अखण्ड भारत

Lockdown extension in India: लॉकडाउन न बढ़ाएं तो उसका असर भी जान लीजिए…

Lockdown extension in India: लॉकडाउन न बढ़ाएं तो उसका असर भी जान लीजिए…

 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) कोरोना वायरस लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने (Coronavirus Lockdown Extension in India) को लेकर अपना फैसला मंगलवार की सुबह 10 बजे शेयर करने वाले हैं – लेकिन क्या आपने सोचा है अगर मोदी संपूर्ण लॉकडाउन नहीं बढ़ाते तो देश की तमाम व्यवस्थाओं पर क्या फर्क पड़ सकता है?

 

सच के साथ|संपूर्ण लॉकडाउन को बढ़ाया (Lockdown Extension in India) जाना चाहिये या नहीं, फैसला केंद्र सरकार को लेना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद तकरीबन सभी लोग मान कर चल रहे हैं कि लॉकडाउन और दो हफ्ते के लिए बढ़ाया जाना तय है. पहली बार में ये 21 दिन के लिए लागू किया गया है – और प्रधानमंत्री मोदी को ही इसे बढ़ाये जाने का फैसला भी लेना है और उसकी औपचारिक घोषणा भी करनी है. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करके बता दिया है कि 14 अप्रैल मंगलवार को सुबह वे इस बारे में जनता को संबोधित करेंगे. फर्ज कीजिये आखिरी वक्त में प्रधानमंत्री मोदी कोरोना वायरस लॉकडाउन (Coronavirus lockdown) नहीं बढ़ाने का फैसला करते हैं – फिर क्या होगा?

 

 

ग्राउंड लेवल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा

ऐसा तो बिलकुल नहीं होगा कि संपूर्ण लॉकडाउन लागू नहीं होने से लोग फिर से सड़कों पर निकल पड़ेंगे. फिर से जगह जगह लोगों की भीड़ जुटने लगेगी – और सोशल डिस्टैंसिंग गड़बड़ होने की वजह से कोरोना वायरस का खतरा जहां से शुरू हुआ, वहीं पहुंच जाएगा – लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होने जा रहा है.

 

 

देखा जाये तो कई राज्य सरकारों ने प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा का इंतजार किये बगैर ही दो हफ्ते के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया है. लॉकडाउन दो हफ्ते के लिए बढ़ाये जाने का फैसला सबसे पहले किया है ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने. उसके बाद पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी लॉकडाउन बढ़ाये जाने की घोषणा कर दी. फिर महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला किया है – जाहिर है बाकी राज्य सरकारें भी वैसा ही करेंगी.

 

 

अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा न करें तो भी कोई भी राज्य सरकार लॉकडाउन खत्म करने का जोखिम उठाना नहीं ही चाहेगी. वो भी तब जब हर घंटे कहीं कोरोना पॉजिटिव तो कहीं संक्रमण से मौत की खबर आ रही हो. वैसे तो ज्यादातर मुख्यमंत्री यही चाहते हैं कि केंद्र सरकार ही संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा करे.

 

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री तो कतई इसके पक्ष में नहीं थे कि राज्य सरकारों के स्तर पर लॉकडाउन का फैसला छोड़ा जाये. दरअसल, ऐसा होने पर लॉकडाउन में एकरूपता नहीं रहेगी.

 

 

दिल्ली में तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कोरोना पर काबू पाने के लिए ऑपरेशन शील्ड चला रहे हैं. महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या दिल्ली में ही है – देश में दूसरे नंबर पर. ऑपरेशन शील्ड के तहत जैसे ही किसी इलाके में कोरोना संक्रमित कोई व्यक्ति मिलता है उसे तत्काल सील कर दिया जाता है. दिल्ली में ऐसे 35 इलाकों को सील किया जा चुका है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, रेड जोन यानी कंटेनमेंट एरिया के अलावा ऑरेंज जोन की भी पहचान की जा रही है.

 

 

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया है कि राज्य में इमरजेंसी सेवाओं को कैसे शुरू किया जाये, ऐसी भी व्यवस्ता बनायी जा रही है – और अलग अलग तरह के काम के लिए अलग अलग कमेटियां बनायी गयी हैं.

 

 

ये सब इंतजाम राज्यों के स्तर पर हो रहे हैं – लेकिन इस बीच ऐसी खबरें भी आ रही हैं जो फिक्र पैदा करती हैं. मसलन, अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के खुफिया विभाग ने जानकारी दी है कि अगर लॉकडाउन बढ़ाया जाता है तो माइग्रेंट कामगार विस्फोटक स्थिति पैदा कर सकते हैं. ये कामगार दूसरे राज्यों के हैं जिनमें ज्यादा ओडिशा के हैं. ये रिपोर्ट सूरत की घटना को देखते हुए महत्वपूर्ण हो जाती है. सूरत में देखा ही गया किस तरह शेल्टर होम में रह रहे मजदूरों ने बवाल और आगजनी की. दिल्ली के शेल्टर होम से भी तो ऐसी ही खबर आयी थी.

 

 

छिटपुट घटनाएं तो हर राज्य में देखने को मिल रही हैं जिनसे राज्य सरकारें निपट ही रही हैं. जैसे पंजाब में निहंग सिखों का उत्पात जिसमें एक पुलिस अफसर का हाथ काट दिया गया – और महाबलेश्वर में वधावन भाइयों ने किस तरह लॉकडाउन का मजाक उड़ाया सबने देखा ही.

 

संपूर्ण लॉकडाउन न बढ़ाने के फायदे

अब तो कोई शक नहीं होना चाहिये कि अगर प्रधानमंत्री मोदी देश में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा नहीं भी करते हैं तो कोई खास दिक्कत नहीं होने वाली है – ऊपर से तमाम तरह के फायदे भी हो सकते हैं.

 

 

1. सिर्फ 21 दिन का लॉकडाउन: पहला फायदा तो यही होगा प्रधानमंत्री डंके की चोट पर डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग सहित पूरी दुनिया को बता सकते हैं कि भारत ने मजह 21 दिन का लॉकडाउन लागू किया और कोरोना को फैलने से रोक लिया गया. अब जहां कहीं भी स्थिति गंभीर है वहां स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारें अपने हिसाब से काम कर रही हैं.

 

 

2. विश्व बैंक की आशंका निर्मूल साबित होगी: विश्व बैंक का कहना है कि भारत में लॉकडाउन ज्यादा लंबा चलता है तो आर्थिक स्थिति विश्व बैंक के अनुमान से अधिक बुरी भी हो सकती है. विश्व बैंक का कहना है कि महामारी को रोकने के साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी को खाना भी मिल सके. साथ ही, लघु और मझोले उद्योगों को दिवालिया होने से भी बचाना होगा. अब अगर प्रधानमंत्री मोदी लॉकडाउन को नहीं बढ़ाये जाने का फैसला करते हैं तो विश्व बैंक की ऐसी आशंकाओं का कोई मतलब नहीं रह जाएगा यानी ऐसी समस्याएं आएंगी ही नहीं.

 

 

3. जिम्मेदारी बंटने से काम आसान होगा: अभी तो हाल ये है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम लगातार सक्रिय है और हर छोटी से लेकर बड़ी बात का ख्याल रख रही है. राज्य सरकारों की जिम्मेदारी संपूर्ण लॉकडाउन को लागू कराने और स्थानीय स्तर की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देने की है. अगर संपूर्ण लॉकडाउन नहीं बढ़ाया जाता तो राज्य सरकारें जान बचाने पर फोकस करेंगी और केंद्र सरकार जहान यानी जरूरतों पर जिनसे अर्थव्यवस्था सुधरे, जरूरी चीजों की किल्लत न हो – और किसी जरूरी काम में रुकावट न आये.

 

 

4. जिंदगी पटरी पर लौटाने की कोशिश होगी: संपूर्ण लॉकडाउन न होने की स्थिति में केंद्र सरकार ट्रेन और हवाई सेवाओं को जरूरत के हिसाब से चालू कर सकती है. बड़ी संख्या में लोग इधर-उधर फंसे हुए हैं. स्वास्थ्य के सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उनके आने जाने की व्यवस्था केंद्र सरकार कर सकती है. ये काम भी वैसे ही हो सकता है जैसे दूसरे देशों में फंसे लोगों को भारत सरकार ने रिस्क्यू किया था.

 

 

5. रोजी-रोटी के संकट का हल निकलेगा: केंद्र सरकार पर एक बड़ी जिम्मेदारी बेरोजगार दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी पटरी पर लाने की भी है. माना जा रहा है कि कोरोना संकट की वजह से भारत में ऐसे 40 करोड़ लोग गरीबी के चंगुल में बुरी तरह फंस सकते हैं – अगर राज्य सरकारें लॉकडाउन लागू कर फिलहाल जैसे चल रहा है उसे आगे भी चालू रखें तो केंद्र सरकार देश के सामने खड़ी दूसरी चुनौतियों से मुकाबले की रणनीति तैयार कर सकती है और उसके हिसाब से एक्शन प्लान तैयार कर काम शुरू हो सकता है.

 

 

प्रधानमंत्री ठीक कह रहे हैं कि जान है तो जहान है – और ये भी ठीक है कि जान भी जरूरी है और जहान भी जरूरी है. अब तो ये नौबत आ पड़ी है कि जहान को दुरूस्त नहीं रखा गया तब भी जान पर ही बन आने वाली है – और सब कुछ ठीक करने और फिर से पटरी पर लाने के अगर संपूर्ण लॉकडाउन की जगह राज्यों के स्तर पर खास इलाकों में ही लॉकडाउन रखा जाता है तो भी काम चल सकता है.

 

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