क्राइम्स

शुभ संकेत नहीं है कोरोना के 10 लाख मामले और लॉकडाउन की वापसी

शुभ संकेत नहीं है कोरोना के 10 लाख मामले और लॉकडाउन की वापसी
लॉकडाउन के तुग़लक़ी फ़ैसले से लेकर आर्थिक पैकेज का लाभ सही हक़दार तक पहुंचाने में सरकारें असफल रही हैं। दिक़्क़त यह है कि इस लड़ाई में सरकार की जो कमियां पहले दिन दिख रहीं थी, वो बदस्तूर आज भी जारी हैं।

 

सच के साथ|देश में कोरोना संक्रमण को लेकर लड़ाई एक कठिन दौर में पहुंच गई है। राज्य सरकारों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड-19 के मामलों की संख्या बृहस्पतिवार को दस लाख के पार चली गयी, वहीं संक्रमण से अब तक 25 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर में संक्रमण के मामलों की संख्या के लिहाज से भारत का स्थान अमेरिका और ब्राजील के बाद तीसरा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में कोविड-19 के 3,31,146 इलाजरत मरीज हैं, जो देश में बृहस्पतिवार तक सामने आये कुल मामलों के करीब एक तिहाई हैं।

 

 

हालांकि हाल-फिलहाल दुनिया को इस महामारी से निजात मिलती नहीं दिख रही है, लेकिन यह ठीक नहीं कि भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण कम होता नहीं दिखता। गौरतलब है कि चंद दिन पहले तक प्रतिदिन 10-12 हजार कोरोना मरीज सामने आ रहे थे, फिर वे 20-22 हजार से अधिक हो गए और अब 30 हजार से ज्यादा हो गए। शुक्रवार को पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड 34,956 नए मामले सामने आए हैं। यदि यह सिलसिला थमा नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हर दिन में एक लाख नए मरीज सामने आ सकते हैं।

 

 

कुछ ऐसी ही आशंका कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी व्यक्त की है। देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख से अधिक हो जाने को लेकर शुक्रवार को उन्होंने कहा कि अगर कोविड-19 इसी तेजी से फैला तो 10 अगस्त तक संक्रमण के मामले 20 लाख के पार चले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस महामारी को रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, ‘10,00,000 का आंकड़ा पार हो गया। इसी तेजी से कोविड-19 फैला तो 10 अगस्त तक देश में 20,00,000 से ज्यादा संक्रमित होंगे। सरकार को महामारी रोकने के लिए ठोस, नियोजित कदम उठाने चाहिए।’

 

 

‘द लैंसेट’ की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 640 जिलों में से 627 जिले कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे है।

 

 

रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत में कोरोना वायरस की स्थिति को संभालने के लिए ज़िला-स्तर पर योजनाएं बनाने और उन्हें लागू किये जाने की जरूरत है। इसके साथ ही जो इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं उन पर विशेष तौर से ध्यान दिए जाने और रणनीति बनाकर काम करने की आवश्यकता है। सार्वजनिक तौर पर मौजूद आंकड़ों के आधार पर देश के सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों की पहचान की गई है। संक्रमण के मामले, आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदा हालात को आधार बनाकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।”

 

 

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अगर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो कोरोना वायरस की महामारी बद से बदतर होती जाएगी। संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा कि दुनिया के कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामले में गलत दिशा में जा रहे हैं।
डॉ. टेड्रोस ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं और इससे साबित होता है कि जिन एहतियात और उपाय की बात की जा रही है, उनका पालन नहीं किया जा रहा है।

 

 

इसके अलावा मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ साथ कोरोना योद्धाओं में बढ़ता संक्रमण भी चिंता का विषय बना हुआ है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 से देश में 99 डॉक्टरों की मौत हुई है। आईएमए के राष्ट्रीय कोविड रजिस्ट्री डाटा के मुताबिक कोविड-19 से कुल 1302 डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। इसमें 99 डॉक्टरों की मौत हो गयी। आईएमए ने एक बयान में कहा, ‘आईएमए ने डॉक्टरों और चिकित्सा प्रशासकों से एहतियात बरतने के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।’

 

 

इसी तरह केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय पुलिस बलों में कोरोना वायरस संक्रमण की संख्या बुधवार को 242 नए मामलों के सामने आने के बाद 7000 के पार पहुंच गए। ये मामले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) में सामने आए हैं।

 

 

नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, इन बलों में अब तक कोविड-19 के 7,059 मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से 3,233 का इलाज चल रहा है, जबकि अन्य मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों में अब तक इस महामारी से 36 कर्मचारियों की जान भी जा चुकी है।

 

 

ये कुछ आंकड़े हैं जो अभी सामने आए हैं। इसके अलावा नर्स, सफाईकर्मी, पुलिसबल के लोग भी बड़ी संख्या में संक्रमित हुए हैं। दरअसल हमें इस लड़ाई में कोरोना योद्धाओं का मनोबल बनाए रखना है। इस लड़ाई में जीत हमें इन्हीं के बदौलत मिलनी है।

 

 

दूसरी तरफ जब दुनिया के कई देशों में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या पहले के मुकाबले कम होनी शुरू हो गई है तब अपने अपने देश में इसकी सूरत बनती न दिखना चिंता की बात है। यह सही है कि अपने देश में कोरोना संक्रमण की चपेट में आए लोगों की मृत्यु दर कहीं कम है और ठीक होने वाले मरीजों की दर भी साठ प्रतिशत से अधिक हो गई है, लेकिन यदि कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या नहीं थमी तो फिर जन जीवन को सामान्य करने में मुश्किल ही पेश आनी है। इसका साफ परिणाम यह होगा कि कारोबार गति नहीं पकड़ पाएगा। इससे मुश्किलों का दौर लंबा खिंचता चला जाएगा।

 

 

फिलहाल कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह फिर से लॉकडाउन का सहारा लेना पड़ रहा है वह कोई शुभ संकेत नहीं। बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश के साथ देश कुछ अन्य राज्यों में लॉकडाउन की वापसी यही बताती है कि इस महामारी को मात देना अभी भी एक कठिन लक्ष्य बना हुआ है।

 

 

नि:संदेह कोरोना से लड़ाई जितनी लंबी होगी वह गरीबों और देश की दूसरी समस्याओं को बढ़ाने का ही काम करेगी। दुखद बात यह है कि अब तक केंद्र सरकार समेत दूसरे कई राज्य सरकारों ने अपने फैसलों से निराश ही किया है। ज्यादातर सरकारों की भूमिका नकारात्मक ही रही है।

 

 

लॉकडाउन के तुगलकी फैसले से लेकर आर्थिक पैकेज का लाभ सही हकदार तक पहुंचाने में सरकारें असफल रही है। दिक्कत यह है कि इस लड़ाई में सरकार की जो कमियां पहले दिन दिख रहीं थी, वो बदस्तूर आज भी जारी हैं।

 

 

जैसे कि व्यापक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक भौगौलिकता, लचर स्वास्थ्य जागरूकता, अपर्याप्त स्वास्थ्य बजट, अपर्याप्त चिकित्सा-अनुसंधान, स्वास्थ्य बीमा प्रक्रिया, प्रशासनिक एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी और अकुशल सरकारी स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी संरचनाएं। इसके कारण महामारी से ज्यादा नुकसान का खतरा अब भी बना हुआ है। ऐसे में मरीजों की निरंतर बढ़ती संख्या खतरे की घंटी की तरह बज रही है।

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