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UP : कोरोना वायरस के बीच यूपी की चीनी मिलीं जारी रखेंगी पेराई

लखनऊ|कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घोषित 21 दिनों के लाकडाउन में भी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें गन्ने की पेराई जारी रखेंगी। प्रदेश सरकार ने गन्ने और चीनी दोनों को आवश्यक वस्तु करार देते हुए यह निर्णय लिया है। मगर चीनी, एथानाल और हैण्ड सेनेटाइजेशन आदि बनाने में प्रयुक्त होने वाली कच्ची सामग्री चूना, ग्लिसरीन और पॉली प्रॉपलीन (पीपी) की आपूर्ति महाराष्ट, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से होती है।

 

 

लॉकडाउन के चलते इन वस्तुओं की आपूर्ति प्रदेश की चीनी मिलों को बाधित होने पर पेराई रोकनी पड़ेगी और मिलों को जबरन बंद करना पड़ेगा। इस विपरीत स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव आर.के. तिवारी ने उक्त राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। इस पत्र में चीनी मिलों के संचालन को जारी रखने के लिए उन्हें चूना, ग्लिसरीन और पॉली प्रापलीन की आपूर्ति जारी रखने के लिए निवेदन किया गया है।
प्रदेश के मुख्य सचिव ने पत्र में आवश्यक वस्तुओं के लिए बने नियम व कानूनों का हवाला भी दिया है। उधर, चीनी मिलों में पेराई चूंकि इन दिनों चरम पर चल रही है ऐसे में मिलों के गेट व आसपास किसानों तथा चीनी मिल कर्मचारियों का आवागमन बना हुआ है। इनके बीच संक्रमण न फैलने पाए इसलिए जरूरी एहतियात बरतने के भी निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के गन्ना विकास व चीनी उदयोग मंत्री सुरेश राणा बताया कि उनके विभाग की ओर से सभी चीनी मिलों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।

 

 

किसानों को चीनी मिलों के गेट पर धोने होंगे हाथ
निर्देश हैं कि गन्ना लदे वाहन पर केवल एक ही किसान होगा। सभी वाहन फासले पर खड़े होकर तौल के लिए बारी की प्रतीक्षा करेंगे। चीनी मिल गेट पर किसानों के हाथ साबुन से धुलवाए जाएंगे। चीनी मिलों के भीतर काम करने वाले कार्मिकों को भी समुचित एहतियात बरतने के निर्देश दिये गये हैं।

 

 

जिन जिलों में चीनी मिलें हैं वहां के प्रशासन से भी कहा गया है कि वह बराबर निगरानी रखें। प्रदेश में अभी करीब 25 प्रतिशत गन्ना खेत में खड़ा है। महाराष्ट में गन्ने की समुचित पैदावार न होने की वजह से इस बार देश की घरेलू मांग पूरी करने की जिम्मेदारी यूपी पर ही है। प्रदेश में इस बार 120 लाख टन चीनी बनने की उम्मीद है।

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