इतिहास

Coronavirus Lockdown लागू करने से ज्यादा बड़ी चुनौती खत्म करने की

Coronavirus Lockdown लागू करने से ज्यादा बड़ी चुनौती खत्म करने की:- अशोक चौधरी

 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से लेकर योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) तक कोरोना वायरस लॉकडाउन खत्म (Coronavirus Lockdown to end) करने को लेकर एक्टिव नजर आ रहे हैं. लॉकडाउन लागू होने के जो साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं, वैसा इसे खत्म किये जाने के बाद नहीं होना चाहिये – वरना हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा.

 

सच के साथ|एक बात तो साफ है. लॉकडाउन 21 दिन के बाद कुछ शर्तों के साथ खत्म हो जाएगा. राज्य सरकारें अपने अपने हिसाब से कोरोना वायरस लॉकडाउन खत्म करने (Coronavirus Lockdown to end) की तैयारी कर रही हैं – सक्रिय तो सभी होंगे लेकिन चीजें सामने आयी हैं उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से. योगी आदित्यनाथ ने विधायकों से ठीक वैसे ही विचार-विमर्श किया है जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने देश भर के मुख्यमंत्रियों से. महाराष्ट्र में तो उद्धव ठाकरे ने साफ कर दिया है कि – राज्य के लोग ही तय करेंगे कि लॉकडाउन हटाया जाये या नहीं – साफ है उद्धव ठाकरे लोगों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराना चाहते हैं कि अगर वे सोशल डिस्टैंसिंग मेनटेन करें तो वो भी स्वीडन और सिंगापुर जैसे देशों की तरह लोगों की जिंदगी सामान्य तौर पर पटरी पर लाने की कोशिश कर सकते हैं. योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री भी यही समझाने की कोशिश कर रहे हैं.

 

 

तो समझने वाली बात ये है कि अब तक एहतियात से ही हम लोग कोरोना वायरस को मात देते आये हैं – लिहाजा आगे कुछ ऐसा नहीं होना चाहिये कि लॉकडाउन हटाने का फैसला लेने के देने पड़ने जैसा हो जाये.

 

क्या है तैयारी

द संडे एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्रियों के समूह (Group Of Ministers) का मानना है कि लॉकडाउन की स्थिति को लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता. मंत्री समूह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं. ये मंत्री समूह लॉकडाउन हटाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है.

 

देश के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी तरीके से ऑल पार्टी मीट बुलायी है. ये वीडियो कांफ्रेंसिंग 8 अप्रैल को होने जा रही है. इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी ने सोनिया गांधी, मुलायम सिंह, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, के चंद्रशेखर राव, एमके स्टालिन और प्रकाश सिंह बादल से बात की है. प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रतिभा पाटिल से भी बात की है. ऐसी ही बातचीत मोदी की पूर्व प्रधानमंत्रियों मनमोहन सिंह और एचडी देवगौड़ा से भी हुई है. ये बातचीत कोरोना महामारी से जूझ रहे देश की स्थिति को लेकर हुई है – और ऐसे वक्त हुई है जब सरकार लॉकडाउन को खत्म करने की भी तैयारी कर रही है.

 

 

तमाम फील्ड के एक्सपर्ट पहले से ही सलाह दे रहे थे कि सरकार को विपक्षी दलों को भरोसे में लेने के साथ ही विपक्षी खेमे से जुड़े आर्थिक विशेषज्ञों से भी सलाह मशविरा करना चाहिये. संकट के समय उनके अनुभव और विचार देश के काम आ सकते हैं. वैसे भी विपक्षी दलों की तरफ से लॉकडाउन को लेकर समय समय पर टिप्पणियां भी आती रहीं.

 

 

राहुल गांधी शुरू से ही जहां कोरोना महामारी के खतरों की बात कर रहे थे, वहीं उनके साथी कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम लॉकडाउन लागू करने की मांग कर रहे थे. जब लॉकडाउन लागू हुआ तब तो राहुल गांधी, सोनिया गांधी और पी. चिदंबरम सभी ने खूब तारीफ की, लेकिन बाद में कहने लगे कि बगैर किसी तैयारी के और जल्दबाजी में लागू कर दिया गया.

 
लॉकडाउन खत्म करने की तैयारी ठीक है, जल्दबाजी नहीं

वैसे भी जिस तरीके दिल्ली और दूसरे राज्यों की सीमाओं पर पलायन का सिलसिला देखने को मिला वो ये सवाल तो पूछ ही रहा था कि क्या उसे टाला नहीं जा सकता था? नतीजा ये हुआ कि रोजी-रोटी पर अचानक आये संकट से घबराकर लोग घरों की तरफ पैदल ही निकल पड़े – बगैर ये सोचे की अंजाम क्या होगा. कई लोगों को तो जान तक गंवानी पड़ी. कुछ हादसों के भी शिकार हुए.

 

 

लॉकडाउन लागू किये जाने के बाद घरों के लिए सड़क पर निकल पड़े लोग तो परेशान हुए ही, यूपी, बिहार और राजस्थान जैसी सरकारों को भी आनन फानन में तैयारी करनी पड़ी और उनके अपने इलाके में पहुंचाने के बाद भी राहत शिविरों में रखना पड़ा. कोरोना जैसी महामारी जिस तरीके से फैलती है उसके लिए तो ये सब ज्यादा ही खतरनाक बात रही.

 

 

सरकार धर्मगुरुओं के पास

प्रधानमंत्री की ही तरह उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लॉकडाउन खत्म करने को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं. योगी आदित्यनाथ विधायकों से गहन विचार विमर्श के बाद यूपी के 377 धर्मगुरुओं से भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत की है. बातचीत का मकसद कोरोना के खिलाफ जंग में धर्मगुरुओं के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया है. योगी आदित्यनाथ से पहले जिला स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने भी अपने अपने इलाके में ऐसे ही धर्मगुरुओं से संपर्क साधा था.

 

दरअसल, धर्मगुरुओं की मदद लेने का सुझाव महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की तरफ से दिया गया था – और मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से ऐसा करने की सलाह भी दी थी. इस बीच, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी धर्मगुरुओं को पत्र लिख कर कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में सहयोगी मांगा था. धर्मगुरुओं से मीटिंग में योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोलने को लेकर चर्चा की. ध्यान रहे योगी आदित्यनाथ भी वैसी ही पृष्ठभूमि से आते हैं. वो गोरक्षपीठ के महंत हैं और देश के तमाम हिस्सों में बीजेपी चुनाव प्रचार में उनके प्रभाव का लगातार इस्तेमाल भी करती है.

 

 

धर्मगुरुओं से जिला स्तर पर अफसर अक्सर त्योहारों के वक्त संपर्क साधते रहते हैं ताकि इलाके में अमन का माहौल बनाये रखने में मदद मिले. ऐसी मुलाकातें तब और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब हिंदू और मुस्लिम समुदायों के त्योहार एक ही दिन या आस पास पड़ जाते हैं.

 

 

सवाल है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में धर्मगुरुओं के प्रभाव का कितना इस्तेमाल हो सकता है?

 

 

सवाल ये भी है कि लॉकडाउन खत्म किये जाने की स्थिति में क्या लोग धर्मगुरुओं की बात मानेंगे – आखिर लोगों पर धर्मगुरुओं का कितना प्रभाव है?

 

 

गाजियाबाद और नोएडा से खबर है कि 5 अप्रैल को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे के बीच 237 लोगों को लॉकडाउन के उल्लंघन के लिए गिरफ्तार किया गया है. इस दौरान नोएडा में 5 सौ से ज्यादा वाहन चेक किये गये और उनमें 49 का चालान और चार सीज कर दिये गये.

 

 

ये हाल तबका है जब पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन लागू है. ये हाल तब है जब लॉकडाउन में रहते हुए लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक एक मैसेज पर अमल करने को लेकर सोशल मीडिया पर एक दूसरे को जागरुक करने में जुटे हैं.

 

 

सवाल तो ये भी है कि जब प्रधानमंत्री मोदी की एक अपील पर देश तय वक्त पर खड़े होकर ताली और थाली बजाने को तैयार है. जब प्रधानमंत्री मोदी के एक वीडियो मैसेज पर देश बत्ती बुझाकर नयी रोशनी बिखेर दे रहा है – तो धर्मगुरुओं के प्रभाव का इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों आ पड़ी?

 

 

अब तक तो यही देखने को मिला है कि सिर्फ तब्लीगी जमात के लोग लॉकडाउन, सोशल डिस्टैंसिंग और कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते आये हैं – और कोई समूत तो ऐसा करता नहीं देखा गया है. और तो और तब्लीगी जमात का मुखिया भी पुलिस से भागता फिर रहा है – हैरानी की तो बात ये है कि अब तक न तो मौलाना साद या किसी और धर्मगुरु ने तब्लीगी जमात के लोगों से संयम बरतने की अपील नहीं की है. कोरोना वायरस फैलाने में अब तक तब्लीगी जमात का कोई सानी भी नहीं देखने को मिला है – पूरे देश में कोरोना संक्रमित लोगों में एक तिहाई सिर्फ तब्लीगी जमात के लोग हैं.

 

 

अगर ऐसे लोगों के लिए किसी धर्मगुरु के प्रभाव का इस्तेमाल नहीं हुआ तो बाकी कहां कौन उत्पात मचा रहा है – और जो लोग लॉकडाउन का उल्लंघन करते गिरफ्तार किये गये हैं वे भला किसी की सुनने वाले हैं?

 

 

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