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UP:तितलियों का ठौर 90% कार्य पूर्ण, पार्क और ब्रीडिंग सेंटर अगस्‍त तक होगा तैयार

गोरखपुर|खूबसूरत रंगबिरंगी तितलियां किसे नहीं लुभातीं। ऐसी तितलियों के लिए उत्तर प्रदेश का पहला इंडोर बटरफ्लाई पार्क और ब्रीडिंग सेंटर शहीद अशफाक उल्ला खॉ प्राणि उद्यान में बन रहा है। निर्माण जोरों पर है। अगस्त के पहले हफ्ते तक इस इंडोर पार्क और ब्रीडिंग सेंटर का काम पूरा होने की सम्‍भावना है। इस पार्क में तितलियों की 40 से ज्यादा प्रजातियां संरक्षित की जाएंगी। ब्रीडिंग के लिए अगल से सेल भी निर्मित किया जा रहा है।

 

 
तकरीबन एक हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में निर्मित किए जा रहे इस इंडोर बटरफ्लाई पार्क एवं ब्रीडिंग सेंटर में लाइन ब्लू, डिंगी स्विफ्ट, बलका पेरट, स्पॉटेड पैरट , प्लेन टाइगर, कॉमन कैस्टर, कॉमन ग्लास यलो, कॉमन जे, डेनेड एगफ्लाई, लैमन मिगरेंट, कुछ दुर्लभ प्रजातियां इंडियन रेड फ्लैश, बुश ब्राउन, क्रिमसन टिप, रेड आई, अफ्रीकन बाबुल ब्लू और कॉमन शॉट सिल्वरलाइन समेत 70 से ज्यादा तितलियों की प्रजातियां संरक्षित की जाएंगी। इस पार्क में सर्दियों के सीजन में भी तितलियों की सक्रियता के मद्देनजर तापमान भी नियंत्रित किया जा सकेगा। प्राणि उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह कहते हैं कि तितलियों के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त रहता है जिसे इस इंडोर पार्क में नियंत्रित किया जा सकेगा। केंद्रीय प्राणि उद्यान प्राधिकरण की गाइडलाइन के मुताबिक यहां तितली वैज्ञानिक भी नियुक्त होंगे। डॉ सिंह के मुताबिक तितलियों सम्पूर्ण जीवन चक्र अंडा, लार्वा (केटरपिलर), प्यूपा (क्रिस्लिस) और वयस्क के चक्र से गुजरता है। व्यस्क तितली सिर्फ 10 से 12 दिन जीवित रहती है। तितली 17 किमी प्रति घंटे की रफ्तार एवं 3000 फीट की ऊंचाई पर भी उड़ सकती है।

लगाए जाएंगे होस्ट प्लांट
आमतौर पर माना जाता है कि तितलिया फूल जहां ज्यादा होते हैं, वहां रहती है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के अपने होस्ट प्लांट होते हैं। तितलियां उन्हीं पर अण्डे देती हैं। लिहाजा इण्डोर तितली पार्क में तितलियों की प्रजातियों के हिसाब से होस्ट प्लांट भी लगाए जाएंगे। मसलन कढ़ी पत्ता, नींबू, पाम, हरश्रृंगार, मालती, गेंदा, अमलताश, बेल, नीम, जामुन, लौकी, तोरी जैसे पौधें लगाए जाएंगे। इसके अलावा ब्रीडिंग सेंटर में भी होस्ट प्लांट लगाए जाएंगे। इण्डोर प्लांट में पयर्टक जा सकेंगे लेकिन ब्रीडिंग सेंटर में किसी भी व्यक्ति के प्रवेश की इजाजत नहीं होगी। तितलिया पर्यावरण की शुद्धता के प्रति काफी आग्रही होती है, इसलिए भी ब्रीडिंग सेंटर में लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

 
90 फीसदी तक काम पूरा
राजकीय निर्माण निगम के अवर अभियंता एवं प्रोजेक्ट मैनेजर डीबी सिंह बबाते हैं कि फीसदी से अधिक काम पूर्ण हो चुका है। इंडोर पार्क में जल्द ही होस्ट प्लांट लगाए जाएंगे। ब्रीडिंग सेंटर का निर्माण कार्य भी जल्द ही पूर्ण कर लिया जाएगा। दोनों की छते पॉली कार्बोनेट शीट की बनाई जा रही हैं। ताकि आवश्यकता के मुताबिक धूप मिले। इण्डोर पार्क और ब्रीडिंग सेंटर को कनेक्ट कर इनरीचमेंट का काम शुरू होगा।

 
तितलियों का संरक्षण वर्तमान की जरूरत
भारत के सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं पर्यावरण विद माइक हरिगोंविद पाण्डेय कहते हैं कि बढ़ते प्रदूषण, कीट नाशकों के बढ़ते इस्तेमाल ने तितलियों को काफी क्षति पहुंचाई है। पिछली बार कब तितली देखा, स्मरण करने में वक्त लगता है। प्राणि उद्यान में तितली पार्क बनने से लोगों में जागरूकता आएगी। मेरा सुझाव है कि उनके संरक्षण देने के लिए पार्क में छोटे-छोटे वाइल्ड पैच छोड़ने होंगे। वहां उनके होस्ट प्लांट लगाने होंगे। असल में तितलियों की मौजूदगी इकोसिस्टम के लिए काफी जरूरी है। यह फसलों का परागण भी करती हैं।

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