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मगहर:सरकार के फैसले से कताई मिल के कर्मियों की उम्मीदें खत्म

संतकबीरनगर|सद्गुरु कबीर की निर्वाणस्थली मगहर में दो दशक से बंद पड़ी संतकबीर कताई मिल चलने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई। प्रदेश सरकार के मिल बेचने के फैसले से मिल कर्मचारियों के अरमान बिखर गए I कई कर्मचारियों ने मिल चलने की आस में अपनी जिंदगी बरबाद कर ली। मिल चालू कराने के लिए कई आंदोलन हुए और लंबी लड़ाई लड़ी गई, लेकिन सरकार के फैसले के आगे सभी बौने साबित हुए।

 

 

1977 में स्थापना, एक हजार मजदूर काम करते थे

नगर पंचायत मगहर में 1977 में संतकबीर सहकारी कताई मिल की स्थापना की गई थी। इसमें लगभग एक हजार मजदूर काम करते थे। यहां सूत तैयार किया जाता था। बुनकरों को सस्ते दर पर सूत मिलने से उनका भी रोजगार फल-फूल रहा था। इससे नगर की आधी आबादी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी थी। यहां के लोगों के रोजगार में भी यह सहायक थी।

 

 

कबीर के कर्मयोग की याद दिलाती थी कताई मिल

यह मिल कबीर के कर्मयोग की याद दिलाती थी। वह अपने जीवन काल में सूत कातने का कार्य करते थे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने व उनकी याद को ताजा रखने के लिए संत कबीर कताई मिल की स्थापना की गई। उन्हीं के नाम पर कताई मिल का नामकरण भी किया किया गया था। इसके अलावा नगर तथा आसपास के क्षेत्रों में स्थापित हथकरघा उद्योग को संजीवनी मिलती थी और यह उद्योग लोगों का प्रमुख व्यवसाय भी बन गया था। मिल कर्मचारी व प्रबंधन के बीच मामूली विवाद के चलते 1997 में बंद हो गई, जिससे हथकरघा उद्योग प्रभावित हुआ। फिर पूरी तरह से बंद हो गया।

 

 

हाईटेक होने की थी उम्मीद

संतकबीर कताई मिल में लगी मशीनें गुजरे जमाने की और पुरानी हो चुकी थीं। दो दशक से मिल न चलने के कारण के कारण इनमें जंग लग गया है। मशीनों को ठीक करना और पुर्जे मिलना टेढ़ी खीर साबित होती। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इन मशीनों को हटाकर आधुनिक मशीनें यहां लगाई जाएंगी और सूत तैयार होगा। मिल के बेचने के फैसले से सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गई।

 

 

हर सरकार से मिलता रहा आश्वासन पर नहीं पूरी हुई आस

प्रदेश में हर बार सत्ता परिवर्तन होने के बाद लोगों ने सरकार से उम्मीद लगाई। हर बार प्रदेश सरकार तक ज्ञापन दिए जाते। सरकारों से आश्वासन मिलता। पर सरकार के जाने के साथ आश्वासन पीछे छूटता गया। वर्ष 2012 में बनी सपा सरकार से काफी उम्मीद थी। उसने भी अपना कार्यकाल पूरा कर लिया पर आश्वासन पूरा नहीं हुआ। मौजूदा सरकार से काफी उम्मीद थी। मुख्यमंत्री यहां की परिस्थिति से वाकिफ थे। स्थानीय विधायक ने भी कर्मचारियों के बीच पहुंचकर आश्वासन दिया था। यहां दूसरा उद्योग लगने की भी चर्चा होती रही पर वह परवान नहीं चढ़ी, बल्कि अब मिल बेचने की बात आ गई।

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