहीं हैं। वे इंडस्ट्री की अपेक्षाओं को नहीं जानते। नतीजा यह होता है कि हमारे छात्र बस हाथ में डिग्री लिए भटकते रहते हैं। उन्हें न तो ढंग की नौकरी मिल पाती है और न ही वे किसी तरह का इनोवेशन कर पाते हैं। वर्तमान तकनीकी शिक्षा को अपग्रेड करने के साथ हमें स्टार्टअप्स पर भी ध्यान देना होगा। उन्हें हर तरह की मदद देनी होगी ताकि वे तकनीकी नवाचार में योगदान दे सकें।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.